एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स बायोग्राफी इन हिन्दी

एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स बायोग्राफी इन हिन्दी

एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स बायोग्राफी इन हिन्दी – दोस्तों स्टीव जॉब्स एक ऐसी शख्सियत है जिसने अपनी मेहनत से दुनिया में अपना नाम कमाया और वो भी ऐसा की सदियों तक लोग उन्हें याद करेंगे दोस्तों उनकी लाइफ बहुत उतार चढ़ाव भरी थी. उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ पाया और बहुत कुछ खोया तब जाकर उन्हें यह मुकाम हासिल हुवा और  तब जाकर कहि उनको सफलता मिली तो आज इस पोस्ट में हम एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स के सम्पूर्ण जीवन के बारे में देखेंगे और उनके जीवन से हम भी प्रेरणा लेगे और उनके जैसे काम करने की कोशिश करेंगे.

संछिप्त में

स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को हुवा था. एक अमेरिकी बिज़नेस टाइकून  और अविष्कारक थे. वे एप्पल इंक के सह – संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे. अगस्त 2011  में उन्होंने इस पद से अपना इस्तीफा दे दिया. स्टीव जॉब्स पिक्सर एनिमेशन स्टूडियोज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे. और सन 2006 में वह दी वाल्ट डिज्नी कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्य भी रहे, जिसके बाद डिज्नी ने पिक्सल का अधिग्रहण कर लिया. 1995 में आई फिल्म टॉय स्टोरी में उन्होंने बतौर कार्यकारी निर्माता काम किया.

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जीवन परिचय –

दोस्तों कंप्यूटर,लेपटॉप और  mobile phone  बनाने वाली एप्पल कंपनी के भूतपूर्व सीईओ और जाने – माने अमेरिकी उद्योगपति स्टीव जॉब्स ने संघर्ष करके अपने जीवन में यह मुकाम हासिल किया केलिफोर्निया के सेन फ्रांसिस्को में पैदा हुए स्टीव को पाउल और कालरा जॉब्स ने उनकी माँ से गोद लिया था.

स्टीव जॉब्स ने केलिफोर्निया में ही पढ़ाई की उस समय उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे. और वो अपनी इस आर्थिक परेशानी को दूर करने के लिए गर्मियों की छुट्टियों में काम किया करते थे. 1972 में जॉब्स ने पोर्टलैंड के रीड कालेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान उनको अपने दोस्त के कमरे में जमीन पर सोना पढ़ा.

वे कोक की बोतल बेचकर खाने के लिए पैसे जुटाते थे. और वो पास ही के कृष्ण मंदिर में जहा सप्ताह में एक बार भोजन मिलता था. स्टीव वहा भोजन करते थे. जॉब्स के पास करीब 5.1 अरब डॉलर की सम्पत्ति थी और वे अमेरिका के 43 वे सबसे धनी व्यक्ति थे. स्टीव जॉब्स ने आध्यात्मिक ज्ञान के लिए भारत की यात्रा की और बौद्ध धर्म को अपनाया. स्टीव जॉब्स ने 1991 में लोरेन पॉवेल से शादी की थी. और उनका एक बेटा है.

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स्टीव जॉब्स द्वारा किये गए व्यवसाय –

प्रारम्भिक कार्य

सन 1973 में स्टीव जॉब्स अटारी में तकनीशियन के रूप में कार्य करते थे. वहा लोग उन्हें “मुश्किल है लेकिन मूलयवान ” कहते थे. मध्य 1974 , में आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में जॉब्स अपने कुछ रीड कालेज के मित्रो के साथ करोली बाबा से मिलने भारत आए. किन्तु जब वे करोली के आश्रम पहुंचे तो उन्हें पता चला की उनकी मृत्यु सितम्बर 1973 को चुकी थी. उस के बाद उन्होंने हेड़खन  बाबाजी से मिलने का निर्णय लिया. जिसके कारण भारत में उन्होंने काफी समय दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में बिताया.

सात महीने भारत में रहने के बाद वे वापस अमेरिका चले गए. उन्होंने अपनी उपस्तिथि बदल डाली, उन्होंने अपना सर मुंडवा दिया और पारम्परिक भारतीय वस्त्र पहनने शुरू कर दिए साथ ही वे जैन, बौद्ध धर्मो के गंभीर व्यवसायी भी बन गए. सन 1976  में स्टीव जॉब्स और वोजनियाक ने अपने स्वयं के व्यवसाय का गठन किया, जिसका नाम उन्होंने “एप्पल कंप्यूटर कंपनी” रखा. शुरुवात में तो वो सिर्फ सर्किट बोर्ड बेचा करते थे.

एप्पल कंप्यूटर की शुरुवात –

सन 1976 में स्टीव जॉब्स वोजनियाक ने मेकिनटोश एप्पल 1 कंप्यूटर का अविष्कार किया. जब वोजनियाक ने यह जॉब को दिखाया तो जॉब ने इसे बेचने का सुझाव दिया, इसे बेचने के लिए वे और वोजनियाक गैरेज में एप्पल कंप्यूटर का निर्माण करने लगे. इस कार्य को पूरा करने के लिए उन्होंने अर्ध्य सेवानिवृत्त इंटेल उत्पाद  विपणन प्रबंधन और इंजीनियरिंग माइक मारककुल्ला से धन प्राप्त किया.

सन 1978  में नेशनल सेमीकंडक्टर से माइक स्कॉट को एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में भर्ती किया गया था. सन 1983 में जॉब्स ने लालची जान स्कली को पेप्सी कोला को छोड़ कर एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम करने के लिए पूछा, ” क्या आप अपनी बाकि जिंदगी शुगर पानी बेचने में खर्च करना चाहते है, या आप दुनिया को बदलने का एक मौका चाहते है?”

10 अप्रेल 1985  और 11 , को बोर्ड की बैठक के दौरान एप्पल के बोर्ड के निदेशकों ने स्कली के कहने पर स्टीव जॉब्स को अध्यक्ष्य पद को छोड़कर उसकी सभी भूमिकाओं से हटाने का अधिकार दे दिया. परंतु जान ने यह फैसला कुछ देर के लिए रोक दिया. मई 24  1985  के दिन मामले को हल करने के लिए एक बोर्ड की बैठक हुई, इस बैठक में जॉब्स को मेकिनटोश  प्रभार के प्रमुख के रूप में और उसके प्रबंधकीय कर्तव्यों से हटा दिया गया.

नेल्सन कंप्यूटर –

एप्पल से इस्तीफा देने के बाद, स्टीव जॉब्स ने 1985 में नेक्स्ट की स्थापना की, नेक्स्ट कार्य केंद्र अपनी तकनीकी ताकत के लिए जाना जाता था. उनके उद्देश्य उन्मुख सॉफ्टवेर विकास प्रणाली बनाना था. टीम बर्नर्स ली ने एक नेक्स्ट कंप्यूटर पर वर्ड वाइड वेब का अविष्कार किया था. एक साल के अंदर पूँजी की कमी के कारण उन्होंने रॉस पेरोट के साथ साझेदारी बनाई और पेरोट ने नेक्स्ट में अपनी पूँजी का निवेश किया. सन 1990 में नेक्स्ट ने अपना पहला कंप्यूटर बाजार में उतारा जिस की कीमत 9999 डॉलर थी. पर इस कंप्यूटर को महंगा होने के कारण बाजार में स्वीकार नहीं किया गया. फिर उसी साल नेक्स्ट ने नया उन्नत ‘इंटर पर्स्नल’ कंप्यूटर बनाया.

स्टीव जॉब्स की एप्पल में वापसी –

सन 1996  में एप्पल की बाजार में हालत बिगड़ गयी तब स्टीव, नेक्स्ट कंप्यूटर को एप्पल को बेचने के बाद वे एप्पल के चीफ एक्जीकेटिव ऑफिसर बन गए. सन 1997 से उन्होंने कंपनी में बतौर सीईओ काम किया, 1998 में आईमैक बाजार में आया जो बड़ा ही आकर्षक तथा अल्प पारदर्शी खोल वाला PC था, उनके नेतृत्व में एप्पल ने बड़ी सफलता प्राप्त की.

सन 2001 में एप्पल ने आई पेड़  का निर्माण किया. फिर सन 2001 में आई ट्यून्ज स्टोर का निर्माण किया गया. सन 2007 में एप्पल ने आई फोन नामक मोबाइल फ़ोन बनाये जो बड़े सफल रहे. 2010 में एप्पल ने आई पेड़ नामक टेबलेट कंप्यूटर बनाया. सन 2011 में उन्होंने सीईओ के पद से स्तीफा दे दिया. पर वे बोर्ड के अध्यक्ष बने रहे.

स्टीव जॉब्स का निजी जीवन –

स्टीव जॉब्स की एक बहन है जिन का नाम मोना सिम्प्सन है, उनके एक पुराने संबन्ध से 1978  में उनकी पहली बेटी का जन्म हुवा जिनका नाम लीजा ब्रेनन जॉब्स है. सन 1991 में उन्होंने लौरेन पावेल से शादी की, इस शादी से उनके तीन बच्चे हुए. एक लड़का और तीन लड़किया. लड़के का नाम रीड है जिसका जन्म सन 1991 में हुवा. उनकी बड़ी बेटी का नाम एरिन है जिस का जन्म सन 1995 में हुवा और छोटी बेटी का नाम ईव है जिसका जन्म सन 1998  में हुवा. वे संगीतकार दी बिटसन के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उन से बड़े प्रेरित हुए.

स्टीव का निधन –

सन 2003 में उन्हें पैनक्रियाटिक कैंसर की बीमारी हुई, उन्होंने इस बीमारी का इलाज ठीक से नहीं करवाया. जॉब्स की 5 अक्टूबर 2011 को 3  बजे के आसपास पालो अल्टो, केलिफोर्निया के घर में उनका निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार अक्टूबर 2011 को हुवा. उनके निधन के मोके पर माइक्रोसॉफ्ट और डिज्नी जैसी बड़ी – बड़ी कम्पनियो ने भी शोक मनाया. सारे अमेरिका में शोक मनाया गया. वे निधन के बाद अपनी पत्नी और तीन बच्चो को छोड़ गए, और दुनिया ने एक सितारा खो दिया.

तो दोस्तों देखा आपने एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी किस तरह उन्होंने जिंदगी की कठिनाइयों से लड़ कर सफलता हासिल करी किस तरह उन्हें उनकी ही कंपनी से निकाला जाता है, मगर वो कहते है ना की मन में कुछ करने की इक्छा शक्ति हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं इंसान अपनी कड़ी मेहनत और परिश्रम से हर काम कर सकता है हर मंजिल को छू सकता है.

तो दोस्तों यह थी पोस्ट “एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स बायोग्राफी इन हिन्दी” आपको यह पोस्ट कैसी लगी प्लीज़ हमे बताये और में समझता हु, की आप इस पोस्ट को पड़के स्टीव जॉब्स के जीवन से बहुत कुछ सीखेंगे और खुद भी अपने जीवन में सफलता हासिल करेंगे. और हम आगे भी आपके लिए ऐसी ज्ञानवर्धक बायोग्राफी लाते रहेंगे.

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