जीवन में बुरे कर्म ना करे

जीवन में बुरे कर्म ना करे – दोस्तों इंसान इस दुनिया अपने कर्मो सेही पहचाना जाता है, इस दुनिया में इंसान दो तरह के कर्म करता है एक तो अच्छे और एक बुरे कर्म और जो इंसान अच्छे कर्म करता है, उसे सब लोग इज्जत देते है, उसके बारे मे कोई बुरा नहीं सोचता, उससे सब लोग प्यार करते है.जीवन में बुरे कर्म ना करेऔर दोस्तों दूसरी और आप देखेंगे एक बुरे कर्म करने वाला इंसान उससे सब लोग बुरा समझते है, उसकी कोई इज्जत नहीं करता उससे सब डरते है, उसके बारे में सब अच्छा नहीं सोचते लोग बुरा कर्म करने वाले के साथ रहना भी नहीं चाहते उससे सब दुरी बनाते है, और उसे कोई प्यार भी नहीं करते

मित्रो हम अगर अपने घर में है, या अपने वर्क प्लेस में या समाज में हमे सभी जगह और सभी लोगो से अच्छा व्यवहार करना चाहिए, सबसे प्यार से रहना चाहिए, किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए.

और दोस्तों में आपको एक ज्ञान की बात बताता हु, अगर हम अपने परिवार जैसे अपने माँ – बाप या अपने बीवी – बच्चे के लिए बुरे कर्म करते है की उनको अच्छी सुख सुविधा मिल सके तो दो आप यकीन मानिये आप के परिवार वाले आपके कुकर्मो में कोई भागीदार नहीं होंगे जो इंसान जैसे कर्म करता है उसका परिणाम भी उसे ही भुगतना पढ़ता है.

हम यदि श्रेष्ठ कर्म करेंगे तो हमे उसका वैसा परिणाम मिलेगा और यदि हम कुकर्म करेंगे तो हमे उसका वैसा दुष्परिणाम मिलेगा, वो कहते है ना की जो बोते है वही काटते है, आम बोवोगें तो आम ही मिलेगा और यदि बबूल बोया तो काटे ही मिलेंगे तो अब फैसला हमें करना है, की हम Life में कैसा कार्य करते चले.

जीवन में बुरे कर्म ना करे”

तो दोस्तों अब में आपके सामने एक कहानी रखने जा रहाहु, जिससे आपको कर्मो के बारे में और अच्छे से समझ में आएगा.

दोस्तों एक बारकी बात है एक गांव  में एक इंसान रहता था. उस इंसान का काम जंगल से जो राहगीर निकलते थे उन्हें लूटना था, और इसी काम से वो अपने परिवार का पालन पोषण करता था, वो किसी इंसान को लूट मारके चोरी करके धन लाता था और उसके परिवार को खिलाता था, याने उनका भरण पोषण करता था.

दोस्तों  उस  आदमी की यही दिनचर्या थी बस सबको लूटना
इसी प्रकार वो एक दिन जंगल में बैठ के किसी राहगीर का इंतजार  कर रहा था, की कोई आए और उसे में पकड़ू ये सोचकर एक पेड़ की आड़ में बैठा था!

तो दोस्तों कुछ देर इंतजार के बाद उस जंगल से एक साधु महात्मा निकले और उस आदमी ने उन साधु महात्मा को पकड़ा और उनसे बोला, ” जल्दी  से तुम्हारे पास जो भी कुछ है वो मुझे देदो नहीं तो अच्छा नहीं होगा !”

महात्मा जी बोले” भाई  मेतो साधु हु, मेरे पास क्या रहेगा ना कोई धन है ना दौलत ना रुपया ना पैसा ”

एक साधु के पास तुम है, बस ज्ञान के सिवाय  कुछ नहीं मिलेगा !

वो लुटेरा बोला – ” मुझे कुछ नहीं सुन्ना बस जल्दी से निकालो !

साधु  बोले- ” भाई मेट्रो तुम्हे बस ज्ञान ही दे सकता हु!

महात्मा फिर बोले, ” भाई तुम जोये काम करते हो वो किसके लिए करते हो, वो बोला मे ये अपने परिवार के लिए करता हु,

अपने परिवार के लिए महात्मा जी बोले !

हा !

फिर महात्मा जी बोले- में तुम से एक बात पूछना चाहता हु, तुम जो ये काम करते हो दूसरे से लूट – पाट करते हो उन्हें मारते हो , तो क्या इस काम में तुम्हारा परिवार भी  भागीदार है, या नहीं!

उसने बोला . ” जरूर है ये सब में उनके लिए हि तो करता हु !

महात्मा जी फिर बोले – तो ठीक है तुम मुझे इस पेड़ से बांध के जाव और अपने परिवार के हर सदस्य से पूछ के आव की क्या वो तुम्हारे इस पाप कर्म में हिस्सेदार है !

वो बोला ,  ” ठीक है में तुमको बांध के जाता हु और अभी पूछ के आता हु ,

फिर वो घर गया और उसने सबसे पहले अपनी पत्नी से पूछा की मे जो काम करता हु, लोगो को मार के धन कमाके लाता हु, वो बहुत ही पाप कर्म है., क्या तुम मेरे काम में भागीदार हो

उसकी पत्नी बोली , ” नहीं में क्यों आपके कर्म  में भागीदार बनुगी में आपकी पत्नी हु, मुझे और हमारे पुरे परिवार को पालना आपका कर्तव्य है, और आप कही सेभी धन लाके अपना कर्तव्य निभा रहे है, इससे हमे क्या और आपके कर्म में जो हिस्सा है वो पूरा आपका ही है.

इसी प्रकार उसने अपने बच्चो से भी पूछा सब ने मना कर दिया की आपके कर्मो में
हमारी कोई हिस्सेदारी नहीं है.

वो फिर लोट के साधु के पास आगया और उसे पूरी बात समझ में आगयी उसने साधु से हाथ जोड़ के कहा की , ” महाराज आज से मे ये बुरा कर्म नहीं करुगा “, और इसके बाद वो सुधर जाता है और अच्छे कर्म करता है.

तो दोस्तों देखा आपने की इंसान के कर्म कैसे उसे खुद को ही भुगतने पढ़ते है, ये तो एक कहानी की बात थी पर इस कहानी से हम कई प्रकार की शिक्षा ले सकते है, और अगर हम कुछ बुरे कर्म करते भी है तो अब उन्हें धीरे – धीरे सुधारेंगे और अब जीवन में अच्छे कर्म करेंगे.

और जीवन में सदैव श्रेष्ठ कर्म करते चलेंगे और सब को भी यही ज्ञान देना है, की इंसान को अच्छे कर्म करना क्यों जरुरी है. हमे हमारे परिवार में हमारे बच्चो को इस बात का ज्ञान देना है

ताकि वो भी जीवन में किसी प्रकार के बुरे कर्म नहीं करे और सदैव श्रेष्ठ और अच्छे कर्म करते चले, हमे ऐसे काम करना चाहिए जिससे लोगो का भला हो और हमारा काम किसी के काम आसके तो ऐसे काम करने पर लोग आपको दवाये भी देंगे.

तो दोस्तों आप को ये पोस्ट “जीवन में बुरे कर्म ना करे” केसी लगी please मुझे बताये और में आशा करता हु आप, अब आप भी सदा अपने जीवन में अच्छे कर्म करेंगे, और दुसरो को भी अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करेंगे.

और आप हमे कोई सुझाव देना चाहते है तो आप हमे Comments के माध्यम से बता सकते है.

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