क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व

 

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व – आज हम इस post  में गुड़ी पड़वा का महत्व  देखेंगे की गुड़ी पड़वा क्यों मनाई जाती है . और हमारी लिए इसका क्या महत्व है .

 

दोस्तों गुढी पड़वा का पर्व चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है . इसे प्रतिपदा या उगादी भी कहा जाता है . और ऐसा माना जाता है , की गुड़ी पड़वा यानी वर्ष प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा  जी ने संसार का निर्माण किया था . इस लिए इस दिन को हिन्दू नव वर्ष के रूप में भी  माना जाता है .

 

गुड़ी पड़वा को  हिन्दू नववर्ष  के रूप में मानते है . और यही कारण है की हिन्दू धर्म के लोग इस पर्व को अलग -अलग तरह से मानते  है . सामान्य तोर पर इस दिन हिन्दू परिवारों में गुड़ी का पूजन कर इसे घर के द्वार  पर लगाया जाता है . और घर के दरवाजो में आम के पत्तो से बना बंदनवार सजाया जाता है .

 

और ऐसा माना जाता है , की यह बंधनवार घर में सुख , समृद्धि और खुशिया लाता है . गुड़ी पढ़वा के दिन खास तोर पर हिन्दू परिवारों में पूरनपोली बनाई जाती है . और इस पूरनपोली को घी , शक़्कर के साथ खाया जाता है . और वही मराठी परिवारों में इस दिन खास तोर पर श्रीखंड बनाया जाता है . और अन्य  व्यंजनों के साथ परोसा जाता है .

 

और दोस्तों वैसे तो गुड़ी पड़वा पुरे देश में मनाई जाती है पर कुछ प्रांतो में इसका बहुत महत्व होता है जैसे – आंध्रप्रदेश में इस दिन प्रत्येक घर में पच्चन्डी प्रसाद बनाकर वितरित किया जाता है . गुड़ी पड़वा के दिन नीम की पत्तिया खाने का भी विधान है . और इस दिन सुबहे जल्दी उठकर नीम की कोपलें खाकर गूढ़ खाया जाता है . इसे कड़वाहट को मिठास में बदलने का प्रतीक माना जाता है .

 

दोस्तों हिन्दू पंचांग का आरम्भ गुढी पड़वाह से होता है . कहा जाता है की महान गणितज्ञ – भास्कराचार्य द्वारा इसी  दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन , मास और वर्ष की गणना कर पंचांग की  रचना की गयी थी .

 

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व:

 

और दोस्तों आप तो जानते ही  है , की गुड़ी पड़वा शब्द में गुड़ का अर्थ होता ही . विजय पताका और पढ़वा प्रतिपदा को कहा जाता है . और  गुड़ी पड़वा को लेकर अन्य मान्यताये भी है . की इस दिन भगवान राम ने दक्षिण के लोगो को बाली के अत्याचारों से मुक्त किया था , और जिसकी ख़ुशी के रूप में हर घर में विजय पताका फहराई गई , आज भी यह परम्परा महाराष्ट्र और कुछ अन्य स्थानों पर प्रचलित है .जहा हर घर में गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी फहराई जाती है .

 

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और दोस्तों में जहा रहता हु , हमारे गांव में भी  गुड़ी पड़वा के दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है , हमारे गांव में इस दिन मेला लगता है . और परम्परागत ढंगसे लोग इसका आनंद लेते है . और दूर – दूर से लोग मेला देखने आते है . और इस मेले में  गुड़ी पड़वा के महत्व को भी कई तरिके से समझाया जाता है .

 

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और बच्चो को इस दिन का बहुत इंतजार रहता है . आज हम बड़े होगये है पर हम भी जब बच्चे थे . तो हम भी  गुड़ी पड़वा का होली के दिन से ही इंतजार करते थे हम दिन गिनते थे , क्योकि इस दिन मेले में घूमने को मिलता था , और अच्छी – अच्छी मिठाईया खाने को मिलती थी .

 

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दोस्तों जैसे गुड़ी पड़वा के दिन हिन्दू नववर्ष की शुरुवात होती है . तो इस दिन कई लोग अपने नए – नए कार्य शुरू करते है . और इस दिन के बाद शादियों का भी दौर शुरू हो जाता है . और देश भर में जगह – जगह शादिया होने लगती है .

 

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तो दोस्तों आपको यह post  ” क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व ” कैसी लगी pliz  हमे बताये और में समझता हु , की आप भी इस त्यौहार को पुरे परम्परागत ढंग से मनाएंगे और इस दिन पूरनपोली का लुफ्त उठाएंगे . और अपने आप में और लोगो में मिठास भरेंगे .

 

और आप इस post  से जुड़े हुए कोई भी अपके विचार  हमे Comments  के माध्यम से बता सकते है .

 

धन्यवाद

 

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