महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना की जीवनी Biography

महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना की जीवनी Biography – Friends हर  गोविन्द  खुराना  हिन्दुस्तान  के  महान  वैज्ञानिको  में  एक  है, वे  एक  भारतीय  अमेरिकी  जीव  रसायनज्ञ  थे. हर  हिंदुस्तानी  को  उन  पर  गर्व  होता  है  उन्होंने  भारत  का  नाम  अपने  शोध  के  कारण  सम्पूर्ण  विश्व  में  बढ़या  है. उन्हें  विस्कॉन्सिन   विश्वविद्यालय  अमेरिका  में  अनुसन्धान  करते  हुए.महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना की जीवनी Biography1968 में  मार्शल  डब्ल्यू  निरेनबर्ग  और  रॉबर्ट  डब्ल्यू  होली  के  साथ  फिजियोलॉजी  या  मेडिसीन  के  लिए  नोबेल  पुरस्कार  संयुक्त  रूप  से  मिला. उनके  द्वारा  न्यूक्लिक  एसिड  में  न्यूक्लियोटाइड  का  कर्म  खोजा  गया,

और  मित्रो  जिसमे  कोशिका  के  अनुवांशित  कोड  होते  है, जो  प्रोटीन  के  शेल  के  संश्लेषण  को  नियंत्रित  करता  है, मित्रो  हर  गोविन्द  सिंह  खुराना  और  निरेनबर्ग  को  उसी  वर्ष  कोलंबिया  विश्व  विद्यालय  से  लुईसा  ग्रास  हॉर्विट्ज  पुरस्कार  भी  दिया  गया  था.

मित्रो  हर गोविन्द  खुराना  का  जन्म  जब  हुवा  तब  देश  में  अंग्रेजी  हुकूमत  थी  और  उस  दौर  में  उन्होंने  उत्तरी  अमेरिका  में  तीन  विश्वविद्यालयो  में  संकाय  में  कार्य  किया, और  उन्होंने  सन  1966 में  संयुक्त  राज्य  अमेरिका  की  नागरिकता  लेली  और  1987 में  विज्ञान  का  राष्ट्रीय  पदक  प्राप्त  किया.

महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना का संक्षिप्त परिचय –

नाम – हरगोविंद खुराना

पिता – गणपत राय खुराना.

माता – कृष्ण  देवी  खुराना 

जन्म – 9 जनवरी, 1922, रायपुर जिला, मुल्तान, पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान)

मृत्यु – 9 नवम्बर, 2011, एस्थर एलिजाबेथ सिल्बर

हर गोविंद खुराना का शुरुवाती जीवन –

दोस्तों  डॉ  हर गोविंद  खुराना  का  जन्म  ब्रिटिश  कालीन  भारत  में  9 जनवरी 1922 को  पंजाब  के छोटे  से  गाँव  रायपुर  में  हुवा  था. और  मित्रो  अब  यह  स्थान  पूर्वी  पाकिस्तान  का  हिस्सा  है, उनके  पिता  का  नाम  श्री  गणपत  राय  खुराना  था. जो एक पटवारी  थे, उनकी  माता  जी  कृष्ण  देवी  खुराना  एक  गृहणी  थी. डॉ  खुराना  के  चार  भाई  और  एक  बहन  थी  और  वह  सबसे  छोटे  भाई  थे.

मित्रो  उस  दौर  में  भी  उनके  पिता  शिक्षा  का  महत्व  अच्छी  तरह  समझते  थे, इसलिए  वो  एक  सामान्य  जीवन  जीने  के  साथ – साथ  अपने  बच्चो  की  पढ़ाई  पर  बहुत  ध्यान  देते  थे, और  school से  आने  के  बाद  खुद  भी  बच्चो  को  पढ़ाते  थे.

और  मित्रो  हर गोविंद  खुराना  के  जीवन  में  सफलता  हासिल  करने  में  उनके  परिवार  का  बहुत  बड़ा  योगदान  था  की  जिस  दौर  में  पढ़ाई  के  इतने  स्त्रोत  नहीं  होने  के  बाद  भी  उन्होंने  जीवन  में  इतना  बड़ा  मुकाम  हासिल  किया  और वह  विश्व  का  जाने – माने  वैज्ञानिक  बने.

महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना की जीवनी Biography”

दोस्तों  डॉ  हर गोविंद  खुराना  ने  अपनी  आत्म  कथा  में  लिखा  था.

गरीब  होते  हुए  भी  मेरे  पिता  अपने  बच्चो  की  शिक्षा  के  लिए  समर्पित  थे,

और  100 लोगो  के  गांव  में  एक  मात्र  हमारा  ही  परिवार  था  जो  शिक्षित  था”.

हर गोविन्द खुराना की शिक्षा –

मित्रो  बचपन  से  ही  हरगोविंद  पढ़ाई  में  बहुत  तेज  और  ओजस्वी  छात्र  थे, और  वह  कक्षा  में  अधिकतर  अव्वल  रहते  थे, और इसी  कारणवश  उन्हें  निरंतर  छात्रवृत्ति  मिलती  रही  और  वह  आगे  की  पढ़ाई  अच्छी  तरह  कर  पाए.

मित्रो  गाँव  से  निकलने  के  बाद  हरगोविंद  खुराना  ने  D A V  हाय  स्कूल, मुल्तान  से  प्राप्त  की  और  इस  दौरान  वो  अपने  गुरु  श्री  रतन लाल जी से काफी  प्रभावी  रहे.

इसके  बाद  वे  पंजाब  विश्वविद्यालय, लाहौर  चले  गए, यहा  से  उन्होंने  वर्ष  1943 में  B S C ऑनर्स  की  पढ़ाई  पूर्ण  की, और  वर्ष  1945 में  M S C ऑनर्स  की  डिग्री  हासिल  की  थी. मित्रो  इस  दौरान  हर गोविन्द  खुराना  जी  को  उनके  शिक्षक  महान  सिंह  से  उचित  मार्गदर्शन  और  दिशा  प्राप्त  हुई.

हर  गोविन्द  खुराना  1945 तक  इसी  देश  में  ही  रहे, इसके  बाद  वे  भारत  सरकार  से  छात्रवृत्ति  अर्जित  करके  उच्च  शिक्षा  प्राप्त  करने  ब्रिटेन  गए, वहा  उन्होंने  लीवरपूर  विश्वविद्यालय  में  प्रोफेसर  राजन  J. S. बियर  की  देख  रेख  में  महत्वपूर्ण  अनुसन्धान  सम्पन्न  किये, और  Doctored (PHD) की  उपाधि  हासिल  की.

मित्रो  इसके  बाद  हर गोविन्द  खुराना  एक  साल  के  लिए 1948 में  स्विट्ज़रलेंड  के  (Eidgenossische Technische Hochschule, Zurich) फेडरर  इंस्टीट्यूट  ऑफ  टेक्नोलॉजी में अन्वेषण कार्य हेतु गए.

वहा किये गए अन्वेषण कार्य में प्रोफेसर व्लादिमीर प्रेलॉग उनके सहभागी थे, प्रोफेसर प्रेलॉग के सानिध्य का डॉ खुराना पर गहरा असर पढ़ा और यह उनके कार्यक्षेत्र और प्रयासों में काफी मददगार साबित हुवा.

हर गोविंद खुराना का Carrier  –

Friends Doctored की डिग्री पा लेने के बाद हर गोंद खुराना एक बार ब्रिटेन गए. जहा उन्होंने वर्ष 1950 से 1952  तक केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में लार्ड तक और जी. डब्लू. केनर के साथ अध्ययन किया, और अपना ज्ञानवर्धन करते रहे.

वर्ष 1952 में ही उन्हें कनाडा के वैन्कोवर में स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से बुलावा आया. वहा जा कर उन्होंने जीव रसायन विभाग का अध्यक्ष्य पद संभाला था, यही पर रह कर उन्होंने अनुवांशिक क्षेत्र में गहन शोध कार्य आगे बढ़ाया.

कनाडा के वैंकोवार, कोलंबिया विश्वविद्यालय में उनके द्वारा की गयी अनुवाँशिक शोध के चर्चे अंतर्राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे. और अपने इस महान कार्य की बदौलत उन्हें कई पुरस्कार एवं सम्मान भी प्राप्त हुए.

डॉ. हर गोविंद खुराना को वर्ष 1960 में केनेडियन पब्लिक सर्विस द्वारा गोल्ड मेडल दिया गया था. इसी वर्ष वह कनाडा से अमरीका गए. वहा उन्होंने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एंजाइम रिसर्च में एक प्रोफेसर की नौकरी की थी, और आगे चल कर करीब पाँच से छे वर्ष बाद (वर्ष 1966 में) वह अमेरिकी नागरिक बन गए.

1968 में डॉ. हर गोविंद खुराना मार्शल निरेनबर्ग और रॉबर्ट होले को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. डॉ. हर गोविंद खुराना नोबेल पुरस्कार अर्जित करने वाले भारतीय मूल के तीसरे भारतीय बने थे, जिन्होंने यह प्रतिष्ठित सम्मान अर्जित किया था.

इन तीनो वैज्ञानिको ने मिल कर डी. एन. ए. अणु संरचना का स्पस्टीकरण किया था. एवं इन्होने ही डी. एन. ए. द्वारा की जाने वाली प्रोटीन संश्लेषण की जटिल प्रक्रिया भी समझाई.

नोबेल पुरस्कार जितने के बाद डॉ. हर गोविंद खुराना ने अपने अनूसंधान, अध्ययन और अध्यापन कार्य जारी रखे थे, उनके सानिध्य में विश्व के कई विज्ञान छात्रों ने डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की.

दोस्तों वर्ष 1970 में डॉ. हर गोविंद खुराना एम॰ आई॰ टी॰ इंस्टीट्यूट में जिव विज्ञान एवं रसायन विज्ञान के अल्फ्रेड स्लोअन प्रोफेसर पद पर नियुक्त किये गए थे. आने वाले लम्बे समय (वर्ष 2007) तक वह इसी संस्था से जुड़े रहे और वहा रह कर उन्होंने कई सारे अध्ययन सफलता पूर्वक सम्पन्न किये और प्रसिद्ध प्राप्त की थी.

डॉ. हर गोविंद खुराना को सम्मानित करने के लिए वोस्कोसिन मेडिसिन युनिवेर्सिटी, इंडो-यू॰एस॰ साईस एंड technology तथा भारतीय सरकार ने साझा स्वरूप से वर्ष 2007 में खुराना प्रोग्राम का अनावरण किया था.

डॉ. हर गोविंद खुराना को प्राप्त हुए मुख्य सम्मान –

वर्ष 1958 में कर्म मैडल (कनाडा) मिला.

वर्ष 1960 में केनेडियन पब्लिक सर्विस द्वारा गोल्ड मैडल दिया गया.

वर्ष 1967 में डैनी हेनमैन अवार्ड मिला.

वर्ष 1968 में चिकित्सा विज्ञान में नोबेल अवार्ड जीता.

वर्ष 1968 में लॉसकर फेडरेशन पुरस्कार जीता.

वर्ष 1968 में लुईसा ग्रास हारी विट्ज पुरस्कार जीता.

वर्ष 1969 में भारतीय सरकार ने डॉ. हर गोविंद खुराना को पद्म भूषण से सम्मानित किया.

वर्ष 1971 में पंजाब युनिवेर्सिटी चंडीगढ़ के द्वारा डी॰एस॰सी की उपाधि प्रदान की गयी.

डॉ.हर गोविंद खुराना द्वारा कृत्रिम जींस अनूसंधान –

मित्रो किसी भी व्यक्ति के जिन की संरचना से ही यह निश्चित होता है की उसका रंग रूप, कद काठी, स्वभाव और उनके गुण कैसे होंगे, यह बात डॉ. खुराना के कृत्रिम जींस अध्ययन से सिद्ध हुई थी. अगर कोई दम्पत्ति खुद में उपस्तिथि दुर्गुण अपने संतान में नहीं चाहते है तो, वर्तमान युग में आधुनिक विज्ञान पद्धति द्वारा यह कार्य भी सम्भव हुआ है.

कृत्रिम जींस विज्ञान उन्नति की नीव डॉ. खुराना ने ही डाली थी, और उन्ही के रिसर्च वर्क के कारण ही आज लाखो निःसंतान दम्पत्ति माता – पिता बन पा रहे.

डॉ.हर गोविंद खुराना की मृत्यु –

मित्रो विज्ञान क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले महान वैज्ञानिक डॉ.हर गोविंद खुराना 09 नवम्बर, 2011 के दिन दुनिया को अलविदा कह गए, उनकी मृत्यु अमेरिका देश के मैसाचूसिट्स में हुई थी, डॉ.हर गोविंद खुराना का जीवनकाल 89 वर्ष का रहा, और उनके द्वारा दुनिया को दिए शोध से आज भी सब लाभान्वित होरहे है, हमारा इनको नमन.

तो Friends यह थी पोस्ट “महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना की जीवनी Biography” आपको यह post कैसी लगी कृपया हमे जरूर बताये और मित्रो में समझता हु, अपने इस लेख को पढ़ कर डॉ खुराना के जीवन के बारे में अच्छे से समझा होगा में चाहता हु, आप उनके गुणों को अपने जीवन में भी धारण करे, और हम आगे भी आपके लिए किसी महान हस्ती की जीवनी Biography लाते रहेंगे.

आप इस post से संबंधी अपने विचार हमे Comments के माध्यम से भेज सकते है.

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