महान समाजसेवी बाबा आमटे की जीवनी और विचार

महान समाजसेवी बाबा आमटे की जीवनी – दोस्तों इस दुनिया में ऐसे कितने लोग होते है जो अपने लिए नहीं बल्कि दुसरो के लिए जीते है, ऐसे लोगो के लिए जीते है जिन्हे समाज ने निष्काषित कर दिया हो मुझे लगता है दुनिया में ऐसे चंद लोग ही होंगे. और उन लोगो में एक नाम है – बाबा आमटे जिन्होंने अपना पूरा जीवन ऐसे लोगो के जीवन को सुधारने में लगा दिया जिन्हे समाज ने ठुकरा दिया था. मित्रो आप के सामने यदि कोई कुष्ट रोगी आजाये तो आप क्या करेंगे मुझे नहीं लगता आज के दौर का कोई व्यक्ति ऐसे लोगो से हाथ मिलाने की भी कोशिश करेगा मगर बाबा आमटे ने कुष्ठ रोगियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए अपना पूरा जीवन बिता दिया और आज उनके इस दुनिया से जाने के बाद भी उनका कार्य उनकी संस्था द्वारा आगे बढ़ाया जारहा है, तो Friends आज की post में हम बाबा आमटे के जीवन के बारे में सम्पूर्ण जानकारिया देखेंगे जिससे हमे उनको जानने में और अधिक सहायता मिलेगी. महान समाजसेवी बाबा आमटे की जीवनी

बाबा आमटे का जीवन परिचय –

दोस्तों बाबा का पूरा नाम है “मुरलीधर देवीदास आमटे” उनका जन्म 26 दिसंबर 1914 में हिंगनघाट, ब्रिटिश भारत (वर्तमान में महाराष्ट्र) में हुवा था. उनके पिता का नाम देवीदास आमटे और उनकी माता का नाम लक्ष्मीबाई आमटे था, उनका परिवार धनी था, उनके पिता ब्रिटिश गवर्मेंट ऑफिसर थे. बाबा आमटे की मृत्यु 9 फरवरी 2008 में 94  वर्ष की उम्र में हुई, बाबा आमटे भारत के प्रमुख व सम्मानित समाजसेवी थे.

परित्यक्त लोगो और कुष्ठ रोगियों के लिए उन्होंने अनेक आश्रमों और समुदायों की स्थापना की, इनमे चंद्रपुर, महाराष्ट्र स्तिथ आनंदवन का नाम प्रसिद्ध है. और मित्रो इसके अतिरिक्त बाबा आमटे ने अनेक सामाजिक कार्यो, जिनमे वन्य जीवन संरक्षण तथा नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख है, के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. और 9 फरवरी 2008  को बाबा का 94 वर्ष की आयु में चंद्रपुर जिले के वड़ोरा स्तिथ अपने निवास में निधन हो गया.

समाजसेवी बाबा आमटे द्वारा किये गए महान कार्य –

दोस्तों कानून विषय पर उन्होंने वर्धा में खास अभ्यास कर रखा था, इस लिए जल्द ही वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हो गए और भारत को ब्रिटिश राज से मुक्ति दिलाने में लग गए और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के लिए वे बचाव पक्ष के वकील का काम करते थे.

दोस्तों 1942 के भारत छोडो आंदोलन में जिन भारतीय नेताओ को ब्रिटिश सरकार ने कारावास में डाला था. और उन सभी नेताओ का बचाव बाबा आमटे ने किया था. और फिर इसके बाद थोड़ा समय उन्होंने महात्मा गाँधी के सेवाग्राम आश्रम में बिताया और गाँधीवादी के अनुयायी बने रहे. इसके बाद वे जीवन भर महात्मा गाँधी के आदर्शो पर चलते रहे, जिसमे चरखे से उन की कटाई करना और खादी कपड़े पहनना भी शामिल है, जब गाँधी जी को पता चला की आमटे ने ब्रिटिश सेनिको से एक लड़की की जान बचाई है तो गाँधीजी ने आमटे को “अभी साधक” का नाम दिया.

दोस्तों उन दिनों कुष्ट रोग समाज में बहुत तेजी से फेल रहा था, और बहोत से लोग इस बीमारी से जूझ रहे थे. लोगो में ऐसी गलतफ़हमी भी फेल गयी थी, की यह बीमारी जानलेवा है. लेकिन आमटे ने लोगो की इस गलतफ़हमी को दूर किया और कुष्ट रोग से प्रभावित मरीजों के इलाज की उन्होंने काफी कोशिशे भी की, बल्कि ये भी कहा जाता था. की कुष्ट रोग से ग्रसित मरीज के सम्पर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति में भी यह बीमारी फेल सकती है लेकिन फिर भी इन सभी बातो पर ध्यान न देते हुए उन्होंने हमेशा कुष्ट रोग से पीड़ित मरीजों की सेवा की और उन का इलाज भी करवाया.

बाबा आमटे ने गरीबो की सेवा और उनके सशक्तिकरण और उनके इलाज के लिए भारत के महाराष्ट्र में तीन आश्रम की स्थापना की, 15 अगस्त 1949 को उन्होंने आनंदवन में एक पेड़ के निचे अस्पताल की शुरुवात भी की, 1973 में आमटे ने गडचिरोली जिले के मदिया गॉड समुदाय की सहायता के लिए लोक बिरादरी प्रकल्प की स्थापना भी की थी.

बाबा आमटे ने अपने जीवन को बहुत से सामाजिक कार्यो में न्योछावर किया, इनमे मुख्य रूप से लोगो में सामाजिक एकता की भावना को जाग्रत करना, जानवरो का शिकार करने से लोगो को रोकना और नर्मदा बचाओ आंदोलन शामिल है. उनके कार्यो को देखते हुए 1971 में उन्हें पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया.

महान समाजसेवी बाबा आमटे की जीवनी”

बाबा आमटे के परिवार के सदस्यों का समर्पित कार्य –

बाबा आमटे का विवाह इंदु घुले (साधना आमटे) से हुआ था, उनकी पत्नी भी उनके साथ सामाजिक कार्यो में भाग लेती थी और कदम से कदम मिलाकर जनसेवा करती थी. उनके बेटे डॉ. विकास आमटे और डॉ. प्रकाश आमटे और बहु डॉ. मंदाकिनी और डॉ. भारती है, उनके घर के सभी सदस्य डॉक्टर है. इन चारो ने हमेशा सामाजिक कार्यो में अपना योगदान दिया और हमेशा वे अपने पिता के नक्शेकदम पर ही चलते रहे.

उनका बेटा डॉ. प्रकाश आमटे और उनकी पत्नी डॉ. मंदाकिनी आमटे महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के हेमलकसा ग्राम में मदिया गॉड समुदाय के लोगो के लिए एक स्कूल और एक अस्पताल चलते थे. प्रकाश आमटे से विवाह करने के बाद मंदाकिनी आमटे ने गवर्मेंट मेडिकल जॉब छोड़ दिया और अस्पताल और स्कूल चलाने के लिए हेमलकसा चली गयी थी और साथ ही जंगलो में घायल हुए जानवरो का इलाज भी करती थी.

उनके दो बेटे है, पहला बेटा दिंगत, डॉक्टर है और दूसरा बेटा अनिकेत एक इंजीनियर है. इन दोनों ने भी कई सामाजिक कार्य किये है. 2008  में प्रकाश और मंदाकिनी के सामाजिक कार्यो को देखते हुए उन्हें मेगसेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

बाबा आमटे का बेटा विकास आमटे और उनकी पत्नी भारती आमटे आनंदवन में एक अस्पताल चलाते है और कई ऑपरेशन भी करते है.

मित्रो वर्तमान में आनंदवन और हेमलकसा ग्राम में एक – एक ही अस्पताल है, आनंदवन में एक यनिवर्सिटी, एक अनाथाश्रम और अन्धो और गरीबो के लिए एक स्कूल भी है. आज सव-संचालित आनंदवन आश्रम में तकरीबन 5000 लोग रहते है. महाराष्ट्र के आनंदवन का सामाजिक विकास प्रोजेक्ट आज पुरे विश्व तक पहुंच चूका है, आनंदवन के बाद आमटे ने कुष्ट रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए सोमनाथ और अशोकवन आश्रम की भी स्थापना की थी.

समाजसेवी बाबा आमटे को मिलने वाले अवार्ड –

मित्रो जैसा की आप सब जानते हो जो लोग अपना जीवन दुसरो के लिए जीते है, दुसरो की सेवा करते है, उन्हें हर व्यक्ति प्यार करता है. और जहातक हम बाबा आम्टे की बात करे तो उन्हें भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों द्वारा कई अवार्ड दिए गए जो उनके कार्यो को प्रोत्साहित करते है तो अब हम उनको मिले पुरस्कारों को देखते है.

  • पद्मश्री – 1971 में मिला
  • रमन मेगसेसे अवार्ड – 1985 में मिला
  • पदम् विभूषण – 1986 में मिला
  • मानव अधिकार के क्षेत्र में अतुल्य योगदान के लिए यूनाइटेड नेशन प्राइज, 1988 में मिला
  • गाँधी शांति पुरस्कार – 1999 में मिला
  • राष्ट्रीय भूषण अवार्ड – 1978 में मिला , FIE फॉउंडेशन इंचलकरंजी (भारत)
  • जमनालाल बजाज अवार्ड – 1979 में मिला
  • ऐन. डी. दिवान अवार्ड जो उन्हें 1980 में मिला : NASEOH, मुंबई
  • रामशात्री अवार्ड – 1983 में : रामशात्री प्रभुने संस्था, महाराष्ट्र भारत द्वारा
  • इंदिरा गाँधी मेमोरियल वार्ड – 1985 : सामाजिक कार्यो को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें दिया गया.
  • राजा राम मोहन राय अवार्ड – 1986 : दिल्ली में मिला
  • फ़्रांसिसी मशीचो प्लेटिनम जुबली अवार्ड – 1987 में मिला
  • जी. डी. बिरला इंटरनेशनल अवार्ड – 1987 : में मानवता के विकास में योगदान के लिए उन्हें दिया गया.
  • टेम्पलटन प्राइज – 1990 (बाबा आम्टे और चाल्स बर्च को संयुक्त रूप से यह अवार्ड दिया गया)
  • महादेव बलवंत वतु पुरस्कार – 1991 में, पुणे महाराष्ट्र में उन्हें दिया गया.
  • आदिवासी सेवक अवार्ड – 1991, में भारत सरकार के द्वारा दिया गया
  • कुसुमाग्रज पुरस्कार – 1991 में मिला
  • डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर दलित मित्र अवार्ड – जो उन्हें भारत सरकार के द्वारा 1992 में दिया गया.
  • श्री नेमीचंद श्रीश्रीमल अवार्ड – 1994  में मिला
  • फ्रांसिस टोंग मेमोरियल अवार्ड – 1995, में वॉलंटरी हेल्थ असोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दिया गया
  • कुष्ट मित्र पुरस्कार – 1995, में विदर्भ महायोगी सेवा मंडल, अमरावती, महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिया गया
  • भाई कन्हैया पुरस्कार – 1997, श्री गुरु हरिकृष्ण शिक्षण संस्था, भटिंडा, पंजाब
  • मानव सेवा अवार्ड – 1997, में यंग में गांधियन एसोसियेशन, राजकोट, गुजरात सरकार द्वारा दिया गया
  • सारथि अवार्ड – 1997, में नागपुर, महाराष्ट्र
  • महात्मा गाँधी चेरिटेबल ट्रस्ट अवार्ड, 1997, में नागपुर, महाराष्ट्र
  • गृहणी सखी सचिव पुरस्कार – 1997, में गढीमा प्रतिष्टान, महाराष्ट्र
  • कुमार गंधर्व पुरस्कार – 1998 में मिला
  • अपंग मित्र पुरस्कार – 1998 में मिला जो अपंगो के सहायक, कोल्हापुर, महाराष्ट्र
  • भगवान महावीर मेहता अवार्ड – 1998, में ,मुंबई में मिला
  • दीवालीबेन मोहनलाल मेहता अवार्ड – 1998 मुंबई में मिला
  • जस्टिस के. एस. हेगड़े फाउंडेशन अवार्ड – 1998, कर्नाटक
  • बया कर्वे अवार्ड – 1998, पुणे महाराष्ट्र में उन्हें दिया गया
  • सावित्रीबाई फुले अवार्ड – 1998, भारत सरकार द्वारा
  • फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री अवार्ड – 1988  , FICCI  के द्वारा  
  • सतपुल मित्तल अवार्ड – 1998, में नेहरू सिद्धांत केंद्र ट्रस्ट, लुधियाना पंजाब
  • आदिवासी सेवक पुरस्कार – 1998, महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिया गया
  • गाँधी पुरस्कार – 1999 में मिला
  • डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल अवार्ड  for social change, 1999  में मिला 
  • महाराष्ट्र भूषण अवार्ड – 2004 , में महाराष्ट्र सरकार के द्वारा दिया गया
  • भारतवासा अवार्ड – 2008

बाबा आम्टे को मिलने  वाली सम्मानित पदवी –

  • डी. लिट, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई, भारत
  • डी. लिट, 1980 : नागपुर युनिवेर्सिटी, नागपुर, भारत
  • कृषि रत्न, 1981  : सम्मानित डायरेक्टर, पक्व कृषि युनिवेर्सिटी, अकोला, महाराष्ट्र, भारत
  • डी. लिट, 1985-86  : पुणे युनिवेर्सिटी, भारत
  • देसिकोत्तमा, 1988 : सम्मानीय डायरेक्ट, विश्व-भारती उनिवेर्सित्य्म शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल, भारत
  • महात्मा गाँधी ने बाबा आम्टे को अभी साधक का नाम दिया था.

मेघा पाटकर के साथ मिलकर बाबा आमटे का नर्मदा बचाओ आंदोलन –

मित्रो बाबा आमटे ने 1991 में मेघा पाटकर के साथ मिलकर नर्मदा बचाओ आंदोलन करने के लिए उन्होंने आनंदवन छोड़ दिया, जिसमे नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध बनाने के लिए वे संघर्ष कर रहे थे, स्थानीय लोगो द्वारा नर्मदा नदी के तट पर की जा रही गंदगी को रोकने की कोशिश कर रहे थे.

महान समाजसेवी बाबा आमटे के अनमोल विचार –

1.  ख़ुशी एक सतत रचनात्मक गतिविधि है.

2. आनंद कुष्ट रोग से कहि अधिक संक्रामक है, जो बहुत तेजी से फैसला है.

3. यदि आप सपने में ही जीते रहे तो यह आपके प्रगति के रुकावट का कारण बनता है.

4. भविष्य साधारण लोगो के असाधारण दृढ़ संकल्प से संबंधित है.

5. महान नेता बनने से कहि अच्छा है, जरुरतमंदो की सहायता करना, जो मैं करना चाहता हु.

6. खुशियों का अंत हो जाता है, जब इसे लोगो के बिच में साझा नहीं किया जाये.

7. मैने कुष्ट रोग को खत्म करने के लिए किसी की मदद नहीं की बल्कि लोगो के बिच में इस रोग से पैदा हुए डर को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया.

8. एक कुशल कप्तान कभी भी डूबते हुए जहाज का साथ नहीं छोड़ छोड़ता है, ऐसे देश को भी डूबने से बचाने के लिए बहादुर नाविकों को उभरने चाहिए.

9. आप कभी भी गुफा में मृत शेर नहीं देखते है, न ही घोसलो में मृत पक्षी को देखते है तो आप मुझसे क्या चाहते है, मैं वही मिलता हु, जहा जिंदादिल लोग रहते है.

10. जीवन जीने के लिए हमेशा कुछ नया सीखते रहना चाइये.

11. कार्य महान बनाता है जबकि दान पाने से लोग अकर्मण्य हो जाते है, इसलिए लोगो को दान नहीं कुछ करने का मौका दीजिये.

12. कोई भी बिना एक ऊँगली के रह सकता है लेकिन बिना आत्मसम्मान के जीना व्यर्थ है.

13. सबसे पहले आपको अपने दिल में भाला लेना है, यानि खुद को इतना कठोर बनाना है की कठिनाइयों का डटकर सामना करे तभी आप अपने सर पर सफलता का मुकुट पहन सकते है.

14. परोपकार सबसे बड़ा धर्म है.

15. हमारा जीवन सिर्फ हमारे लिए नहीं है, हमे हमारा जीवन लोगो के लिए ततपर रखना है.

तो मित्रो यह थी पोस्ट “महान समाजसेवी बाबा आमटे की जीवनी” मुझे लगता है आप इस पोस्ट को पढ़कर समाजसेवी बाबा आमटे के जीवन के बारे में बहुत कुछ जाने होंगे, और मेरा भी यह मानना है की हमे भी बाबा आमटे की तरह ही जीवन जीना चाहिए हमे भी अपने जीवन में ज्यादा नहीं तो थोड़ा समय ही ऐसे लोगो के लिए बिताना चाहिए, जो असहाय है जिन्हे हमारी मदद की जरूरत है परोपकार से इंसान को बहुत सुख मिलता है हमे अपने काम से कुछ समय निकाल कर अन्य लोगो की सेवा में अपना थोड़ा समय बिताना चाहिए.

तो दोस्तों यह पोस्ट आपको कैसी लगी प्लीज़ हमे बताये और मेरे द्वारा बाबा आमटे के जीवन पर लिखी गयी इस पोस्ट में कुछ गलती हो तो अपने Comments के माध्यम से जरूर बताये.

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