Koshish ka phal कोशिश का फल

कोशिश का फल – दोस्तों आज में ये पोस्ट आपके लिए लाया हु , जो आपको बहुत ही पसंद आएगी.

 

कोशिश का फल

दोस्तों कोशिश शब्द आखिर होता क्या हे , इस के मायने क्या हे , और ये हमारे लिए या यु कहु हर इंसान

के लिए क्यों जरूरी हे , दोस्तों में आप को बताता हु , की कोशिश आखिर होती क्या हे , दोस्तों कोशिश वह

प्रक्रिया हे जो हम किसी काम को करने में लगाते  हे , दोस्तों उस काम की सफलता हमारी कोशिश पेही

डिपेंड रहती हे , की हमने उस कामको करने में या किसी चीज को हासिल करने में कितनी कोशिश करि

उसके ऊपर सफलता निर्भर करती हे !

 

दोस्तों आज के जमाने में हर कोई इंसान किसी न किसी छेत्र में सफलता पाना चाहता हे , चाहे वो

नौकरी हो या बिजनेस हो ,या कोई खेल हो या किसी अन्य फिल्ड में पर दोस्तों मेने अक्सर ये देखा हे की इन

चीजों में हर कोई इंसान सफलता क्यों नहीं पाता हे, कोई बिच में ही छोड़ देते हे , उस काम को और कोई

शुरुआत में ही छोड़ देते हे , और उन्होंने जो काम अपने लिए सोचा  वो उससे अलग होजाते हे ,इस का क्या कारन हे ,

 

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और दोस्तों कुछ लोग ऐसे भी होते हे , को अपने छेत्र में सफल होते हे वो सफलता को पाले ते  हे , ऐसा क्या

होता हे जो दो इंसान एक काम को शुरू करते हे , पर एक उसमे सफलता पाता हे तो दूसरा विफल हो जाता हे

दोस्तों हर फिल्ड में चाहे वो नौकरी हो या बिजनेस हो , या कुछ और हो इसमें हर इंसान सफल नहीं होते हे ,

पर जो सफल होते हे उन लोगो ने ऐसा क्या किया जोवो सफल हुए , दोस्तों इन लोगोने जो अपनी अपनी

 

फिल्ड में सफल हुए हे , इनलोगो ने काम को पूरा करने की पूरी कोशिश करी इन लोगोने तबतक  कोशिश

करी जबतक सफलता नहीं पाली दोस्तों आप ऐसे कई उदाहरण देखेंगे जिन्होंने अपनी फिल्ड में सफलता को

पाया हे पर दोस्तों उनको भी सफलता ऐसे ही नहीं मिल गई उनलोगो ने सफल होने तक पूरी कोशिश करी

दोस्तों तब जाकर उनको सफलता मिली अमिताभ बच्चन जिन हे , आज सदी का महानायक कहा जाता हे

 

क्या उनको फिल्म इंडस्ट्री  विरासत में मिली थी , नहीं दोस्तों उन्होंने अपनी पूरी म्हणत और अपनी अपर

कोशिश से ये मुकाम हासिल किया  हे , और दोस्तों आप मस्ती ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भी जानते होंगे

जिन्हे यह बच्चा बच्चा जनता हे उन्हें भी क्या क्रिकेट विरासत में मिलता या नहीं नहीं दोस्तों सच्ची ने भी

अपनी पूरी म्हणत और लगन और अपनी पूरी सफल कोशिश के बलबूते पे ये मुकाम हासिल किया हे ,

 

दोस्तों उदाहरण तो दुनिया में ऐसे बहुत हे , शायद आप के आसपास भी ऐसे कई लोग मिल जायेगे दोस्तों

यह में दोनों तरह के लोगो की बात कर रहा हु , जो ांनी कोशिश से सफल हुए , और जिनलोगो ने अधूरी

कोशिश से उनका काम नहीं हुआ ऐसे लोग जीवन में कुछ नहीं कर पाए वो लोग जीवन तो जियेंगे पर संतुस्ती के साथ नहीं एडजेस्ट मेन्ट के साथ जीना पढ़ेगा दोस्तों जिनको अपने मन की नौकरी का कोई ऐसा काम जो

 

वो बचपन से करना चाहता था , पर अपनी सही कोशिश न कर पाने से वो उस मुकाम को असील नहीं कर पाए

और फिर जो वो दूसरा काम करते हे उसमे खुश नहीं रह पाते और दोस्तों दूसरी तरफ वो लोग जिन्होंने अपनी

पूरी कोशिश से अपने मन  का काम पाया हे तो वो लोग साडी उम्र बहुत खुश रहेंगे और अपने परिवार अपने बीवी बच्चो को भी खुश रख पाए गए , और उनके मन में और घर में खुशिया भर जाती हे

 

 

कोशिश का फल

 

तो दोस्तों आप अब समझ ही गए होंगे की कोशिश का फल क्या होता हे , और ये हर किसी को नहीं मिलता

 

तो दोस्तों अब में आप के सामने एक कहानी रखने जारहा हु , आप को जरूर पसंद आएगी

 

कोशिश का फल-

 

दोस्तों दो जुडवां बहने थीं – प्रतिभा और माया । प्रतिभा बुद्धि सम्पन्न , समझदार , होशियार , कार्य-कुशल और भोली-भाली थी जबकि उसके विपरीत माया चालाक आलसी और कामचोर थी । प्रतिभा पूरी मेहनत से पढाई करती और दूसरों की सहायता करके उसे खुशी मिलती । वह घर में मां के काम में भी उसका हाथ बंटाती और फ़िर पूरा मन लगाकर पढाई करती । अपनी मेहनत से हर प्रश्न का हल ढूंढ्ती और फ़िर उसे बडे ही सुन्दर तरीके से लिखती ।

 

उसकी इतनी मेहनत की सब अध्यापक बहुत तारीफ़ करते , वहीं माया कभी ठीक से ग्रह-कार्य भी न करती थी , वह सारा दिन खेलती मस्ती करती और आराम से सो जाती । मां का हाथ बंटाना तो दूर उसके अपने भी छोटे-छोटे कार्य मां को ही निपटाने पडते । प्रतिभा उसको बहुत समझाती लेकिन माया को उसकी बात कभी समझ नही आती ।

बस परीक्षा के दिनों में प्रतिभा की उत्तर पुस्तिका पढती और परिणाम स्वरूप उससे ज्यादा अंक हासिल कर लेती । उसका परिणाम देखकर सब माया की तारीफ़ करते और उसे मां-पापा से ढेरों उपहार भी मिलते । हर कोई उसकी प्रशंसा करता और मां-पापा की जुबान पर तो एक ही बात रहती कि माया कुशाग्र बुद्धि है । प्रतिभा सारा साल मेहनत करके भी उतने अंक हासिल नहीं कर पाती जितने माया केवल परीक्षा के दिनों में पढकर हासिल करती है ।

 

ऐसी बातों से प्रतिभा की प्रतिभा और माया का निट्ठलापन सब छुप जाता । प्रतिभा अंदर ही अंदर ऐसी बातें सुनकर बहुत दुखी होती लेकिन फ़िर भी चुप ही रहती । वह जानती थी कि उपहारों की हकदार वह है न कि माया लेकिन कोई भी उसके मन की बात को कभी नहीं समझ पाता । प्रतिभा को माया की कमजोरी का अहसास था लेकिन माया प्रतिभा के गुणों को कभी न पहचान पाई ।

 

ऐसा करते-करते वह दोनों बारहवीं तक की परीक्षा पास कर गईं और आगे उच्च शिक्षा के लिए कालेज में दाखिले हेतु उनको सामान्य ग्यान पर आधारित एक बौधिक परीक्षा पास करनी थी । अब असली इम्तिहान की घडी थी ।

 

जो माया हर बार अपने परिणाम से सबको चौंका देती थी वही माया दाखिले हेतु एन्ट्रैंस टेस्ट भी पास न कर पाई और प्रतिभा ने प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान अर्जित कर सबको चौंका दिया । अब सबको प्रतिभा की प्रतिभा का अहसास हुआ था और माया को भी अब प्रतिभा के गुणो और कोशिश का फल मिला

 

तो दोस्तों आप को ये पोस्ट कोशिश  का फल केसी लगी प्लीज़ हमे बताये और दोस्तों में समझता हु , की अब आपभी जीवन में सफलता पाने के लिए अचछे से कोशिश करेंगे और दोस्तों अगर आप कोशिश अच्छी

करेंगे तो आप को सफलता पाने से कोई रोक नहीं सकता और दोस्तों इसी के साथ !

 

धन्यवाद

विजय पटेल

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