होलिका दहन क्या है

कौन थी होलिका क्यों होता है होलिका दहन – दोस्तों होली का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है. और हमारे देश के लगभग प्रत्येक भाग में यह त्यौहार मनाया जाता है. होली उत्साह और उमंग का प्रमुख त्यौहार है जिसे लोग बड़ेहि उत्साह और उमंग से मनाते है. वर्षभर में आने वाली  त्रि – राशियों में से एक होली की रात्रि भी है, और दोस्तों जिसमे किये गए सभी धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र, जप, पाठ, आदि सिद्ध, अक्षुण्य हो जाते है. जिनका फल जीवन प्रियंत्र कर्ता के प्राप्त होता है.कौन थी होलिका क्यों होता है होलिका दहनदोस्तों यहा आपको एक बात जानना जरुरी है, की जिस होलिका को हम जलाते है, वो राक्षल कुल की एक स्त्री थी, उसका नाम होलिका था. और वह हिरण्याकश्यप और हिरण्याश्रय की बहन थी. और होलिया के भाइयो ने प्रहलाद को मारने के लिए होलिका को मिले वरदान का लाभ लेना चाहा था, पर दुर्भाग्यवश प्रहलाद की जगह होकिका खुद ही उस आग में जल कर मर गई.

होली का दहन कैसे होती है –

दोस्तों आप कही भी रहते होंगे चाहे गांव में और शहर में हर जगह होली दहन होता है . और में आपको बताऊ की मै गांव का रहने वाला हु , और हमारे यहा गोबर के कंडो की होली जलाई जाती है. और अब इस तरह की होली याने कंडे की होली शहरों में भी मनाई जारही है.

और उससे होली जलाई जाती है. गावो में घर – घर जाकर कंडे इकट्ठे किये जाते है, मै जहा रहता हु, वहा होली का दहन सुबहे होता है, मतलब शामको कंडे इकट्ठे किये जाते है. और उसे एक स्थान पर जहा होलिका दहन होना है. वहा जमाया जाता है. और फिर अगली सुबह लगभग 5  बजे होलीका में आग लगाई जाती है.

लोग सुबहे – सुबहे अपने बच्चो के साथ आकर होली का में तापते है, तापना मतलब होलिका की आग में हाथ सेखना और उसका बहुत महत्व है.

कौन थी होलिका क्यों होता है होलिका दहन”

उसमे नारियल चढ़ाते है. और उसके आस – पास परिक्रमा लगाते है.ऐसा कहा जाता है की जब होली का दहन होती है. और हम उसकी परिक्रमा लगाते है तो उसका बहुत महत्व है. एक प्रथा यह भी है की साल की ठंड का समापन भी होली के जलने के साथ ही हो जाता है, इसके बाद गर्मी लग जाती है.

बाधाये दूर होती है –

दोस्तों इस होली की अग्नि में अपनी शरीर की सभी शारीरिक, मानसिक व्याधि, किसी प्रकार की सफलता में रुकावट, आर्थिक कष्ट, अला – बला एवं अभी बधावो का नाश करने के लिए. एक सरल एवं प्रभावकारी उपाय है, और जिसे आसानी से किया जा सकता है. और हमारी सभी बधावो को होली की अग्नि में भस्म करके जीवन को सुगम बना सकते है.

Friends होलिका दहन की लपटे बहुत शुभकारी होती है. होलिका दहन की अग्नि में हर चिंता खाक हो जाती है. दुखो का नाश हो जाता है. और इच्छावो के पूर्ण होने का वरदान मिलता है.

बुराई पर अच्छाई की जित के इस पर्व में जितना महत्व रंगो का है. उतना ही होलिका दहन का है. और यह मान्यता है की अगर  विधि विधान से होली का का दहन किया जाता है तो मुश्किलो को समाप्त होते देर नहीं लगती और इंसान की हर मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है.

परिक्रमा का महत्व क्या है – 

दोस्तों होलिका पूजा को दहन में परिक्रमा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. कहते है परिक्रमा करते हुए. अगर हम कोई इच्छा करते है तो वह पूर्ण हो जाती है.

और परिक्रमा के आलावा होलिका दहन में कंडो को जलाना भी होता है बेहद जरूरी . दोस्तों हम  कितने कंडे जलाये और किस आकर के कंडे जलाये ये भी आपको अपनी मनोकामना और श्रद्धा के हिसाब से तय करना होगा.

दोस्तों इस होलिका दहन में परिक्रमा करना और कंडे जलाना आपके सपनो को परवान चढ़ाते है. और प्रसाद की अहमियत भी कुछ कम नहीं है. हमारे यहा क्या होता है होलीका के अंदर ही नारियल डाला जाता है.

और फिर जला हुवा नारियल निकाला जाता है और उसकी प्रसाद बाटते है, तो उसका बहुत महत्व है. दोस्तों आपके जीवन में जो भी सपने हो आपकी जो भी इच्छाएं हो होलिका पूजन में सब पूर्ण होगी.

तो दोस्तों आपको यह post “कौन थी होलिका क्यों होता है होलिका दहन” कैसी लगी please  हमे बताये और मै आशा करता हु, की आप सब भी होलिका दहन में जाये वहा शमिल होकर उसकी पूजा करे और अपने जीवन को धन्य करे. यही मेरी मनो कामना है.

और आप इस post से Related अपने विचार हमे Comments के माध्यम से भेज सकते है हमे आपके Comments का इंतजार रहेगा.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.