परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करे

परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करे – दोस्तों  इंसान  के  जीवन  में  परिस्थितिया  कभी  हमारे  अनुरूप  नहीं  आती  मतलब  हम  जैसा  सोचते  है वैसा  नहीं  होता  या  जैसा  चाहते  है  वैसा  नहीं  होता  मित्रो  परिस्तिथिया या समय कई  बार हमारे   विपरी  आती  है  या  ज्यादातर  हमारे  सामने  विपरीत  परिस्तिथिया  आती  है.परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करेकई  बार  हमारे  काम  में  ऐसी  स्थति  आजाती  है,  कि  में  इसे  कैसे  पूरा  करू  परिस्तिथि  पूरी  विपरीत  रहती  है, पर  दोस्तों  सफल  इंसान  वही  है जो  विपरीत  परिस्तिथियों  में  भी  अपना  काम  सफल  कर  ले  और  आगे  बडे

दोस्तों  ये  किसी  व्यक्ति  विशेष  के  ऊपर  नहीं  होता  है, ये  हर  इंसान  के  जीवन  में  आती  है  क्योकि  जबतक  विपरीत  परिस्तिथि  नहीं  आती  है, तबतक  हम  उस  काम  को  करने  का  कोई  अलग  तरीका  भी  नहीं  निकालते   है.

और  दुनिया  में  हर  इंसान  परिस्तिथि  से  निकल  भी  नहीं  पाता  कुछ  लोग  ऐसे  स्थति   में  फसते  है कि  उससे  बाहर  नहीं  निकल  पाते  और  जो  इंसान  परिस्तिथि  से  बाहर  निकल  ना  जानता है  वो  अपने  काम  में  सफल  भी  होता  है.

हम लोग Office जाते है, या बच्चे School जाते है, और मानलो किसी दिन बहुत बारिश होरही है, ऐसे में कुछ लोग बारिश को देखकर ही कहेंगे की यार आज तो में अपने Office या School नहीं जा पाउँगा मुझे आज छुट्टी मारनी पड़ेगी, लेकिन जो लोग अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते है,

वो कैसी भी विकट सिचवेशन में अपने काम पर पहुंचते है तरीका चाहे जो निकाले पर वो लोग अपना काम जरूर पूरा करते है, और हमे भी ऐसे लोगो की तरह परिस्तिथि को समझकर उसके अनुरूप कार्य करना है.

परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करे”

दोस्तों अब में आप को परिस्तिथि को इंसान अपने पक्ष में कैसे करे उसके बारे में एक कहानी बताने जारहा   हु, जो आपको बहुत पसंद आएगी !

Friends  एक  बार  की   बात  है,  एक  कव्वा  बहुत  प्यासा  होता  है,  उसे  बहुत  प्यास  लगती  है, वो  पानी  ढूंढ़ता  है, और  उसे  कुछ  देर  में  एक  मटका  दीखता  है  उस  मटके  में  पानी  होता  है  मगर  मटका  केवल  आधा  ही  भरा  होता  है,  दोस्तों  मटके  का  मुँह  सकरा  होने  के  कारण  कौवे   की  चोंच  पानी  तक  नहीं  पहुंच  पाती  है

अब  वो  बहुत  परेशान  हो  जाता  है,  और  सोचता  है  की  अब  में  पानी  कैसे  पीयू?

दोस्तों  कोवा  कुछ  देर  सोचता  है  और  फिर  उसके  मन  में  एक  युक्ति  आती  है.

अब  कोवा  पत्थर  के  छोटे – छोटे  टुकड़ो  को  अपनी  चोंच  में  पकड़  कर  मटके  में  डालने  लगता  है, अब  वो  ये  क्रिया  बार – बार करने  लगा  अब  कुछ  देर  बाद  क्या  होता  है, की  मटके  का  पानी  कंकर  डालने  की  वजह  से  ऊपर  आजाता  है, और  अब  कौव्वा  आराम  से  पानी  पी  सकता  था.

तो  इस  प्रकार  कौव्वे  ने  परिस्थिति  को  अपने  पक्ष  में  किया  और  अपनी  प्यास  बुझाई,

दोस्तों  क्या  इंसान  ऐसा  करता  है, ” मैने  देखा  है  इंसान  परिस्तिथि को  देख  के  जल्दी  हार  मान लेता  है “, हमे  भी  उस  कौव्वे  से  सीखना  चाहिए  की  उसने  किस  प्रकार  परिस्तिथी  को  अपने  पक्ष  किया  , हमे  भी  किसी परिस्तिथी या समस्या आने पर   डरना  या  घबराना  नहीं  है, उसे  कैसे  पार  किया  जाये  ये  उपाय  खोजना  चाहिए, और  यकीन  मानिये  आप  प्रयास  करोगे  तो  उस समस्या को  जरूर  अपने  पक्ष  में  करलोगे.

महान आचार्य चाणक्य भी कहते है, समस्या से ज्यादा उसके समाधान के बारे में सोचो तभी आप समस्या का समाधान या उसका हल निकाल पाएंगे, समस्या आने पर उससे डर कर बेठ नहीं जाना है, वो कहते है “भाग लो या भाग लो” याने यातो उस परिस्तिथि या समस्या से दूर हट जाओ या अपने पुरे जोश के साथ उसका सामना करो और उसमे जित हासिल करो.

तो  दोस्तों  आपको  ये  post “परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करे” केसी  लगी कृपया मुझे  बताये और मै समझता हु, आप इस Article को पढ़कर किसी भी समस्या से घबरा के भागे गे नहीं सदैव उसका सामना करेंगे.

और  आप  हमारे  साथ  post से  संबंधित  आप  के  विचार  share कर  सकते  है, जो  आप  हमे  comments  के   माध्यम  से  बता  सकते  है  हमे  इंतजार  रहेगा.

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