भारत के सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण और शायरी

भारत के सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण और शायरी

भारत के सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण और शायरी –  दोस्तों आज हम आपको  Thoughtking  पर सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण बताने वाले है जो भारत की आजादी के उपलक्ष्य में देश के प्रधानमंत्री के द्वारा दिया जाता है, मित्रो आजादी के उपलक्ष्य में सिर्फ देश के प्रधानमंत्री ही नहीं देश का हर वो नेता जो झण्डावंदन करता है वो इस दिन भाषण देता है और इसके साथ हम इस पोस्ट में 15 अगस्त पर कुछ शायरिया भी देखेंगे जिन्हे पड़ कर आपके मन में और अधिक देश प्रेम जगेगा तो में यह चाहता हु आप इस पोस्ट को बहुत ध्यान से पड़े.

 

दोस्तों आप तो जानते ही हो की हिंदुस्तान में भाषण का बहुत महत्व है और हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है यहा हर महीने कही ना कही चुनाव होते ही रहते है. और हर चुनावो में एक बात बहुत आम रहती है और वो होती है, भाषण दोस्तों भासन का अर्थ क्या होता है भासन का अर्थ होता है हमारी बात अन्य लोगो को समझाना और इस भाषा में समझाना जो उनको आसानी से समझ भी आसके ऐसा भी नहीं होता की सुनने वाले हिन्दी समझने वाले है

और आप उनको इंग्लिश में भाषण देते है. तो ऐसा नहीं होता भाषण वो होता है जो उसे सुनते है. वो सुनाने वाले के दीवाने हो जाये अच्छा वक्ता वो होता है जो अपने भाषण  के द्वारा लोगो को लुभा सके और आप भी कई सारे नेतावो के भासन सुनते होंगे पर आप किसी एक को ही पसंद करते होंगे जिसका भाषण आपको पसंद आता है.

 

और दोस्तों उसी तरह हमारे देश भारत में भी हर वर्ष 15 अगस्त पर दिल्ली के लाल किले से देश के प्रधानमंत्री भाषण देते है, और वहा पर वो देश को सम्बोधित करते है. और देश की जनता को सरकार के पिछले वर्ष के किये हुए काम और आगे आने वाले कामो को बताते है प्रधानमंत्री अपनी सरकार की उपलब्धियां पुरे देश को बताते है. दोस्तों इस भाषण का बहुत महत्व होता है, इसको देश का हर इंसान सुनता है.

और लाल किले पर भी सरकार और विपक्षी के सब नेता बैठते है, और पूरा भाषण सुनते है. मित्रो भारत की आजादी को लगभग 70 साल हो चुके है. पर लालकिला आज भी उसकी जगह पर स्थाई है, आजादी के बाद अभीतक भारत के कई प्रधानमंत्री बदल गए है, पर लालकिला आज भी अपनी जगह है और हर समय की गवाही देता है.

 

दोस्तों अब में आपके लिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री “श्री जवाहरलाल नेहरू” का वो भाषण पेश करने जा रहा हु, जो स्वतंत्रता के बाद प्रथम भाषण था. आपको यह भाषण पढ़ कर बहुत अच्छा लगेगा.

 

भारत के सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण और शायरी”

 

दोस्तों जवाहरलाल नेहरू का यह भाष 14 अगस्त, 1947  को मध्यरात्रि को दी गयी उनकी Famous  Speech  “TRYST  WITH  DESTINY” को हम हिंदी  में Share  कर रहे है. दोस्तों यह प्रसिद्ध भाषण जवाहरलाल नेहरू ने Indias’s Constituent  Assembly (Precursor to Parliament) को संबोधित करते हुए दिया था.

 

जवाहरलाल नेहरू : –

 

हमने नियति को मिलने का वचन दिया था, और अब समय आगया है की हम अपने वचन को निभाएं, पूरी तरह ना सही, लेकिन बहुत हद तक. आज रात बारह बजे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नई सुबहे के साथ उठेगा. एक ऐसा छन जो इतिहास में बहुत ही कम आता है. जब हम पुराने को छोड़ नए की तरह जाते है, तब एक युग का अंत होता है, और जब वर्षो से शोषित एक देश की आत्मा, अपनी बात कह सकती है. ये नए संयोग है, की इस पवित्र मोके पर हम समर्पण के साथ खुद को भारत की और उसकी जनता की सेवा, और उससे भी बढ़ कर सारी मानवता की सेवा करने के लिए प्रतिज्ञा ले रहे है.

 

इतिहास के आरम्भ के साथ ही भारत ने अपनी अंतहीन खोज प्रारम्भ की, और ना जाने कितनी ही सदियाँ इसकी भव्य सफलतावो और असफ़लतावो से भरी हुई है. चाहे अच्छा वक्त हो या बुरा , भारत ने कभी इस इस खोज से अपनी दृष्टि नहीं हटाई और कभी भी अपने उन आदर्शो को नहीं भुला जिसने इसे शक्ति दी. आज हम दुर्भाग्य से एक युग का अंत कर रहे है और भारत पुनः खुद को खोज पा रहा है. आज हम जिस उपलब्धि का उत्स्व मना रहे है. वो महज एक कदम है, नए अवसरों के खुलने का, इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही है. क्या हममे इतनी शक्ति और बुद्धिमत्ता है, की हम इस अवसर को समझे और भविष्य की चुनोतियो को स्वीकार करे.

 

भविष्य में हमे विश्राम करना या चेन से नहीं बैठना है, बल्कि निरंतर प्रयास करना है ताकि हम जो वचन बार – बार दोहराते रहे है. और जिसे हम आज भी दोहरायेगे उसे हम पूरा कर सके. भारत की सेवा का अर्थ है, लाखो – करोड़ो पंडित लोगो की सेवा करना. इसका मतलब है गरीबी और अज्ञानता को मिटाना, बीमारियों और अवसर की असमानता को मिटाना. हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति  की यही महत्वकांशा रही है, की हर एक आंख से आंसू मिट जाये. शायद ये हमारे लिए सम्भव नो हो पर जब तक लोगो की आँखों में आंसू है. और वे पीड़ित है, तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा.

 

और इसी लिए हमे परिश्रम करना है, और कठिन परिश्रम करना होगा ताकि हम अपने सपनो को साकार कर सके. वो सपने भारत के लिए है, पर साथ ही वो पुरे विश्व के लिए भी है, आज कोई खुद को बिलकुल अलग नहीं सोच सकता क्योकि सभी राष्ट्र और लोग एक दूसरे से बड़ी समीपता से जुड़े हुए है.  शांति और अविभाज्य खा गया है, इसी तरह से स्वतंत्रता भी अविभाज्य है, समृद्धि भी और विनाश भी, अब इस दुनिया को छोटे – छोटे हिस्सों में नहीं बाटा जा सकता है . हमे स्वतंत्र भारत का महान निर्माण करना है जहा उसके सारे बच्चे रह सके.

 

आज नियत समय आ गया है, एक ऐसा दिन जिसे नियति ने तय किया था – और एक बार फिर वर्षो के संघर्ष के बाद, भारत जाग्रत और स्वतंत्र खड़ा है. कुछ हद तक अभी भी हमारा भूत हमसे चिपका हुवा है, और हम अक्सर जो वचन लेते रहे  है. उसे निभाने से पहले कुछ करना है. पर फिर भी निर्णायक बिंदु अतीत हो चूका है., और हमारे लिए एक नया इतिहास आरम्भ हो चूका है, एक ऐसा इतिहास जिसे हम गड़ेंगे और और जिसके बारे में और लोग लिखेंगे.

 

ये हमारे लिए एक सौभाग्य का छण है, एक नए तारे का उदय हुवा है, पूरब में स्वतंत्रता का सितारा, एक नई आशा का जन्म हुवा है, एक दूरदृष्टिता अस्तित्व में आयी है. काश के तारा कभी अस्त ना हो और ये आशा कभी धूमिल न हो. हम सदा इस स्वतंत्रता में आनंदित रहे.

भविष्य हमे बुला रहा है. हमे किधर जाना चाहिए और हमारे क्या प्रयास होने चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानो और कामगारों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सके, हम गरीबी, अज्ञानता और बीमारियों  से लड़ सके, हम एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश का निर्माण कर सके, और हम ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओ की स्थापना कर सके जो हर आदमी – औरत के लिए जीवन की परिपूर्णिता और न्याय सुनिश्चित कर सके.

 

हमे कठिन परिश्रम करना है. हम में से कोई तब तक भी चैन से नहीं बैठ सकता जब तक हम अपने वचन को पूरी तरह निभा नहीं देते, जब तक हम भारत के सभी लोगो को उस गंतव्य तक नहीं पूछा देते जहा भाग्य उन्हें पहुँचना चाहता है.

 

हम सभी एक महान देश के नागरिक है, जो तीव्र विकास  की कगार पर है, और हमे उस उच्च स्तर को पाना होगा. हम सभी चाहे जिस धर्म के हो, समान रूप से भारत माँ की संतान है, और हम सभी के बराबर अधिकार और दायित्व है. हम और संकीर्ण सोच को बढ़ावा नहीं दे सकते, क्योकि कोई भी देशभक्त तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगो की सोच या कर्म संकीर्ण नहीं है.

 

विश्व के देशो को और लोगो को शुभकामनाएं भेजिए और उनके साथ मिलकर शांति, स्वतंत्रता और लोकतंत्र को बढ़ावा देने की प्रतिज्ञा लीजिये. और हम अपनी प्यारी मातृभूमि, प्राचीन, शाश्वत और निरंतर नवीन भारत को श्रध्दांजलि अर्पित करते है और एक जुट होकर नए सिरे से इसकी सेवा करते है….जय हिन्द

तो दोस्तों यह था भारत की स्वतंत्रता के बाद ” पंडित जवाहरलाल नेहरू ” का पहला भाषण  मुझे लगता है यह भाषण आपको बहुत अच्छा लगेगा और आप इसमें अपने देश के प्रति जो बाते बताई गयी है, उनको जरूर अमल करेंगे और अपने देश के प्रति सच्ची निष्ठा और देश प्रेम का अर्थ सार्थक करेंगे.

 

दोस्तों अब हम इस post  में 15 अगस्त सवतंत्रता दिवस के ऊपर कुछ शायरिया बताने जारहे है जो आपको बहुत पसद आएगी.

 

सवतंत्रता दिवस शायरिया : –

 

अनेकता में एकता ही, भारत की शान है.

इसलिए मेरा भारत महान है.

 

कहते है अलविदा अब हम इस जमाने को , जाकर खुदा के घर से अब आया न जायेगा.

हमने लगाई आग है जो इंकलाब की , इस आग को किसी से बुझाया न जायेगा.

 

खुशनसीब होते है, वो लोग जो इस देश पर कुर्बान होते है,

जान देकर भी वो लोग अमर हो जाते है,

करते है सलाम उन देश प्रेमियों को , जिनके कारण इस तिरंगे का मान होता है.

 

ये नफरत बुरी है न पालो इसे , दिलो में खलील है निकालो इसे.

न तेरा न मेरा न इसका न उसका ये सब का वतन है बचालो इसको.

 

मेरे जज्बातो से इस कदर वाकिफ है कलम मेरी.

में इश्क भी लिखना चाहता हु, तो इंकलाब लिखा जाता है.

 

मै भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हु,

यहाँ की चांदनी मिटटी का भी गुणगान करता हु,

मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,

तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हु.

 

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,

हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे

हम मिल जल कर रहे ऐसे की

मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे

 

मुकम्मल है इबारत और में वतन ईमान रखता हु,

वतन के शान के खातिर हथेली पर जान रखता हु,

क्यों पड़ते हो मेरी आँखों से नक्शा पाकिस्तान का ,

मुसलमान हु में सच्चा , दिल में हिंदुस्तान रखता हु.

 

जमाने भर में मिलते है आशिक कई,

मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,

नोटों में भी लिपटकर , सोने में सिमटकर मरे हे कई,

मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता.

 

ना हिन्दू बनकर देखो , ना मुस्लिम बनकर देखो.

बेटो की इस लड़ाई में , दुःख भरी भारत माँ को देखो.

 

छोडो कल की बाते कल की बात पुरानी

नए दौर मि लिक्खेगे हम मिलकर नई कहानी हम हिंदुस्तानी.

 

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,

हम लहराएंगे हर जगह यह तिरंगा,

नशा ये हिंदुस्तान की शान का है..

 

दे सलामी इस तिरंगे को जिससे शान है तेरी,

सर हमेशा ऊचा रखना इसका जब तक दिल में जान है तेरी.

 

वो शमा जो काम आये अंजुमन के लिए,

वो जज्बा जो कुर्बान हो जाये वतन के लिए,

रखते है हम वो हौसले भी जो मर मिठे हिंदुस्तान के लिए,

रखते है हम वो हौसले भी जो मर मिठे हिंदुस्तान के लिए,

 

वतन हमारा मिसाल महोबत्त की

तोड़ता है दीवार नफरत की,

मेरी खुश नसीबी मिली जिंदगी इस चमन में,

भुला ना सके कोई इसकी खुशबु सतो जन्म में..

 

मेरे देश का मान हमेशा बनाये रखुगा

दिल तो क्या जान भी इस पर न्योछावर करुगा

अगर मिले मौका देश के काम आने का

तो बिना कफ़न ही देश के लिए सो जाऊंगा.

 

चलो फिर से खुद को जगाते है

अनुशासन का डंडा फिर घुमाते है

सुनहरा रंग है गणतंण स्वतंत्रता का

शहीदो के लहू से ऐसे शहीदो को हम सब सर झुकाते है..

 

क्यों मरते हो यारो सनम के लिए

ना देगी दुपट्टा कफ़न के लिए

मरना है तो मरो वतन के लिए

तिरंगा तो मिलेगा कफ़न के लिए..

 

न मरो सनम बेवफा के लिए,

दो गज जमीन नहीं मिलेगी दफन होने के लिए,

मरना है तो मरो वतन के लिए,

हसीना भी दुपट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए.

जय हिन्द जय भारत ..

 

तो दोस्तों यह थी भारत की आजादी दिवस स्वतंत्रता दिवस के ऊपर कुछ शायरिया मुझे लगता है आपको यह बहुत अच्छी लगी होगी और ये शायरिया आपके दिलो में देश के लिए और जोश भर देंगी.

तो दोस्तों यह थी post  ” भारत के सवतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भाषण और शायरी ” आप को यह पोस्ट कैसी लगी pliz हमे अपने comments  के मध्य से हमे जरूर बताये और आप हमेशा अपने देश से प्यार करे और उसकी इज्जत करे इसी के साथ भारत माता की जय/जय हिन्द.

 

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