गणेश चतुर्थी पूजा और महत्व

गणेश चतुर्थी पूजा और महत्व – आप सब जानते ही है की श्री गणेश को विघ्न हर्ता और सुख करता माना जाता है और जो प्रथम पूज्य देव भी है हम जो भी कार्य शुरू करते है उसमे सबसे पहले गणेश जी को याद किया जाता है. जो गणेश जी की पूजा अर्चना करता है उससे विघ्न और दुःख दर्द दूर रहते है, गणेश चतुर्थी साल में एक बार आती है जिसमे गणपति भक्त बड़े ही धूम – धाम से बप्पा की पूजा अर्चना करते है और दस दिन तक अपना सब काम छोड़ कर प्रभु की सेवा में लग जाते है. गणेश चतुर्थी पूजा और महत्व और जैसा की गणेश जी को विघ्न हर्ता कहते है, वे जब दस दिन में विदा होते है तो अपने साथ अपने सारे दुःख दर्द भी ले जाते है. और अपने भक्तो पर कृपा बरसाकर जाते है. और वैसे तो गणपति जी की कृपा अपने भक्तो पर हमेशा ही बनी रहती है चाहे गणेश चतुर्थी वो या नहीं बस उसके लिए हमारा उन पर अटूट विश्वास और श्रद्धा होनी चाहिए जो भी  भक्त निस्वार्थ भाव से गणेश जी की साधना करते है उन भक्तो पर हमेशा बप्पा की कृपा दृष्टि बनी रहती है.

गणेश चतुर्थी क्या है –

दोस्तों चैत्र कृष्णपक्ष के चौथे दिन को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. कहते है जब चतुर्थी मंगलवार को पढ़ती है तो उसे अंगारी चतुर्थी कहा जाता है. और दोस्तों संकष्टी चतुर्थी संकटो को खत्म करने वाली चतुर्थी है. मित्रो आप तो जानते ही है की भारत त्योहारों का देश है और हमारे यहा साल भर त्यौहार चलते रहते है. और गणेश चतुर्थी उन्ही त्योहारों में से एक है जिसे 10  दिनों तक सभी भक्तो द्वारा बड़े ही धूम – धाम से मनाया जाता है. इस त्यौहार को गणेशोत्स्व या विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. और भारत देश में इसे बड़े ही धूम – धाम से मनाते है.

दोस्तों गणेशोत्स्व पर्व के दौरान भगवान गणेश जी के भक्त अपने घरो में उनकी मूर्ति की स्थापना करते है और 10 दिन बाद उस मूर्ति का विसर्जन करते है. और इन दस दिनों में रोज रात को लोग नाचते – गाते है. लड्डू और मोदक की प्रसाद बाटी जाती है. और मोदक गणपति को बहुत प्रिय होता है. किसी भी नए काम की शुरुवात करने से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है और हम ऐसा ही करते है सबसे पहले गणेश जी को पूजते है.

गणेश चतुर्थी पूजा और महत्व “

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व भद्रा महीने में आता है यानि के हर साल यह त्यौहार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है. गणेश चतुर्थी का त्यौहार 10  दिनों तक चलता है, कथा के माध्यम से ऐसा माना जाता है की विसर्जन के बाद गणेश जी अपने माता – पिता देवी पार्वती और महादेव के पास लोट जाते है. हर गणेश भक्त के लिए ये दस दिन बहुत महत्वपूर्ण रहते है सब भक्त इन दस दिनों में अपने – अपने हिसाब से भगवान की पूजा और उपवास करते है.

जानिए क्या है गणेश चतुर्थी का इतिहास और इसका महत्व –

गणेश चतुर्थी का यह शुभ त्यौहार महाराष्ट्र, गोवा, मध्यप्रदेश, केरल, और तमिलनाडु सहित कई राज्यों मे काफी जोश के साथ मनाया जाता है जिसमे महाराष्ट्र में तो इसके प्रति भक्तो में एक दीवानगी रहती है. इतना ही नहीं इस त्यौहार के साथ कई कहानिया भी जुडी हुई है जिनमे से उनके माता – पिता,  माता पार्वती और भगवान शिव के साथ जुडी उनकी कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है.

कहा जाता है की माता पार्वती ने अपने शरीर के मेल से भगवान गणेश का निर्माण किया था. एक बार माता पार्वती स्नान कर रही थी और उन्होंने गणेश को आदेश दिया जब तक वह स्नान करके ना लोट आए तब वह दरवाजे पर पहरा दे लेकिन तभी भगवान शिव वह आ गए और गणेश ने उनको अंदर आने से रोका.

और उसी दौरान बाल गणेश और भगवान शिव के बिच इस बात को लेकर काफी वाद – विवाद हुवा और क्रोध में आकर भगवान शिव ने उनका सिर काट दिया. और यह दृश्य देखकर माता पार्वती बेहद क्रोधित होती है. जिसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को वचन दिया की वे उनके पुत्र गणेश को नया जीवन देंगे इस घटना के बाद भगवान शिव ने अपने साथियो को एक सिर ढूंढने भेजा, और उन लोगो ने एक हाथी का सिर लेकर शिव जी को दिया. तब भगवान शिव ने वह हाथी का सिर गणेश के धड़ में जोड़ कर उन्हें नया जीवन दिया जिसके बाद भगवान गणेश जी को गजानन नाम से भी जाना जाने लगा.

गणेश चतुर्थी पूजा और आरती –

गणेश चतुर्थी का त्यौहार आने से दो दिन – तीन महीने पहले ही कारीगर भगवान गणेश की मिटटी की मुर्तिया बनाना शुरू कर देते है. और इन दिनों में बाजार में गणेश जी की अलग – अलग मुद्रा में बेहद सुंदर मुर्तिया मिलना शुरू हो जाती है. गणेश चतुर्थी वाले दिन लोग इन मूर्तियों को अपने घर ले जाते है. और हमे जगह – जगह पंडाल सजे हुए दिखाई देते है. प्रत्येक पंडाल में एक पुजारी होता है जो इस दौरान चार विधियों के साथ पूजा करते है.

सबसे पहले मूर्ति स्थापना करने से पहले प्राणप्रतिष्ठा की प्रथा निभाई जाती है. इस अनुष्ठान के बाद षोडशोपचार – भगवान को 16  तरह से श्रध्दांजलि दी जाती है. इसके बाद उत्तरपूजा की जाती है, जिसमे मूर्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानतरित किया जाता है और आखरी अनुष्ठान में गणपति का विसर्जन किया जाता है. गणपति विसर्जन के दौरान उनके भक्त “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारे लगाते हुए जाते है.

गणेश चतुर्थी का प्रसाद –

दोस्तों आप सब तो जानते ही है की भगवान गणपति खाने के बहुत शौकीन थे. उन्हें कई मिठाईया जैसे मोदक, गुड़ और नारियल जैसी चीजे प्रसाद या भोग में चढ़ाये जाते है. गणेश जी को मोदक काफी पसंद थे जिन्हे चावल के आटे गुड़ और नारियल से बनाया जाता है. इस पूजा में गणपति को 21 लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है.

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा”

एकदंताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात” 

तो दोस्तों यह थी पोस्ट “जानिए क्या है गणेश चतुर्थी का महत्व” आपको यह post  कैसी लगी प्लीज़ हमे बताये और हमारी तरफ से आपको गणेश चतुर्थी की बहुत – बहुत शुभकामनाये और भगवान करे यह गणेश चतुर्थी आपके जीवन में बहुत सारी खुशिया लेके आए और आपके सारे दुःख,  दुःख हर्ता दूर करे और आपके जीवन में हमेशा शुभ और लाभ हो जय गणेश.

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