स्वामी विवेकानंद Biography in हिन्दी

स्वामी विवेकानंद Biography in हिन्दी

स्वामी विवेकानंद Biography in हिन्दीस्वामी विवेकानंद एक ऐसी सख्शियत है जिन्हे देश और विदेश में पहचाना जाता है विवेकानंद जी के जीवन से जुडी प्रेरक कहानिया आज भी हम सुनते है और उससे प्रेरित होते है विवेकानंद जी का जीवन बहुत ही त्याग भरा था उन्होंने अपने जीवन में बहुत त्याग किये है जिनसे हम भी बहुत कुछ सिख सकते है तो दोस्तों आज की post में हम स्वामी विवेकानंद जी का जीवन परिचय देखने वाले है.

 

पूरा नाम     –  नरेंद्र नाथ विश्वनाथ दत्त

जन्म         –  12  जनवरी 1863 

जन्मस्थान –  कलकत्ता (प. बंगाल)

पिता          –  विश्वनाथ दत्त

माता         –  भुवनेश्वरी देवी

शिक्षा         –   1884  में बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण 

विवाह        –  आजीवन विवाह नहीं किया

 

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुवा था. स्वामी जी वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे. और दोस्तों उनका वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन 1893  में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की और से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था.

 

भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर देश में स्वामी विवेकानंद की वक्तृता के कारण ही पहुंचा उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी. जो आज भी अपना काम कर रहा है. वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे. उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुवात “मेरे अमेरिकी भाइयो एवं बहनो” के साथ करने के लिए जाना जाता है. उनके सम्बोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जित लिया था.

 

दोस्तों कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद आध्यात्मिकता की और झुके हुए थे. वे अपने गुरु राम कृष्ण देव से काफी प्रभावित थे. जिनसे उन्होंने सीखा की सारे जिव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार है. इसलिए मानव जाती की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है. रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया.

 

बाद में विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की. विवेकानंद ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिन्दू दर्शन के सिध्दांतो का प्रसार किया, सेकड़ो सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया. भारत में, विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्म दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.

 

स्वामी विवेकानंद Biography in हिन्दी”

 

स्वामी विवेकानंद का प्रारम्भिक जीवन –

स्वामी विवेकानंद का जन्म नरेन्द्रनात के नाम से 12 जनवरी 1863 को मकरसंक्रान्ति के समय उनके पैतृक घर कलकत्ता के गौरमोहन मुखर्जी ट्रस्टी में हुवा, जो ब्रिटिश कालीन भारत की राजधानी थी.

 

उनका परिवार एक पारम्परिक कायस्थ परिवार था. स्वामी विवेकानंद के नो भाई – बहन थे. उनके पिता, विश्वनाथ दत्ता, कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील थे. दुर्गा चरण दत्ता जो नरेंद्र के दादा थे. वे संस्कृत और पारसी के विद्वान् थे जिन्होंने 25 साल की उम्र में अपना परिवार और घर छोड़ कर एक सन्यासी का जीवन स्वीकार कर लिया था. उनकी माता, भुवनेश्वरी देवी एक देवभक्त गृहणी थी.

 

स्वामी जी के माता और पिता के अच्छे संस्कारो और अच्छी परवरिश के कारण स्वामीजी के जीवन को एक अच्छा आकार और एक उच्च कोटि की सोच मिली. युवा दिनों से ही उनमे आध्यात्मिकता के क्षेत्र में रूचि थी. वे हमेशा भगवान की तस्वीरों जैसे  शिव, राम और सीता के सामने ध्यान लगाकर साधना करते थे. साधुवों और सन्यासियों की बाते उन्हें हमेशा प्रेरित करती थी.

 

स्वामी जी बचपन से ही बहोत शरारती और कुशल बालक थे, उनके माता – पिता को कई बार उन्हें संभालने और समझने में परेशानी होती थी. उनकी माता हमेशा कहती थी की, ” मैने शिव जी से एक पुत्र की प्रार्थना की थी, और उन्होंने तो मुझे एक शैतान दे दिया” .

 

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा –

1871 में 8 साल की आयु में स्वामी विवेकानंद को ईश्वर चंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलियन इंस्टीट्यूट में डाला गया, 1877 में जब उनका परिवार रायपुर स्थापित हुआ तब तक नरेंद्र ने उस स्कूल में शिक्षा ग्रहण की. 1879 में उनके परिवार के कलकत्ता वापिस आजाने के बाद प्रेसीडेंसी कालेज की एंट्रेंस परीक्षा में फस्ट डिविसेज लाने वाले वे पहले विद्यार्थी बने.

 

वे विभिन्न विषयो जैसे दर्शन शास्त्र, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य के उत्सुक पाठक थे. हिन्दू धर्म ग्रंथो में भी उनकी बहुत रूचि थी जैसे वेद, उपनिषद, भगवत गीता, रामायण, महाभात्र और पुराण. स्वामीजी भरतीय पारम्परिक संगीत में निपुण थे, और हमेशा शारीरिक योग, खेल और सभी गतिविधियों में सहयोगी होते थे.

 

स्वामी विवेकानंद ने पश्चिम तर्क, पश्चिम जीवन और यूरोपियन इतिहास की भी पढ़ाई जनरल असेम्ब्ली इंस्ट्टियूट में कर रखी थी. 1881 में उन्होंने ललित कला की परीक्षा पास की, और 1884 में कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की.

 

नरेंद्र ने David Hume, lmmanuel kant , Johann Gottlied Fichte, Baruch Spinoza, Georg  W.F. Hegel, Arthur Schopenhauer, Auguste  Comte, John  Stuart  Mill  और Charles  Darwin  के कामो का भी अभ्यास कर रखा था. वे Herbert  Spencer के विकास सिद्धांत से मंत्र मुग्ध हो  गए थे. और उन्ही के समान वो बनना चाहते थे. उन्होंने Spencer की शिक्षा किताब 1861 को बंगाली में भी परिभाषित किया. जब वे पश्चिम दर्शन शास्त्रियों का अभ्यास कर रहे थे तब उन्होंने संस्कृत ग्रंथो और बंगाली  साहित्यो को पड़ा.

 

William  Hastie  ने ये लिखा, “नरेंद्र सच में बहुत होशियार है, मैने कई यात्रावे की बहोत दूर तक गया लेकिन में और जर्मन विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के विद्यार्थी भी कभी नरेंद्र के दिमाग और कुशलता के आगे नहीं जा सके” . कुछ लोग नरेंद्र को श्रुतिधरा (भयंकर स्मरण शक्ति वाला व्यक्ति) कहकर बुलाते थे.

 

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स्वामी जी रामकृष्ण के साथ –

1881 में नरेंद्र पहली बार रामकृष्ण से मिले, जिन्होंने नरेंद्र के पिता की मृत्यु के पश्चात मुख्य रूप से नरेंद्र पर आध्यात्मिक प्रकाश डाला.

 

जब William Hastie जनरल असेम्ब्ल संस्था में William Wordsworth की कविता “पर्यटन” पर भाषण दे रहे थे. तब नरेंद्र ने अपने आप को रामकृष्ण से परिचित करवाया था. जब वे कविता के एक शब्द “Trance” का मतलब समझा रहे थे. तब उन्होंने अपने विद्यार्थियों से कहा की वे इसका मतलब जानने के लिए दक्षिणेश्वर में स्थित रामकृष्ण से मिले. उनकी इस बात ने कई विद्यार्थियों को रामकृष्ण से मिलने को प्रेरित किया और जिसमे नरेंद्र भी शामिल थे.

 

वे व्यक्तिगत रूप से उनसे नवम्बर 1881 में मिले, लेकिन नरेंद्र उसे रामकृष्ण के साथ पहली मुलाकात नई मानते थे. और न ही कभी किसी ने उस मुलाकात को नरेंद्र और रामकृष्ण की पहली मुलाकात के रूप में देखा. उस समय नरेंद्र अपनी आने वाली F. A. (ललित कला) परीक्षा की तैयारी कर रहे थे.

 

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु –

4 जुलाई 1902 (स्वामी जी के मृत्यु का दिन) को विवेकानंद सुबहे जल्दी उठे, और बेलूर मठ के पूजा घर में पूजा करने गए और बाद में 3 घंटो तक योग भी किया. उन्होंने छात्रों को शुक्ल-यजुर-वेद, संस्कृत और योग साधना के विषय में पढ़ाया, बाद में अपने सहशशिष्यो के साथ चर्चा की और राम कृष्ण मठ में वैदिक महाविद्यालय बनाने पर विचार विमर्श कीये

 

7 P.M. को विवेकानंद अपने रूम में गए, और अपने शिष्य को शांति भंग करने के लिए मना किया, और 9 P.M. को योग करते समय उनकी मृत्यु हो गयी. उनके शिष्यों के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण उनके दिमाग में रक्तवाहिनी में दरार आने के कारण उन्हें महा समाधि प्राप्त होना है.

 

उनके शिष्यों के अनुसार उनकी महासमाधि का कारण ब्रह्मरन्ध्रा (योग का एक प्रकार) था. उन्होंने अपमी भविष्यवाणी को सही सावित किया की वे 40 साल से ज्यादा नहीं जियेंगे बेलूर की गंगा नदी में उनके शव को चंदन की लकड़ियों में अग्नि दी गयी.

 

तो दोस्तों आपको यह पोस्ट ” स्वामी विवेकानंद Biography in हिन्दी ” कैसी लगी प्लीज़ हमे जरूर बताये और में समझता हु की आप भी स्वामी विवेकानंद की Biography पड़ कर उससे इंपायर होंगे और आप भी अपने जीवन में कुछ करने की जरूर कोशिश करेंगे और हम आगे भी आपके लिए अन्य महा पुरुषो की Biography लाते रहेंगे.

 

इस post से संबंधित आप अपने सुझाव हमे Comments के माध्यम से भेज सकते है.

 

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