दिवाली क्यों मनाते है

दिवाली क्यों मनाते है – दोस्तों आज मै ये post आपके लिए thoughtking पर लाया हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी .

 

दिवाली क्यों मनाते है

दोस्तों क्या हे , दिवाली , और  इसे क्यों मनाया जाता हे ,

 

दोस्तों दिवाली का महत्व हिन्दू पोराणीक कथावो से हे , की जब भगवान राम लंका से रावण का वध करके अयोध्या वापस आये थे तब इस ख़ुशी में सभी अयोध्या वासियो ने अपने – अपने घरो में दीपक जलाके श्री राम – लछ्मण और माता सीता

 

का स्वागत किया था !

 

दोस्तों जब हम लोग भी बचपन में थे तब हम भी एक दो महीने पहले से ही दिवाली का इंतजार करने लगते थे !
क्यों की उससमय हमें दिवाली पे पठाखे फोड़ना फुलझड़ी चलाना आतिश बाजी करने का बहुत शोक था ,

दोस्तों हमें नये नये कपड़े मिलते थे और घरो में मिठाईया , ओरभी कई प्रकार के पकवान बनाते थे ,

पर दोस्तों आज हम बड़े होचुके हे , आज हमारी जगा हमारे बच्चो ने लेली हे , जो काम हम करते थे आज हमारे बच्चे वो काम करते थे , या कहु उससे भी कुछ ज्यादा करते हे ,

 

दिवाली क्यों मनाते है

 

अब दोस्तों मोडेन जमाने के बच्चे बहुत एडवांस होगये हे , ये लोग अपने हिसाब से दिवाली मनाते हे

दोस्तों हम पत्थर से तिकड़ी फोड़ते थे मगर आज कल आधुनिक  खिलोने आगये हे आतिश बाजीके पर दोस्तों मेरा आप

 

सभी से बस इतना और कहना हे की अच्छे से त्यौहार मनाये और अपने आप को और खास

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धन्यवाद

 

 

दोस्तों दिवाली क्यों मनाई जाती हे इसके उपलक्ष में कुछ और मान्यता हे

देवी लक्ष्मी का जन्मदिन: दोस्तों देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की स्वामिनी है।

 

यह माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुन्द्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के समुन्द्र  से कार्तिक महीने की अमावश्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिवाली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया।

 

भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को बचाया: दोस्तों  हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनों लोक (पृथ्वी, आकाश और पाताल) का मालिक बनना चाहता था,

 

उसे भगवान विष्णु से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरे विश्व में केवल गरीबी थी क्योंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बली द्वारा रोका हुआ था।

 

भगवान के बनाये ब्रह्मांण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनों लोकों को बचाया था अपने वामन अवतार,के द्वारा और देवी लक्ष्मी को उसकी जेल से छुडाया था।

 

तब से, यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचाने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया।

 

भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मार डाला: मुख्य दिवाली से एक दिन पहले का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। बहुत समय पहले, नरकासुर नाम का राक्षस राजा था, जो लोगों पर अत्याचार करता था और उसने अपनी जेल में

 

16000 औरतों को बंधी बना रखा था। भगवान कृष्ण  उसकी हत्या करके नरकासुर की हिरासत से उन सभी महिलाओं की जान बचाई थी। उस दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

 

राज्य में पांडवों की वापसी: महान हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, निष्कासन के लम्बे समय(12 वर्ष) के बाद कार्तिक महीने की अमावश्या को पांडव अपने ऱाज्य लौटे थे। कोरवों से जुऐं में हारने के बाद उन्हें 12 वर्ष के लिये

 

निष्कासित कर दिया गया था। पांडवों के राज्य के लोग पांडवों के राज्य में आने के लिए बहुत खुश थे और मिट्टी के दीपक जलाकर और पटाखे जलाकर पांडवों के लौटने दिन मनाना शुरू कर दिया।

 

दोस्तों हम लोग पांच दिनों के दिवाली समारोह मानते हे

 

धनतृयोदशी या धनतेरस या धनवंन्तरी तृयोदशी: धनतेरस का अर्थ है(धन का अर्थ है संपत्ति और तृयोदशी का अर्थ है 13वाँ दिन) चंद्र मास के 2 छमाही के 13वें दिन में घर के लिए धन का आना।

 

इस शुभ दिन पर लोग बर्तन, सोना खरीदकर धन के रूप में घर लाते है। यह भगवान धनवंतरी (देवताओं के चिकित्सक) की जयंती (जन्मदिन की सालगिरह) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है,

 

जिनकी (देवताओं और राक्षसों ने समुद्र मंथन के दौरान) उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी।

 

नरक चतुर्दशी: नरक चतुर्दशी 14वें दिन पडती है, जब भगवान कृष्ण (भगवान विष्णु के अवतार) ने राक्षस नरकासुर को मारा था। यह बुराई की सत्ता या अंधकार पर अच्छाई या प्रकाश की विजय के संकेत के रुप में जश्न मनाया जाता है।

 

आज के दिन लोग जल्दी (सूर्योदय से पहले) सुबह उठते है, और एक खुशबूदार तेल और स्नान के साथ ही नये कपडे पहनकर तैयार होते है।

 

तब वे सभी अपने घरों के आसपास बहुत से दीपक जलाते है और घर के बाहर रंगोली बनाते है। वे अपने भगवान कृष्ण या विष्णु की भी एक अनूठी पूजा करवाते है।

 

सूर्योदय से पहले स्नान करने का महत्व गंगा के पवित्र जल में स्नान करने के बराबर है। पूजा करने के बाद वे राक्षस को हराने के महत्व में पटाखे जलाते है। लोग पूरी तरह से अपने परिवार और दोस्तों के साथ उनके नाश्ता और लंच करते है।

 

लक्ष्मी पूजा: यह मुख्य दिन दीवाली जो लक्ष्मी पूजा (धन की देवी) और गणेश पूजा (सभी बाधाओं को हटा जो ज्ञान के देवता) के साथ पूरी होती है।

 

महान पूजा के बाद वे अपने घर की समृद्धि और भलाई का स्वागत करने के लिए सड़कों और घरों पर मिट्टी के दीये जलाते है।

 

बाली प्रतिप्रदा और गोवर्धन पूजा: यह उत्तर भारत में गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र के गर्व को पराजित करके लगातार बारिश और बाढ से बहुत से लोगों

 

(गोकुलवासी) और मवेशियों के जीवन की रक्षा करने के महत्व के रुप में इस दिन जश्न मनाते है।

 

अन्नकूट मनाने के महत्व के रुप में लोग बडी मात्रा में भोजन की सजावट(कृष्ण द्वारा गोवर्धन पहाडी उठाने प्रतीक के रुप में) करते है और पूजा करते है।

 

यह दिन कुछ स्थानों पर दानव राजा बाली पर भगवान विष्णु (वामन) की जीत मनाने के लिये भी बाली-प्रतिप्रदा या बाली पद्धमी के रूप में मनाया जाता है।

 

कुछ स्थानों जैसे महाराष्ट्र में यह दिन पडवा या नव दिवस (अर्थात् नया दिन) के रुप में भी मनाया जाता है और सभी पति अपनी पत्नियों को उपहार देते है।

 

गुजरात में यह विक्रम संवत् नाम से कैलेंडर के पहले दिन के रूप में मनाया जाता है।

 

यम द्वितीया या भाई दूज: यह भाइयों और बहनों का त्यौहार है जो एक दूसरे के लिए अपने प्यार और देखभाल का प्रतीक है। यह जश्न मनाने के महत्व के पीछे यम की कहानी (मृत्यु के देवता) है।

 

आज के दिन यम अपनी बहन यामी (यमुना) से मिलने आये और अपनी बहन द्बारा उनका आरती के साथ स्वागत हुआ और उन्होंने साथ में खाना भी खाया। उन्होनें अपनी बहन को उपहार भी दिया।

 

दोस्तों दिवाली पे दीपदान का महत्व

दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्त्व होता है।

 

नारदपुराण के अनुसार इस दिन मंदिर, घर, नदी, बगीचा, वृक्ष, गौशाला तथा बाजार में दीपदान देना शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता। इस दिन गायों के सींग आदि को रंगकर उन्हें घास और अन्न

देकर प्रदक्षिणा की जाती है।

 

दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता की एक अनोखी छठा को पेश करता है। आज अवश्य पटाखों की शोर में माता लक्ष्मी की आरती का शोर कम हो गया है लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी बनी हुई है।

 

दोस्तों आप को ये post  केसी लगी pliz बतायेआप सब को happy diwali

धन्यवाद
विजय पटेल

 

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