महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी में

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी में – दोस्तों जैसे की 2 October आरहा है, और आपको तो पता ही है, की  2 October को राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी का जन्म दिवस होता है. जिसका हमे बेसब्री से इंतजार रहता है. दोस्तों कोन है? महात्मा गाँधी ये एक ऐसे व्यक्ति है. जो दिखने में बहुत ही साधारण और मधुर  स्वभाव का व्यक्तित्व जिसने हिंदुस्तान को अंग्रेजो से आजादी दिलाने में एक अहम भूमिका निभाई और जिस कारण आज हम एक आजाद हिन्दुस्तान में बड़े आराम से रह पा रहे है.महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी मेंराष्ट्र पिता महात्मा गाँधी का जीवन बहुत ही उतार – चढ़ाव भरा था आप राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की बायोग्राफी में उनके जीवन के बारे में और अच्छे से जान सकते है. गाँधी जी को प्यार से बापू भी कहा जाता है. बापू मतलब सबको प्यार करने वाला जैसे हमारे सगे पिता हमे प्यार करते है उसी प्रकार महात्मा गाँधी भी बापू के रूप में सभी देशवाशियो से प्यार करते है. वो जब जिन्दा थे. तब भी लोग उनको बहुत प्यार करते थे. उनकी बातो को मानते थे, उनके कहे अनुसार चलते थे.

दोस्तों महात्मा गाँधी ने अपने जीवन में कई रोचक कार्य किये अंग्रेजो को भारत छुड़वाने के साथ – साथ और भी की ऐसे साहसिक कार्य जो आज के युग में कोई इंसान नहीं कर सकता आज जो हम देश में स्व्च्छ भारत अभियान देख रहे है, उसे बापू कई साल पहले ही चला चुके है वो अपना सारा काम खुद ही करते थे भलेही वो काम कोई सा भी हो यहां तक की वो अपना संडास भी खुद ही साफ करते थे. आज के दौर में अगर किसी इंसान को बोले की तुम्हे अपना संडास खुद ही साफ करना है तो वो आपको क्या जवाब देगा आपको पता ही है.

उनके जीवन से जुडी कई रोचक कहानिया है जो हम बचपन से सुनते आये है, कहते है अगर बापू को कहि जाना होता था तो वो किसी गाड़ी या टांगे का इंतजार नहीं करते थे खुद ही पैदल चलने लगते थे. चाहे उनको कितनी भी दूर जाना हो वो किसी का इंतजार नहीं करते थे.पर मित्रो में आपसे एक बात पूछता हु, की हम बापू को इतना मानते है उनके जीवन के बारे में इतना पड़ते है पर क्या हम कभी उनके आदर्शो पर या उनके पद्चिन्नो पर चलते है, अगर आज कोई हमे बोले की तुमको 10 किलो मीटर पैदल जाना है, तो हमारे पेरो तले से जमीन ही खिसक जाएगी.

दोस्तों महात्मा गाँधी का हमे आजादी दिलाने में बहुत योगदान है, पर यदि आज उनकी आत्मा कहि होगी और हमे देखती होगी तो क्या वो हमसे खुश होगी मुझे नहीं लगता की बापू की आत्मा हमे देख कर खुश होगी क्योकि आज कोई उनके बातये गए मार्ग पर नहीं चलता उन्होंने स्वच्छता का नारा दिया फिर भी लोग गंदगी करते है. कोई भी इंसान सुधरना नहीं चाहता उन्होंने मीठा बोलने का कहा पर कोई मीठा नहीं बोलता उन्होंने बुरा नहीं सुनने का और नहीं देखने का कहा पर क्या आज का इंसान उनके द्वारा बताई गयी बातो को मानता है और उस हिसाब से अपना जीवन जीता है.

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी में”

अब दोस्तों हम राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन से जीवन से जुडी हुई कुछ कहानिया देखते है, जिसे पड़ने से आपको बापू के जीवन के बारे में और अधिक जानकारिया पता चलेगी.

महात्मा गाँधी की पहली कहानी –

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी मेंदोस्तों एक बार गाँधीजी के स्कूल में निरीक्षण करने बड़े अधिकारी आये और फिर उनके Class के लड़को को कुछ अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए सबने सही लिखा लेकिन गाँधीजी ने एक शब्द गलत लिख दिया था. उनके अध्यापक ने उस शब्द को सही करने को कहा लेकिन गाँधीजी तो मन से सच्चे थे. सभी लड़को के सभी शब्द सही निकले लेकिन बापू का एक शब्द गलत लिखा हुवा था.

फिर बाद में जब उनके अध्यापक ने ऐसा जब करने को बताया था फिर भी नहीं किया तो गाँधीजी ने बोला जब मेंने गलत लिख ही दिया तो किसी के बताने से वो कैसे सही हो सकता है. जब तक वो मुझे खुद नहीं करने आये और अगर मै आपके बताने पर लिख भी देता तो मै निरीक्षक के सामने खुद को झूठा बना लेता इसलिए ऐसा करने को मेरा मन न हुवा शायद इसी तरह महात्मा गाँधीजी के मन मे सत्य का विचार था जो लोगो के लिए प्रेरणा बन जाती है.

दोस्तों हमे उनकी इस कहानी से यह सिख मिलती है की जो काम हमे आता हो उसे ही हमे करना चाहिए अगर हम किसी से पूछ कर या किसी के बताने पर करते है तो उसमे हमारा कोई फायदा नहीं होगा.

महात्मा गाँधी की दूसरी कहानी –

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी मेंमहात्मा गाँधी बचपन मे अपनी पढ़ाई मे बहुत ही कमजोर थे लेकिन उन्हें पुस्तके पढ़ने का बहुत शोक था. जब भी बापू को कोई अच्छी पुस्तक मिलती थी. तो उसे खूब मन लगाकर पढ़ते थे, एक बार महात्मा गाँधी को एक ऐसी पुस्तक मिली जिसमे श्रवण कुमार और उनके माता पिता के सेवा की कहानी थी. किस प्रकार श्रवण अपने प्राणो की आहुति देखर भी अपने माता – पिता की सेवा करते है.

जिसे पढ़कर महात्मा गाँधी बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने निश्चय किया की वे भी श्रवण कुमार की तरह अपने माता – पिता की सेवा करेंगे और जब उन्हें अपने पड़ोस मे हरिश्चंद्र की जीवनी पर आधारित नाटक को देखने का मौका मिला हरिश्चंद्र की नाटक को देखकर महात्मा गाँधी के आँखों मे आँसू आ गए और उन्होंने जीवन भर सत्य की राह पर चलने की कसम खाई चाहे फिर इसके लिए उनको कितना भी कस्ट क्यों ना उठाना पड़े. और दोस्तों इसी कारण महात्मा गाँधी सारा जीवन सत्य की राह पर चले.

दोस्तों हमे इस कहानी से यह प्रेरणा मिलती है की हमे अपने जीवन मे भी ऐसे लोगो से ही प्रेरणा लेनी है जो सही राह पर चलते है गलत से नहीं और यदि हम सही लोगो के जीवन से सिख लेकर उस हिसाब से अपना जीवन जियेंगे तो हमे उसका बहुत लाभ होगा और हमारी जीवन भी एक बेहतर जीवन बनता जायेगा.

महात्मा गाँधी की तीसरी कहानी –

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी मेंदोस्तों महात्मा गाँधी ने जब अपनी पढ़ाई पूरी कर ली तो उन्हें वकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका जाने का मौका मिला पर दोस्तों दक्षिण अफ्रीका मे गोर अंग्रेज भारतीयों का बहुत अपमान करते थे. वे उन्हें कुली कह कर पुकारते थे. और भारतीयों के साथ वहा बहुत बुरा व्यवहार होता था. जिसका सामना महात्मा गाँधी को भी करना पड़ा था.

जब वे एक दिन रेल गाड़ी के फस्ट क्लास डिब्बे मे बैठकर जारहे थे. तो उस डिब्बे मे कुछ अंग्रेजो ने प्रवेश किया और उनसे शिकायत की इस कुली को दूसरे डिब्बे मे बैठाया जाये लेकिन बापू ने अपने इस डिब्बे का टिकिट दिखाया तो भी उस रेल के गोर कर्मचारी नहीं माने और महात्मा गाँधी के सामान को बाहर उठाकर फेक दिया और गाँधी जी को धक्का देकर रेल से बाहर फेक दिया जिसे देखकर महात्मा गाँधी का जीवन ही बदल गया और उन्होंने साऊथ अफ्रीका मे भारतीयों के जीवन के सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये और अंत मे उनकी जित हुई और उसके बाद साऊथ अफ्रीका मे भारतीयों का सम्मान होने लगा.

दोस्तों इस कहानी से भी हमे यह सिख मिलती है की – इंसान को अपना सम्मान ही छोड़ना चाहिए अगर आप कहि गए और लोग आपका अपमान करे तो आपको उसका उचित जवाब देना चाहिए और अपनी पोजीशन को मेंटेन करना चाहिए लोग दबने वाले को हमेशा दबाते है.

महात्मा गाँधी की चौथी कहानी –

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी में1916 की बात है काशी जो की अब वाराणसी के नाम से जाना जाता है उस समय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के शिलान्यास के दौरान दिल्ली से वायसराय गए थे. जिनमे गाँधी जी को भी बुलाया गया और कार्यक्रम के दौरान महात्मा गाँधी ने भारतीयों के सामने अपना पहला भाषण दिया वो भी अंग्रेजी मे, जब महात्मा गाँधी ने भाषण की शुरुवात की तो उनका पहला शब्द था बड़े शर्म की बात है. अपने ही देश मे अपने ही लोगो के सामने मुझे हिन्दी न बोलकर अंग्रेजी मे बोलना पद रहा है.

ऐसा बोलना वहा मौजूद अंग्रेजो के गुस्से के आग मे घी डालने के बराबर था. लेकिन गाँधी जी बिना किसी से डरे अपने विचारो को लोगो के सामने बताते रहे. और उनके भाषण के बाद अंग्रेजो के प्रति लोगो के मन मे ग़ुस्सा फुट पड़ा था जो आगे चलकर आजादी के लिए निर्णायक साबित हुवा.

दोस्तों हमे इस कहानी से यह सिख मिलती है की हमे लोगो के मन से डर भगाने के लिए पहले उस डर के प्रति खुद को मजबूत करना पड़ेगा यदि आपको 10 आदमी जोड़ना है तो आपको एक लीडर बनना पड़ेगा तभी आप लोगो को जोड़ पाएंगे और एक मजबूत संघटन बना पाएंगे.

महात्मा गाँधी के जीवन की पांचवी कहानी –

महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी मेंएक बार अपने बुरे दोस्त की कुसंगति मे आने पर महात्मा गाँधी को बीड़ी की लत लग गयी उस लड़के के कहने पर महात्मा गाँधी चोरी छिपे मास भी खाने लगे क्युकी उनके घर पर सभी शाकाहारी थे. और इस तरह अपनी गलत आदत के कारण महात्मा गाँधी को चोरी की भी आदत पड़ गयी. क्युकी इन सब के लिए पेसो की आवश्यकता पड़ती थी. और फिर महात्मा गाँधी ने धीरे – धीरे कर्ज लेना भी शुरू कर दिया था.

और फिर उन्होंने अपने कर्ज को चुकाने के लिए अपने बड़े भाई के सोने के कड़े मे से एक टुकड़ा चुराकर बेच दिया और उसके बाद उन्होंने अपना कर्ज तो चूका लिया लेकिन महात्मा गाँधी के द्वारा किये गए इस अपराध से उनका मन परेशान होने लगा था. और इन सब पर पश्तावे के कारण उन्होंने अपनी गलतियों को पत्र के माध्यम से बता दिया यह सब पढ़कर उन्हें पिताजी कुछ भी बोल नहीं सके और महात्मा गाँधी द्वारा लिखा गया पत्र फाड़कर फेक दिया यह सब देखकर महात्मा गाँधी फुट – फुट कर रोने लगे और  उन्होंने प्रण किया की आज के बाद वे सारे बुरे काम छोड़ देंगे.

दोस्तों हमे इस कहानी से भी यह प्रेरणा मिलती है की हमारे जीवन मे ऐसे कई लोग आते है जो हमे बुरी राह पर ले जाने का प्रयास करते है पर सही मायने मे इंसान वही होता है, जो ऐसे बुरे लोगो की संगत मे ना पड़े और अपने जीवन को सुधारते हुए आगे बढ़ता रहे.

तो दोस्तों यह थी post “महात्मा गाँधी के जीवन की कहानिया हिन्दी में” मुझे लगता है की आप इन कहानियों को पढ़कर अपने जीवन मे भी बहुत सिख लेंगे और खुद को अच्छा बनाएंगे दोस्तों कहते है, सच्चाई की राह पर चलने पर बहुत मुसीबते आती है, पर सच्चाई की मंजिल बहुत मीठी होती है और हमे भी महात्मा गाँधी की कहानियों से सिख लेकर उनकी तरह बनना है 100 % नहीं तो कमसे कम 60 % तो उनकी तरह जरूर बनना है तभी गाँधी जी भी खुश होंगे और हमेशा अपने जीवन मे अपने लिए और दुसरो के लिए अच्छे काम करते जाना है.

मित्रो आपको यह post केस लगी आप हमे Comments के माध्यम से बता सकते है.

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