महाराणा प्रताप का इतिहास Maharana pratap history

महाराणा प्रताप का इतिहास Maharana pratap history - महाराणा प्रताप हिंदुस्तान के एक ऐसे वीर योद्धा जिन्हे दुनिया सदैव याद करती रहती है. उनकी वीर गाथाये इतिहास के पन्नो में दर्ज है , की उन्होंने किस तरह मुगलो का सामना किया तो आज हम इस post में महाराणा प्रताप से जुडी हुई सम्पूर्ण जानकारिया देखेंगे. महाराणा प्रताप का पूरा

 

महाराणा प्रताप का इतिहास  Maharana pratap history – महाराणा प्रताप हिंदुस्तान के एक ऐसे वीर योद्धा जिन्हे दुनिया सदैव याद करती रहती है . उनकी वीर गाथाये इतिहास के पन्नो में दर्ज है , की उन्होंने किस तरह मुगलो का सामना किया तो आज हम इस post  में महाराणा प्रताप से जुडी हुई सम्पूर्ण जानकारिया देखेंगे .

 

महाराणा प्रताप का पूरा नाम , महाराणा प्रताप सिंह है , ज्येष्ठ शुक्ल रविवार विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9  मई 1540  – 19  जनवरी 1597 , को उदयपुर , मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे . उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिए अमर है . दोस्तों उन्होंने कई सालो तक मुग़ल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया . और आप जानते है हो की महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलो को कई बार युध्द में भी हराया . उनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जयवंत  कँवर  के घर हुवा था .

 

1576  के हल्दीघाटी युद्ध में 20,000  राजपूतो को एक साथ लेकर राणा प्रताप मुग़ल सरदार राजा मानसिंह के 80,000  की सेना का सामना किया . शत्रु सेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को झाला मानसिंह ने अपने प्राण देकर बचाया और महाराणा को युध्द भूमि छोड़ने के लिए बोले . शक्ति सिंह ने अपना अश्व देकर महाराणा को बचाया . प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई . यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें 17,000  लोग मारे गए . मेवाड़ को जीतने के लिए . अकबर ने सभी प्रयास किये . महाराणा की हालत दिन – प्रतिदिन गंभीर होती चली गयी . 25,000  राजपूतो को 12  साल तक चले उतना अनुदान देकर भामा शाह भी अमर हुवा .

 

महाराणा प्रताप का जीवन –

महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुवा था . महाराणा प्रताप की माता का नाम जयवंता बाई था , जो पाली के सोनगया अखराज की बेटी थी . और दोस्तों महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था. महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक गोगुन्दा में हुवा .

 

महाराणा प्रताप का इतिहास Maharana pratap history

 

दोस्तों आप जानते हो महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में 11  शादियाँ की थी उनकी पत्नियों और उनसे प्राप्त उनके पुत्रो – पुत्रियों के नाम है –

 

1 – अमरबाई राठौर – संतान – नत्था

2 – शहमति बाई  हाडा – संतान – पूरा

3 – अलमदेबाई  चौहान – संतान – जीवंत सिंह

4 – रत्नावती बाई परमार – संतान – माल , गज , किलंगु

5 – लखाबाई – संतान – रायभान

6 – जसोबाई चौहान – संतान – कल्याणदास

7 – चम्पाबाई जंती  – संतान – कल्ला , संवलदास और दुर्जन सिंह

8 – सोलंखिनीपुर  बाई – संतान – साशा और गोपाल

9 – फूल बाई राठौर – संतान – चंदा और शिखा

10 – खिचर आशाबाई – हत्थी और राम सिंह

11 – महारानी अजब्धे पवार – संतान – अमर सिंह और भगवानदास

 

महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी का युद्ध –

 

 

दोस्तों हल्दीघाटी का युद्ध एक ऐसा  युद्ध है जिसे इतिहास के पन्नो में दर्ज किया गया है यह युद्ध 18  जून 1576  ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलो के मध्य हुवा था . और इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था . इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे – हकीम खां सूरी .

 

इस युद्ध में मुग़ल सेना का नेतृत्व मानसिंह तथा आसफ खां ने किया . इस युद्ध का आँखों देखा वर्णन अब्दुल कादिर बयदुनि ने किया . इस युद्ध को आसफ खां ने अप्रत्यक्ष रूप से जिहाद की संज्ञा दी . इस युद्ध में बीड़ा के झालामान ने अपने प्राणो का बलिदान करके महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा की . वही ग्वालियर नरेश ‘ राजा रामशाह तोमर ‘ भी अपने तीन पुत्रो ‘ कुंवर शालिवाहन , कुंवर भवानी सिंह , कुंवर प्रताप सिंह ,और पुत्र बलभद्र सिंह एवं सेकड़ो वीर तोमर राजपूत योद्धावो समेत चिरनिद्रा में सो गया .

 

 

दोस्तों इतिहासकार मानते है की इस युद्ध में कोई विजय नहीं हुवा . पर देखा जाये तो इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह विजय हुए . अकबर की विशाल सेना के सामने मुट्ठीभर राजपूत कितनी देर टिक पाते , पर ऐसा कुछ नहीं हुवा , ये युद्ध पुरे एक दिन चला और राजपूतो ने मुगलो के छक्के छुड़ा दिए थे . और सबसे बड़ी बात यह है की यह युद्ध आमने – सामने लड़ा गया था. महाराणा की सेना ने मुगलो की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था . और मुग़ल सेना भागने लग गयी थी .

 

 

महाराणा प्रताप उनकी पत्नी अज्बदे की कहानी –

अज्बदे सामंत नामदे राव राम रख पंवार की बेटी थी . वो स्वभाव से बहुत ही शांत एवं सुशिल थी . वह बिजोली की राजकुमारी थी . बिजोली चित्तोड़ के आधीन था . प्रताप की माँ जयवंता एवं अज्बदे की माँ अपने बच्चो के विवाह के पक्ष में थी . उस वक्त बाल विवाह की प्रथा थी . अज्बदे ने महाराणा प्रताप को कई परिस्तिथियों में उचित निर्णय लेने में साथ दिया था. वह हर तरह से महारानी जयवंता बाई की छवि थी . उन्होंने युद्ध के दौरान भी प्रजा के बिच रहकर उनका  मनोबल को बनाये रखा था.

 

अज्बदे महाराणा प्रताप की पहली पत्नी थी , इसके आलावा इनकी 11 पत्निया और भी थी . एवं 5  पुत्रिया थी और 17  पुत्र थे . जिनमे अमर सिंह सबसे बड़े पुत्र थे . वे अज्बदे के पुत्र थे महाराणा प्रताप के साथ अमरसिंह ने शासन संभाला था .

 

महाराणा प्रताप की मृत्यु –

महाराणा प्रताप जंगली दुर्घटना के कारण घायल हो जाते है , 29 जनवरी 1597 में महाराणा प्रताप अपने प्राण त्याग देते है . इस वक्त तक उनकी उम्र मात्र 57 वर्ष थी . और दोस्तों आज भी उनकी स्मृति में राजस्थान में महोत्स्व होते है . उनकी समाधि पर लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते है .

दोस्तों कहा जाता है , की महाराणा प्रताप से अकबर भी प्रभावित था . महाराणा प्रताप और उनकी पत्नी को अकबर सम्मान की दृस्टि से देखता था . इसलिए हल्दीघाटी के युद्ध में उनकी सेना में वीरगति पाने वाले सेनिको एवं सामंतो को हिन्दू रीती अनुसार श्रद्धा के साथ अंतिम विदाई जी जाती थी .

 

महाराणा प्रताप की प्रतिमाये –

 

 

दोस्तों आज आजाद भारत में सम्पूर्ण देश में महाराणा प्रताप की कई प्रतिमाये लगी है . और यह हर राज्य और जयादातर शहरों में लगी हुई है . जिनकी सम्मान के साथ पूजा होती है , और यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है की हम उस देश के वासी है , जहा महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा का जन्म हुवा . और आजकल स्कुलोमे भी महाराणा प्रताप के जीवन के बारे में बताया जाता है और बच्चो को भी उनके जीवन के बारे में जानने में बहुत रूचि रहती है .

 

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तो दोस्तों यह थी महाराणा प्रताप से जीवन से जुडी हुई ऐतिहासिक जानकारिया मुझे लगता है आप को यह बहुत अच्छी लगेगी और इन हे पढ कर आप भी  महाराणा प्रताप के बारे में और अच्छे से जानने लगेंगे .

 

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तो आपको यह post  कैसी लगी pliz  हमे बताये और हम आगे भी आपके लिए और अन्य महापुरुषों की जीवनियाँ और उनसे जुडी जानकारिया लाते रहेंगे . और आप हमे post से  संबंधित सुझाव भी हमे Comments  के माध्यम से भेज सकते है .

 

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