हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है

हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है , दोस्तों आज मै आप के लिए ये post  लाया हु , जो आप को बहुत पसंद आएगी !

हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है

दोस्तों इस दुनिया में हर इंसान की कोई न कोई आदत होती है , और इंसान ही क्या प्रत्येक जिव – जंतु की अपनी अपनी आदत होती है ,  जो उस आदत को वो नहीं छोड़ता दोस्तों हम चाहे कितने भी पड़ – लीख जाये पर हमारे में जो कोई एक नेचुरल आदत पड़ी है , उसे हम नहीं छोड़ते  कोई भी जिव – जंतु अपनी आदत को नहीं छोड़ते दोस्तों फिर वो चाहे अच्छी होया बुरी !

 

दोस्तों किसी में ये आदत physicli  होती है , और किसी में mentli   होती है , मानलो किसी इंसान को झूट बोलने की आदत पड़गी   तो हम कुछ   भी करले   वो ये आदत सारी   जिंदगी    नहीं छोड़ता , और किसी इंसान की सच  बोलने की आदत है तो वो हमेशा  कुछ  भी होजाये  सच  ही बोलता   है ,

 

दोस्तों work में भी हम लोगो को काम करने की जैसी आदत रहती है , हम लोग उसी हिसाब से काम करते है , चाहे वो तरीका किसी दूसरे को पसंद आए या ना  आये हम उसी तरह रहते है , तभी तो हर इंसान का काम करने का तरीका अलग होता है !

 

और दोस्तों यही आदत जानवरो में भी होती है किसी को लात मारने की आदत होती है , तो किसी को दौड़ने की होती है , तो किसी को चिल्लाने की होती है , सब में अलग – अलग आदते होती है , जिसे वे कभी नहीं छोड़ सकते !

हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है –

तो दोस्तों हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है , इसके ऊपर में अब आपको एक कहानी बताने जारहा हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी !

 

दोस्तों एक बार की बात है ,एक घोडा घास चर रहा था ,  तभी उसने देखा एक लोमड़ी उसकी और आरही है  , वह लोमड़ी का स्वभाव जनता था ! वह जनता था , की वह बहुत चालक हे , और इधर लोमड़ी भी यह जानती थी की घोड़े बहुत ताकतवर होते है ! दोस्तों इस लिए वह भी घोड़े को बातो में उलझाने का तरीका सोच रही थी !

 

घोडा लोमड़ी को देखकर लँगड़ा – लँगड़ा कर चलने लगा , लोमड़ी ने पूछा की उसे क्या हुवा है ? तब घोड़े ने कहा , “ऐसा लगता है की मेरे पैर में  काटा चुभ गया है , इसलिए बहुत दर्द हो रहा है , और चलने में मुश्किल आरही है !”

 

लोमड़ी ने कहा , ” मेने एक डॉक्टर से इलाज करना  सीखा  है ! तुम्हे  काफी  तकलीफ  हो रही  होगी , लावो दिखावो मुझे  अपना पैर !”

 

दोस्तों ऐसा कहकर लोमड़ी चालाकी से घोड़े को पैर से पकड़ने को झुकी  ! उसने सोचा की मैने घोड़े को एकबार गिरा दिया तो उस पर काबू पाना आसान हो जायेगा !

 

लेकिन दोस्तों घोडा उससे ज्यादा समझदार था , जैसे ही लोमड़ी ने उसका पैर पकड़ना चाहा , घोड़े ने उसे एक जोरदार लात मारी ! लोमड़ी हवा में उड़  कर दूर जा गिरी  , अब घोड़े की जगह बेचारी लोमड़ी लंगड़ा रही थी , तब लोमड़ी सोच रही थी की मेरी आदत है , चालाकी करना और घोड़े की आदत है लात मारना दोस्तों दोनों अपनी – अपनी आदत से मजबूर है !

 

तो दोस्तों देखा आपने किस प्रकार घोडा  और लोमड़ी दोनों अपनी आदत से मजबूर रहते है , दोनों अपनी आदत नहीं छोड़ते , इसी प्रकार हम इंसानो में भी होता है , पर दोस्तों में आपसे एक बात कहना चाहता हु ,

 

की जो हमारे में आदत है वो अच्छी है , किसी का फायदा करने लायक या किसी के काम आने लायक तो ठीक है , और अगर हमारी आदत बुरी है , उससे लोग परेशान है , तो दोस्तों हमे वो आदत बिलकुल छोड़ देना चाहिए !

 

तो दोस्तों आपको ये हम अपनी आदत से कितने मजबूर है जिसे छोड़ते नहीं है पोस्ट केसी लगी pliz मुझे बताये हमे आपके  comments  का इंतजार रहेगा , आप हमे comments  के माध्यम से अपने सुझाव भी दे सकते है , हमे इंतजार रहेगा !

 

धन्यवाद

विजय पटेल

 

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