नवरात्रि का महत्व और पूजन विधि

नवरात्रि का महत्व और पूजन विधि – दोस्तों हम सभी माता भक्तो के लिए नवरात्रि बहुत ही विशेष त्यौहार होता है जिसे धूम – धाम से मनाया जाता है. समूचे भारत वर्षं में नवरात्रि को एक विशेष त्यौहार के रूप में मनाया जाता है और भारत के अलग – अलग प्रांतो में इसे अलग – अलग तरिके से मनाया जाता है. विशेषकर गुजरात और बंगाल में नवरात्रि को बहुत ही विशेष रूप से मनाया जाता है.नवरात्रि का महत्व और पूजन विधिदोस्तों नवरात्रि नो दिनों का त्यौहार होता है और इन नो दिनों तक सभी माता के भक्त उपवास करते है कुछ लोग नो दिनों तक बिना खाना खाये रहते है तो कुछ लोग सिर्फ दिन मे एक समय भोजन करते है. याने जिसकी जैसी श्रद्धा वैसा भक्त लोग उपवास करते है. कई लोग माता के दरबार में अपने घर से नग्गे पैर पैदल जाते है और माता भी ऐसे सभी भक्तो की सर्व मनोकामनाएं पूरी करती है.

दोस्तों कहा जाता है की नवरात्रि पुरे वर्ष में चार बार आता है. – पौष, चैत्र, आषाढ़, अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है. मित्रो नवरात्रि की नो रातो में तीन देवियो की पूजा की जाती है. – महालक्ष्मी, महासरस्वती, और माँ दुर्गा के नो स्वरूपों की पूजा होती है. और जिन्हे नवदुर्गा भी कहा जाता है.

नवरात्रि का महत्व

दोस्तों नवरात्रि का उत्सव देवी अम्बा का प्रतिनिधित्व है. वसंत की शुरुवात और शरद ऋतू की शुरुवात, जलवायु और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम माना जाता है. यह दो समय माँ की पूजा के लिए पवित्र अवसर माने जाते है. त्यौहार की तिथियां चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती है. नवरात्रि पर्व, माँ – दुर्गा की अवधारणा भक्ति और शक्ति की पूजा का सबसे शुभ और अनोखी अवधि मानी जाती है. यह पूजा वैदिक युग से पहले, प्रागेतिहासिक काल से है. ऋषि के वैदिक युग के बाद से, नवरात्रि के दौरान भी भक्ति प्रथाओं में से प्रमुख रूप गायत्री साधना का है.

नवरात्रि त्योहारों के दौरान पुरे पारम्परिक तथा रीती रिवाज के साथ देवी दुर्गा माँ के 9 अवतारों की पूजा की जाती है. माता दुर्गा के नो रूपों का नाम है – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धदात्री.

और दोस्तों जैसे माता की ममता का कोई अन्त नहीं उसी प्रकार माता के नाम भी अनेक है. मतलब माता के भक्त माता को जिस भी नाम से पुकारते है माता उनपर वैसे कृपा करती है और अपने भक्तो का कल्याण करती है.

नवरात्रि में व्रत – उपवास का महत्व –

नवरात्रि एक वर्ष में चार बार आते है. एक नवरात्र चैत्र मास में, एक अश्विन मास में मनाया जाता है. शेष दो अंरतर माघ और असद मास में मनाये जाते है. इन्हे गुप्त नवरात्र कहा जाता है. मित्रो दो ऋतुओ के संधिकाल यानि जब एक ऋतू बदलती है और दूसरी ऋतू शुरू होती है तो उन दिनों में नवरात्रि मनाई जाती है.

नवरात्रि का महत्व और पूजन विधि”

और कहा जाता है की ऋतुओ के संधिकाल में बीमारिया होने की सम्भावनाये काफी बढ़ जाती है. इस कारण इन दिनों में खान – पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ऋतू परिवर्तन के समय खान – पान में किसी प्रकार की गड़बड़ी ना हो, इस लिए नवरात्रि के दिनों में व्रत – उपवास की परम्परा मनाई जाती है. दोस्तों हम व्रत को दोनों तरह से देख सकते है याने वैज्ञानिक तरिके से भी उसके महत्व का पालन होता है, और धार्मिक अर्थ भी होता है.

हमें व्रत से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ –

दोस्तों व्रत और उपवास से शरीर स्वस्थ रहता है. नवरात्रि में भूके रहने से एक समय भोजन करने का केवल फलाहार करने से पाचनपंत्र को आराम मिलता है. इससे कब्ज, गैस, एसिडिटी, अपच, सिरदर्द, बुखार, मोटापा जैसे कई रोगो का नाश होता है. और दोस्तों उपवास से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है. ज्ञान बढ़ता है. और बुध्दि का विकास होता है. इसी कारण व्रत – उपवास को पूजा पद्धति को शामिल किया जाता है.

नवरात्रि की पूजा –

दोस्तों नवरात्रि हिन्दुओ के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. देशभर में लोग इस त्यौहार को अपने – अपने तरिके से मनाते है. जैसा इसके नाम से ही समझा जाता है – नवरात्रि याने नो दिन, नवरात्रि के दौरान नो दिनों तक दुर्गा माँ, सरस्वती और लक्ष्मी माता के अलग – अलग रूपों की पूजा होती है. सकारात्मकता, धन सम्पदा, सुख – समृद्धि, शांति और डर को भगाने के लिए माँ दुर्गा के नो रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के दौरान कई तरह के रीती – रिवाज भी निभाए जाते है. अष्टमी और नवमी को कन्याओ को पूजा जाता है.

नवरात्रि की पूजा विधि –

नवरात्रि की पूजा करने के लिये आपको सुबह – सवेरे जल्दी उठना चाहिए, आप सुबह ब्रह्म मुहर्त में उठे. ये समय नवरात्रि की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है. नहाये, और साफ धुले हुए कपड़े पहने, अखंड ज्योति जलाये और धुप-दिप को देवताओ के बाई तरफ रख दे तरफ अगरबत्ती रखे, प्योर मन से देवी शक्ति का स्मरण करे. गेहू के ज्वारे लगाए, साथ ही कलश और नारियल भी पूजा घर में रखे. आसन बिछाकर, कमर सीधी करके भगवान के सामने आसन लगाकर के बैठे और सच्चे मन से माता की पूजा आराधना करे जिससे माता आपकी सारी मनोकामनाएं पूरा करेगी.

नो देवियो के नाम –

1 – शैलपुत्री – इसका अर्थ – पहाड़ो की पुत्री होता है.

2 – ब्रह्म्चारिणी – इसका अर्थ – ब्रह्मचरिणी.

3 – चन्द्रघंटा – इसका अर्थ – चाँद की तरह चमकने वाली.

4 – कुष्मांडा – इसका अर्थ – पूरा जगत उनके पैर में है.

5 – स्कंदमाता  – इसका अर्थ  – कार्तिक स्वामी की माता.

6 – कात्यायनी – इसका अर्थ – कात्यायनी आश्रम में जन्मी.

7 – कालरात्रि – इसका अर्थ – काल का नाश करने वाली.

8 – महागौरी – इसका अर्थ – सफेद रंग वाली.

9 – सिद्धिदात्री – इसका अर्थ – सर्व सिद्धि देने वाली.

दोस्तों यह थे नो देवियो के नाम और उनके नाम का अर्थ.

तो दोस्तों यह थी post “नवरात्रि का महत्व और पूजन विधि” दोस्तों जैसे हम सभी भक्त माता दुर्गा की पूजा करते है, और सभी भक्त सच्चे मन से नवरात्रि मानते है. दोस्तों हमे नवरात्रि के दिनों में अपने अंदर के विकारो को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए हमे हमारे अंदर के सभी बुरे विचारो को छोड़ना होगा और मित्रो तभी सही मायने में माता भी हमसे प्रसन्न होगी.

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