हमारी हक की रोटी क्या है

हमारी हक की रोटी क्या है – जैसा हमारी आज की पोस्ट का नाम है “हक की रोटी क्या है”, तो में आपसे पूछता हु, की हक़ की रोटी याने “हमारी खाना कितना जरूरी है, और जरूरी है भी या नहीं आज हम देखेंगे. दोस्तों हक़ की रोटी खाना,  देखा जाये तो बस एक कहावत मात्र है पर ये कहावत बढ़ी मायने रखती है ऐसा कहा जाता है. हमे किसी के हक की रोटी नहीं खाना चाहिए और किसी को अपने हक की रोटी नहीं खाने देना चाहिए आपने भी जरूर सुना होगा मगर रियल life में इसका कैसे implement होता है, हम आज देखेंगे.हमारी हक की रोटी क्या हैहक की रोटी वो है जो किसी मजदूर को उसकी मजदूरी के बराबर मजदूरी ना दी जाये उसे कहते है,  हक की रोटी खाना नहीं चाहिए, अर्थात हम किसी से जितना काम करवाते है, हमे उसके काम के बराबर उसे उसका मेहनताना देना चाहिए, और अगर हम ऐसा नहीं करते है, तो हमने उसके हम की रोटी खाई है. और जैसा मैंने आपको बताया है, की हमे किसी के हक की रोटी याने उसकी मेहनत और परिश्रम का फल नहीं खाना है.

दोस्तों इस दुनिया में आपने देखा होगा की काम करने की एक चेन बनी  हुई है नहीं समझे में आपको समझता हु, दुनिया में कोई भी काम जैसे किसी का बढ़ा या किसी का छोटा किसी की नौकरी या किसी का बिजनेस है.

तो आपने देखा होगा हर काम में एक चेन बनी है जैसे किसी company के मालिक से लेसे उसके एक छोटे से छोटे workers तक सभी एक चैन के अंतर्गत काम करता है.

तो वहा पे सब एक दूसरे से ऊपर होते है, और दोस्तों यहा पे हक की रोटी वाली बात कैसे होती है जैसे हम किसी अपने से छोटे इंसान का हक मारते है उसके हक की रोटी खाते है. तो दुनिया का ऐसा सिस्टम है, की हमारे ऊपर वाला हमारे हक की रोटी खाता है, और उसके ऊपर वाला उसकी ये क्रम चलता ही रहता है. और लोग एक दूसरे का हक मारते रहते है.

हमारी हक की रोटी क्या है”

तो क्या मित्रो ये सही है, और जैसा companies में होते है इसे increment के रूप में देखा जाता है, जैसे एक दूसरे के ऊपर वाला अपने निचे की post वाले का increment करवाता है, तो उसका सीनियर उसका हक खा लेता  है, मतलब उसे जितना increment मिलने का होता है. उसे नहीं मिलता तो उसके परिश्रम का फल चला जाता है.

और अब लोगो को ये पॉलिसी बदलनी चाहिए, तभी सब का विकास होगा और काम भी अच्छा होगा, मानलो किसी का increment उसको उसके काम के हिसाब से सही नहीं दिया गया तो वो क्या करेगा वो उसका इफेक्ट अपने work में दिखायेगा.

और अपने काम को सही और ईमानदारी के साथ नहीं करेगा, और यही चीज हम ऐसा करे की किसी को उसके काम के अनुरूप increment दे तो उसके काम करने में मेहनत और लगन और बढ़ेगी और वो काम अच्छा करेगा क्यों की उसे अपने हक की रोटी मिली  है.

अब दुनिया के हर इंसान और हर कंपनी और उसके साथ – साथ government दोस्तों government से भी लोग खुश नहीं रहते , मतलब जो लोग सरकारी नौकरी करते है वो भी अपनी नौकरी अपनी सेलरी से खुश नहीं है. तो ऐसा क्यों होता है, और में ऐसा भी नहीं कहता की सब को बहुत ज्यादा दे पर इतना दे की वो अपने हक का हो और लोग खुश रहे.

और इसी कारण वश लोगो में काम नहीं करने की भावना बढ़ी है, और इसी लिए आज लोग काम को अपना समझ कर नहीं करते उसमे अगर नुकसान भी हुवा तो होने दो कंपनी का नुकसान हुवा हमारा क्या, हमे तो काम करने से मतलब है. लोग अपने अंदर यह भावना रखते है.में आपको अपना उदाहरण देता हु, क्योकि में भी जॉब करता हु, और यह सब चीजे मैने देखी है.

मेभी एक private company में job करता हु, तो यहा भी ऐसा ही होता है, लोगो को उनके मेहनत के हिसाब से उनके हक की रोटी नहीं मिलती और हक की रोटी क्या है ये सिद्ध भी होता है. तो यहा पर भी लोगो के मन में ऐसे ही ख्याल चलते है. जो अच्छे नहीं होते

तो हमारी सरकार और हमारी समाज और हर वो इंसान जो काम करता है. या काम करवाता है , सब को यह करना होगा सबको किसी दूसरे के हक की रोटी नहीं मारनी होगी सब को उसकी मेहनत के अनुरूप मेहनताना देना बहुत जरुरी है. और दोस्तों लोग इस दुनिया में देखा – देखी सुधरते है.

एक  अच्छा करेगा तो उसे देख कर अन्य लोग भी अपने अंदर अच्छी सोच रखेंगे और सबका भला करेंगे , किसी के हक की रोटी नहीं खायेगे या किसी का हक़ नहीं  मारेंगे और फिर सबका भला होता चला जायेगा.

तो दोस्तों आपको ये post “हमारी हक की रोटी क्या है” केसी लगी  हमे जरूर बताये और इस post को पढ़ने के बाद आप जरूर वो चीजे सीखेंगे जो यहा आपको बताई गई है. और आप किसी के हक की रोटी नहीं खायेगे और ना अपने हक की रोटी किसी को खाने देंगे.

और इस post से related आपके जो भी सुझाव है, आप हमे comments के माध्यम से भेज सकते है हमे आपके comments का इंतजार रहेगा.

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