इंदिरा गाँधी Biography in हिन्दी

इंदिरा गाँधी Biography in हिन्दी – दोस्तों इंदिरा गाँधी एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीती में एक छत्र राज किया भारत की राजनीती में और भारत की सरकार में इंदिरा गाँधी के नाम का आज भी ढंका बजता है. इंदिरा गाँधी देश की पहली  और आखरी महिला प्रधानमंत्री थी. जिन्होंने हिन्दुस्तान पर राज किया और राज भी ऐसा की सारी दुनिया आज भी उनके नाम का लोहा मानती है. इंदिरा गाँधी “Indian National कांग्रेस”  की नेता थी. और कांग्रेस पार्टी में उनके पिता जवाहरलाल नेहरू के बाद उन्होंने ही सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री पद संभाला है.इंदिरा गाँधी Biography in हिन्दीउनका प्रधानमंत्री के रूप में जीवन बहुत ही उतार – चढ़ाव भरा रहा कभी अपनों से दुरी बनी तो कभी इमरजेंसी जैसा दौर भी देश में उनके राज में आया कभी उन  पर चुनावो में गड़बड़ी करने के आरोप भी लगे पर फिर भी देश की जनता ने उन्हें और उनके काम को खूब सराहा इंदिरा गाँधी को चुनाव में हार जाने के बाद भी फिर जनता ने फूल मेजोरिटी के साथ जिताया और दोस्तों अन्त में प्रधानमंत्री रहते ही उनकी उनके  ही अंग रक्षक द्वारा हत्या कर दी गयी.

तो आज हम इंदिरा गाँधी की Biography उनका जीवन परिचय विस्तार से देखेंगे जिससे आपको भी उनके जीवन के बारे में और अधिक जानने को मिलेगा.

इंदिरा गाँधी का संक्षिप्त में जीवन परिचय –

पूरा नाम       –    इंदिरा फिरोज गाँधी

जन्म            –   19  नवम्बर 1917

जन्मस्थान    –   इलाहबाद (उत्तर प्रदेश)

पिता             –    पंडित जवाहरलाल नेहरू

माता             –    कमला जवाहरलाला नेहरू

शिक्षा            –    इलाहबाद, पुणे, मुंबई, कोलकाता इसी  जगह उनकी शिक्षा हुई. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया पर कुछ कारण वश उन्हें डिग्री लिए बगैर अपने देश भारत वापिस आना पड़ा.

विवाह           –    फिरोज गाँधी के साथ  1942

इंदिरा गाँधी Biography in हिन्दी”

इंदिरा गाँधी की जीवनी –

दोस्तों इंदिरा गाँधी, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थी. इंदिरा ने अपने पापा के राष्ट्रस्तरीय संस्था की 1947 – 1964  तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की. उनके इस योगदान को देखते हुए उन्हें 1959  में राष्ट्रीय Congress का अध्यक्ष्य बनाया गया.

1964 में उनके पिता की मृत्यु के बाद, इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस पार्टी के नेता बनने के संघर्ष को छोड़ दिया और लाल बहादुर शास्त्री को सरकार में केबिनेट मंत्री बनाने की ठानी. पर बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अध्यक्षा इंदिरा गाँधी ने मोरारजी देसाई को हराया और भारत की पहली प्रधानमंत्री बनी.

मित्रो प्रधानमंत्री होने के साथ इंदिरा जी अपनी राजनितिक क्रूरता और बेमिसाल केन्द्रीयकरण के किये भी जानी जाती है. वह स्वतंत्रता के लिए पाकिस्तान का साथ देने के लिए भी तैयार रही उन्होंने पाकिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका साथ दिया जिसमे पाकिस्तान ने विजय हासिल की और फिर बांग्लादेश बना.

इंदिरा गाँधी ने 1975  से 1977  तक राज्यों मे आपातकाल की स्थिति घोषित की और रातो – रात सभी राज्यों मे इसे लागु करने का भी आदेश दिया. 1984 में जब वह पंजाब के हरमंदिर साहिब, अमृतसर को आदेश दे रही थी तभी उनके सिख अंगरक्षक द्वारा उनकी हत्या की गयी.

इंदिरा गाँधी का प्रारंभिक जीवन –

दोस्तों इंदिरा गाँधी का जन्म इंदिरा नेहरू के नाम से कश्मीरी पंडित परिवार में 19  नवम्बर 1917  को इलाहबाद में हुवा. उनके पिता जवाहरलाल नेहरू, एक बड़े राजनेता थे जिन्होंने स्वतंत्रता पाने के लिए अंग्रेजो से राजनैतिक स्तर पर लड़ाई की थी. फिर वे अपने राज्य संघ के प्रधानमंत्री और बाद में भारत के प्रधानमंत्री नियुक्त हुए. इंदिरा गाँधी जवाहरलाल नेहरू की एक लोती बेटी थी. और उनका एक छोटा भाई भी था लकिन वो बचपन में ही मारा गया था. जो अपनी माता कमला नेहरू के साथ आनंद भवन में बढ़ी हुई. जहा इलाहबाद में उनके परिवार की बहुत सम्पत्ति थी.

इंदिरा का बचपन बहोत नाराज और अकेलेपन से भरा पड़ा था. उनके पिता राजनीती में होने की वजह से कई दिनों तक या तो घर से बाहर रहते या जेल में रहते. उनकी माता को बीमारी होने की वजह से वो पलंग पर ही रहती थी. और बाद में उनकी माता को जल्दी ही ट्यूबरकुलोसिस की वजह से मृत्यु प्राप्त हुई.

और इंदिरा का अपने पिता जी के साथ बहुत कम संबंध था. ज्यादातर वे पत्र व्यवहार ही रखते थे. इंदिरा गाँधी को ज्यादातर घर पर ही पढ़ाया जाता था. और रुक – रुक कर वो कभी – कभी मेट्रिक के लिए स्कूल भी चली जाती. वह दिल्ली के मार्डन स्कूल, सेंट सिल्लिया और सेंट मेरी क्रिश्चन कान्वेंट स्कूल, अल्लाहाबाद की विद्यार्थी रह चुकी है.

साथ ही एकोले इंटरनेशनल, जिनेवा, एकोले नॉवेल्ले, बेक्स और पुपिल्स ऑन स्कूल, पुन और बॉम्बे की भी विद्यार्थी रह चुकी है. बाद में वे पढ़ने के लिए शांति निकेतन के विश्वा भारती महाविद्यालय गयी. और उनके साक्षात्कार के समय ही रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनका नाम प्रियदर्शनी रखा. और तभी से वह इंदिरा प्रियदर्शनी गाँधी नाम से पहचानी गयी. एक साल बाद उन्होंने वह विश्वविद्यालय अपनी माता के अस्वस्थ होने की वजह से छोड़ दिया और यूरोप चली गयी.

ऐसा कहा जाता है की वहा उन्होंने अपनी पढ़ाई आक्सफोर्ट विश्वविद्यालय से पूरी की. उनकी माता की मृत्यु के बाद, 1937  में इतिहास की पढ़ाई करने से पहले अपने आप को बैडमिंटन स्कूल में डाला. इंदिरा गाँधी ने वहा पर दो बार एंट्रेंस परीक्षा दी क्यों की लेटिन भाषा में उनकी ज्यादा पकड़ नहीं थी. आक्सफोर्ट विश्वविद्यालय में, वो इतिहास, राजनैतिक विज्ञानं और अर्थशास्त्र में अच्छी थी लेकिन लेटिन में इतनी अच्छी नहीं थी जो आवश्यक विषय था उसमे वो इतनी होशियार नहीं थी.

दोस्तों यूरोप में इंदिरा जी को किसी बड़ी बीमारी ने घेर लिया था. कई बार doctor उनकी जांच करने आते – जाते रहते थे. वह जल्द से जल्द ठीक होना चाहती थी. ताकि फिर से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके. जब नाजी आर्मी तेजी से यूरोप को परास्त कर रही थी उस समय इंदिरा वहा पड़ रही थी.

इंदिरा जी ने पुर्तगाल से इंग्लैंड आने के कई प्रयास किये लेकिन उनके पास दो महीने का ही स्टेण्डर्ड बचा हुवा था. लेकिन 1941  के  आखिर में वे इंग्लैंड आगयी और वहा से अपनी पढ़ाई पूरी किये बिना ही भारत वापिस आ गयी. बाद में उनके विश्वविद्यालय ने उन्हें आदर पूर्वक डिग्री प्रदान की.

2010  में, ऑक्सफोर्ड ने 10  आदर्श विद्यार्थियों में उनका नाम लेकर उन्हें सम्मान दिया. इंदिरा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में एशिया की एक आदर्श महिला थी. ग्रेट ब्रिटेन में रहते हुए, इंदिरा जी अपने भविष्य में होने वाले पति फिरोज गाँधी (जिनका महात्मा गाँधी से कोई संबंध नहीं था) से मिली. जिन्हे वो इलाहबाद से जानती थी. और जो लंदन की अर्थशास्त्र स्कूल में पढ़ता था. और बाद में आदि धर्म के अनुसार फिरोज जोरास्त्रियन  पारसी परिवार से था. और अल्लाहबाद में उन दिनों की (इंदिरा नेहरू और फिरोज गाँधी) की शादी कर दी गयी.

1950  में शादी के बाद इंदिरा गाँधी, अपने प्रधानमंत्री बनने के अभियान में अनाधिकृत रूप से अपने पिता की वैयक्तिक सहायता के रूप में सेवा करने लगी. 1950  के अन्त तक, इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में सेवा की. उन्होंने करेला राज्य अलग से बनाने की भी कोशिश की लेकिन 1959  में सरकार ने उसे अस्वीकृत किया. इसका मुख्य उद्देश्य यह था की इंदिरा जी एक साम्य वादी सरकार बनाना चाहती थी.

1964 में उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्हें राजयसभा का सदस्य नियुक्त किया गया. बाद में वे लाल बहादुर शास्त्री केबिनेट का हिस्सा बनी और जानकारी अभियान की मंत्री भी बनी. 1966  में शास्त्री जी की मृत्यु के बाद, कांग्रेस पार्टी ने मोरारजी देसाई की जगह इंदिरा गाँधी को अपने नेता के रूप में स्वीकार किया. कांग्रेस पार्टी के अनुभवी व्यक्ति, कामराज ने इंदिरा जी की विजय में उनकी बहुत सहायता की थी.

दोस्तों मैने आपको ऊपर भी बताया की इंदिरा गाँधी एक देश प्रेमी थी. उन्होंने प्रधानमंत्री रहते देश में कई कड़े फैसले लिए वह हमेशा कहती थी,” आपको गतिविधि के समय स्थिर रहना और विश्राम के समय क्रियाशील रहना सिख लेना चाहिए.” मतलब इंसान को कोई भी काम करते समय वो सचेत दिमाग से करना चाहिए. जीवन में क्रियाशील होने के साथ – साथ विश्राम भी जरूरी होता है. ताकि हम अपने दिमाग को और अधिक गतिशील बना सके और दोस्तों यही काम इंदिरा गाँधी भी करती थी.

इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री के रूप में –

सन 1966 में जब इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनी, कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो चुकी थी. इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में समाजवादी और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में रूढ़िवादी. मोरारजी देसाई उन्हें “गूंगी गुड़िया” कहा करते थे. 1967  के चुनाव में आंतरिक समस्याएं उभरी जहा कांग्रेस लगभग 60 सीटे खोकर 545 सीटोंवाली   लोक सभा में  297 सीटे प्राप्त करी.

उन्हें देसाई को भारत के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में लेना पड़ा. दोस्तों सन 1969  में देसाई के साथ अनेक मुद्दों पर असहमति के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विभाजित हो गयी. वे समाजवादी और साम्यवादी दलों से समर्थन पाकर अगले दो वर्षो तक सरकार चलाई. उसी वर्ष 1969 को उन्होंने बैंको का रास्ट्रीयकरण किया.

सन 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थी समस्या का हल करने के लिए उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान की और से, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे. पाकिस्तान पर युद्ध घोषित कर दिया. 1971 के युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के अधीन अमेरिका अपने सातवे बेड़े को भारत के पूर्वी पाकिस्तान से दूर रहने के लिए यह वजह दिखाते हुए की पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ एक व्यापक हमला विशेष रूप से कश्मीर के सीमाक्षेत्र के मुद्दे को लेकर हो सकती है.

चेतावनी के रूप में बंगाल की खाड़ी में भेजा. यह कदम प्रथम विश्व से भारत को विमुख कर दिया था. और प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अब तेजी के साथ एक पूर्व सतर्कतापूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश निति को नई दिशा दी. भारत और सोवियत संघ पहले ही मित्रता और आपसी सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किये थे. जिसके परिणामस्वरूप 1971  के युद्ध में भारत की जित में राजनैतिक और सैन्य समर्थन का पर्याप्त योगदान रहा.

परमाणु कार्यक्रम –

दोस्तों जनवादी चीन गणराज्य से परमाणु खतरे तथा दो प्रमुख महाशक्तियों की दखलंदाजी में रूचि भारत की स्थिरता और सुरक्षा के लिए अनुकूल नहीं महसूस किये जाने के मद्दे नजर, इंदिरा गाँधी का अब एक राष्ट्रीय कार्यक्रम था. उन्होंने नए पाकिस्तानी राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो को एक सफ्ताह तक चलने वाली शिमला शिखर वार्ता में आमंत्रित किया था. वार्ता के विफलता के करीब पहुंच दोनों राज्य प्रमुख ने अंततः शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसके तहत कश्मीर विवाद को वार्ता और शांतिपूर्ण ढंग से मिटाने के लिए दोनों देश अनुबंधित हुए.

कुछ आलोचकों द्वारा नियंत्रण रेखा को एक स्थाई सिमा नहीं बनाने पर इंदिरा गाँधी की आलोचना की गयी जबकि कुछ अन्य आलोचकों का विश्वास था. की पाकिस्तान के 93, 000  युद्धबंदी भारत के कब्जे में होते हुए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से निकाल लेना चाहिए था.

लेकिन यह समझौता संयुक्त राष्ट्र तथा  किसी तीसरे पक्ष के तत्काल हस्तक्षेप को निरस्त किया एवं निकट भविष्य में पाकिस्तान द्वारा किसी बड़े हमले किये जाने की संभावना को बहुत हद तक घटाया. भुट्टो से एक संवेदनशील मुद्दे पर सम्पूर्ण आत्मसमर्पण  की मांग नहीं कर उन्होंने पाकिस्तान को स्थिर और सामान्य होने का मौका दिया.

वर्षो से ठप पड़े बहुत से सम्पर्को के मध्यम से व्यापार संबंधो को पुनः सामान्य किया गया. स्माइलिंग बुद्धा के अनौपचारिक छाया नाम से 1974  में भारत ने सफलतापूर्वक एक भूमिगत परमाणु परीक्षण राजस्थान के रेगिस्तान में बसे गांव पोखरण के करीब किया. शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परीक्षण का वर्णन करते हुए भारत दुनिया की सबसे नवीनतम परमाणु शक्तिधर बन गया.

1971 के चुनाव में विजय और इंदिरा गाँधी का द्व्तीय कार्यकाल –

इंदिरा गाँधी की सरकार को उनकी 1971 के जबरजस्त जनादेश के बाद प्रमुख कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कांग्रेस पार्टी की आंतरिक संरचना इसके असंख्य विभाजन के फलस्वरूप कमजोर पढ़ने से चुनाव में भाग्य निर्धारण करने के लिए पूरी तरह से उनके नेतृत्व पर निर्भरशील हो गयी थी. इंदिरा गाँधी सन 1971  की तैयारी में नारे का विषय गरीबी हटाओ. यह नारा और प्रस्तावित गरीबी हटाओ कार्यक्रम का खाका, जो इसके साथ आया, इंदिरा गाँधी  को ग्रामीण और शहरी गरीबो पर एक स्वतंत्र राष्ट्रीय समर्थन देने के लिए गए थे.

इस तरह उन्हें प्रमुख ग्रामीण जातियों के दबदबे में रहे राज्य और स्थानीय सरकारों एवं शहरी व्यापारी वर्ग को अनदेखा करने की अनुमति रही थी. और अतीत में बेजुबा रहे गरीब के हिस्से, कम से कम राजनितिक मूल्य एवं राजनैतिक भार, दोनों की प्राप्ति में वृद्धि हुई.

गरीबी हटाओ के तहत कार्यक्रम, हालाँकि स्थानीय रूप से चलाये गए, परन्तु उनका वित्तपोषण, विकास, पर्यवेक्षण एवं कर्मिकरण नई दिल्ली तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी द्वारा किया गया. “ये कार्यक्रम केंद्रीय राजनैतिक नेतृत्व को समूचे देशभर में नये एवं विशाल संसाधनों के वितरित करने के मालिकाना भी प्रस्तुत किये.” अंततः गरीबी हटाओ गरीबो के बहुत कम काम आये, आर्थिक विकास के लिए आवंटित सभी निधियों के मात्र 4% तीन प्रमुख गरीबी हटाओ कार्यक्रम के हिस्से गए और लगभग कोई भी “गरीब से गरीब” तबके तक नहीं पहुंची. इस तरह यह कार्यक्रम गरीबी घटाने में असफल रही, इसने इंदिरा गाँधी को चुनाव जितने का लक्ष्य हासिल कर लिया. 

इंदिरा गाँधी की मृत्यु –

दोस्तों 1980 के दशक में सिख अलगाववादी आंदोलन भारत में शुरू हुआ जिसने इंदिरा गाँधी ने दमन किया जिसे  “ऑपरेशन ब्लू स्टार” नाम दिया गया. इंदिरा गाँधी ने स्वर्ण मंदिर में एक सैन्य अभियान चलाया जिसमे इंदिरा गाँधी ने 70000 सेनिको को वहा  पर भेजा जिसमे 450  सैनिक मारे गए. 31  अक्टूबर 1984  को इंदिरा गाँधी  के भरोसेमंद सिख अंगरक्षक ने बंदूक की गोली से उन्हें मार दिया. उसके बाद एक दूसरे अंगरक्षक ने भी कई गोलिया दागी. इंदिरा गाँधी को अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही उनकी मोत हो गयी.

इंदिरा गाँधी  की मृत्यु के एक दिन पहले उन्होंने उड़ीसा में एक भाषण दिया था. “अगर में देश की सेवा करते – करते मर भी जाती हु तो मुझे इस पर नाज होगा, मुझे विश्वास है की मेरे खून का हर कतरा इस राष्ट्र के विकास में योगदान देगा और उसे मजबूत बनाएगा.” इस तरह इंदिरा गाँधी की मृत्यु हो गयी.

इंदिरा गाँधी से जुडी कुछ रोचक जानकारिया –

1930  के सविनय कायदा भंग आंदोलन समय कांग्रेस स्वयंसेवको को मदत करने के लिए उन्होंने छोटो  बच्चो की ‘वानरसेना’ स्थापित की.

1942  में ‘चले जाव’ आंदोलन में शामिल होने के कारण जेल की सजा हुई.

1955  में राष्ट्रीय कांग्रेस कार्यकारणी सदस्या और 1959  में राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुवा.

1964  में पंडित नेहरू के देहांत के बाद लालबहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बने उन्ही के कार्यकाल में इंदिरा गाँधी सुचना और नभोवानी कहते का मंत्री पद संभाला.

1966  में लालबहादुर शास्त्री जी के निधन के बाद इंदिरा जी का पंतप्रधान पद के लिए चयन हुवा. और हिन्दुस्तान के नक्शे पर उन्हें प्रथम महिला  प्रधानमंत्री बनने का का सौभाग्य प्राप्त हुवा.

1969  में कांग्रेस पार्टी में दरार गिरने के कारण पुराने कांग्रेस नेताओ के नेतृत्व में सिंडिकेट कांग्रेस और इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में इंडिकेट कांग्रेस ऐसी दो पार्टीयो का जन्म हुवा. इसी वर्ष उन्होंने पुरोगामी और लोककल्याणकारी योजनाओ की अमलबजावणी बड़ी ताकत के साथ शुरू की. देश की चोदा बड़ी बैंको का रास्ट्रीयकरण किया और संस्थानिको का तन्खा रद्द करने का फैसला किया.

1971  में इंदिरा गाँधी ने लोकसभा विसर्जन करके लोकसभा की सहायता पूर्ण की घोषणा की. इस चुनाव में उन्होंने ” गरीबी हटाओ” की घोषणा दी. इस लोकसभा चुनाव में उनके पक्ष को बहुमत से विजय प्राप्त हुई. कांग्रेस पक्ष के सभी सूत्र उनके हाथ में केंद्रित हुए. और वो कांग्रेस की सर्वोच्च नेता बनी.

भारत  पर  बार – बार हमला करने वाले पाकिस्तान के पूर्व बंगाल पीड़ित लोगो को स्वतंत्र करने के लिए सैन्य सहायता करके उन्हें भारत  से पाकिस्तान और पाकिस्तान से ‘बांग्लादेश’ और पाकिस्तान के ऐसे दो टुकड़े किये.

1972  में इंदिरा गाँधी पाकिस्तान की द्विपक्षीय ” शिमला समझौता” करके अपना मुस्तदगिरि का दर्शन कराया.

1975  में इलाहबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गाँधी के रायबरेली मतदार संघ में से लोकसभा पर चुने जाने को अवैध ठहराया गया. इंदिरा गाँधी ने 1975  में आपातकाल लागु किया. पर भारत की लोकशाही जनता उस वजह से नाराज हुई.

1977  के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की  हार हुई. खुद इंदिरा गाँधी भी अपनी रायबरेली की सीट नहीं बचा पाई. इसका परिणाम ऐसा हुवा जनता के हट में सत्ता गयी उस पक्ष के और सरकार में से पार्टी घटको का झगड़ा होने के कारण 1980  में मदतपूर्ण हुए चुनाव में कांग्रेस ने देदीप्यमान जित हुई. और इंदिरा जी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनी. 

1982  में दिल्ली में नोवी एशियाई स्पर्धेका यशस्वीरीयता आयोजन करने में उनका महत्वपूर्ण हिस्सा था.

इंदिरा गाँधी ने अपने प्रधानमंत्री होते हुए कई अहम और कड़े फैसले लिए जिनके कुछ उनके सहयोगी और विरोधी भी बहुत नाराज होते थे. उनका राजनैतिक और निजी दोनों ही जीवन बहुत उतार – चढ़ाव भरे रहे पर  उन्होंने पुरे होश हवास में और अपने साहस के द्वारा हर परिस्तिथि का डट कर सामना किया और इसी लिए हम आज भी इंदिरा गाँधी को बड़े आदर के साथ याद करते है.

तो दोस्तों यह थी पोस्ट ” इंदिरा गाँधी Biography in हिन्दी ” आपको यह post  कैसी लगी प्लीज़ हमे जरूर बताये और में समझता हु, आप भी इंदिरा गाँधी  के जीवन से जरूर कुछ सिख लेंगे दोस्तों वो  चाहे निजी जीवन में भलेही कैसी भी महिलारही हो पर उनका जीवन एक सफल जीवन की तुलना में आता है. उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन में कभी मेहनत और कठोर परिश्रम के शक्ति से अपने जीवन में सफलता हासिल करी उनका  भलेही एक बड़े परिवार में जन्म हुवा था. पर उन्होंने अपने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखा और लोगो का सामना करते हुए अपने काम को बखूभी निभाया

दोस्तों हम भी इंदिरा गाँधी के जीवन से बहुत कुछ सिख ले सकते है, और अपने आप को भी सफलता दिला सकते है. हमे भी उनकी तरह अपने काम पर Focus  रखना पड़ेगा. अपने काम पर ध्यान देना होगा और उसमे सफलता मिलने तक करना होगा. 

दोस्तों इंदिरा गाँधी की Biography के बाद हम आगे भी आपके लिए कई अन्य महापुरषो की जीवनी हिन्दी में लाते रहेंगे बस आपको यह पोस्ट कैसी लगी आप अपने विचार हमे अपने Comments  के माध्यम से भेज सकते है.

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