सोच समझ के निर्णय ले

सोच समझ के निर्णय ले – आज मै ये post आप के लिए लाया हु. जो आपको बहुत पसंद आएगी !

 

 

दोस्तों हम इंसान कभी – कभी कुछ ऐसा फैसला करते हे , या निर्णय लेते हे , जिससे हमे बाद में पश्ताना पढ़ता हे या उस निर्णय से  हमे कुछ नुकसान होता हे , दोस्तों हमे कोई भी निर्णय लेने से पहले अच्छे से सोचना समझना चाहिए कभी – कभी जल्दी में लिया गया निर्णय बहुत खराब होता हे !

 

या हम लोग  कभी – कभी चीजों को देखे  बिना किसी दूसरे की बातो  पे भरोसा कर लेते हे , जो हमने नहीं करना चाहिए , दोस्तों यातो इसके पीछे इंसान का डर होता हे या आलस्य या कुछ और किसी ने कुछ कहा की वह ऐसा हे तो हम बिना कुछ सोचे समझे निर्णय लेते हे ,

सोच समझ के निर्णय ले:

और हमे उस निर्णय पे बाद में पश्ताना पढ़ता हे , दोस्तों मेरा  आपसे कहना हे आप जोभी निर्णय ले पहले अपने आपकी सुने या खुद उस परिस्तिथि को समझ के निर्णय ले तभी आप सही काम कर पाएंगे

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और दोस्तों आपको पता हे हम ये धारणा किसी इंसान के बारे में भी बना लेते हे अगर हमे कोई किसी के बारे में बोलदे की यार वोतो बहुत खराब हे ,अच्छा इंसान नहीं हे तो  हम उसकी बातो में आजाते हे ,

 

और उस इंसान के प्रति गलत विचार रखने लगते हे , तो मेरा आपसे ये पूछना हे की जब  हम किसी से मिले ही नहीं  तो हम उसके  प्रति दूसरे  से  सुनके  कैसे  निर्णय  ले  सकते  हे . की वो  इंसान अच्छाक  हे या  बुरा !

 

दोस्तों इंसान होया कोई वस्तु , वस्तु से मतलब कोई गाड़ी हे , मानलो आपको लेना हे और किसी ने उसके बारेमे गलत जानकारी देदी और आपने मानलिया और निर्णय लेलिया की वो गाड़ी  अच्छी नहीं हे तो कैसे होगा जबतक आप उसे नहीं देखेंगे या नहीं चलाएंगे !

 

तो दोस्तों आपको सोच समझ के निर्णय ले इसके बारे में मेरे विचार जरूर समझ में आए होंगे  और अगर कुछ नहीं आया हे तो में आपको एक कहानी के द्वारा और अच्छे से समझाने की कोशिश करुगा !

 

दोस्तों स्वामी विवेकांनद बचपन से ही निडर थे , जब वह  केवल आठ साल के थे तभी से अपने  एक मित्र के यहा खेलने जाया करते थे , उस मित्र के घर में एक चम्पक पेड़ लगा हुवा  था , वह स्वामीजी  का पसंदीदा पेड़ था , और उन्हें उसपर लटक कर खेलना बहुत प्रिय था !

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रोज की तरह एक दिन  वह उसी पेड़ को पकड़ कर झूल रहे थे ,  की तभी मित्र के दादा जी उनके पास पहुंचे , उन्हें डर था की स्वामी जी उसपर से गिर न जाये , या कहि पेड़ की डाल ही ना टूट जाए , इसलिए उन्होंने स्वामीजी को समझाते हुए कहा , ” नरेंद्र (स्वामीजी का नाम) , तुम इस पेड़ से दूर रहो , अब दुबारा इस पर मत चढ़ना ”

 

” क्योकि इस पेड़ पे एक बृहदेत्य रहता हे , वो रात में सफेद कपड़े पहने घूमता हे , और देखने में बढ़ा ही भयानक हे ,” उत्तर आया !

 

नरेंद्र को यह सुनकर थोड़ा अचरज हुवा , उसने दादा जी को दैत्य के बारे में और भी कुछ बताने का आग्रह किया !

दादा जी बोले ,” यह पेड़ पर चढ़ने वाले लोगो की गर्दन तोड़ देता हे !”

 

नरेंद्र ने यह सब ध्यान से सुना और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया , दादा जी  भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए , उन्हें लगा की बच्चा डर गया हे . पर जैसे ही वे कुछ आगे बढ़े नरेन्द्र पुनः पेड़ पर चढ़ गया और डाल पर घुलने लगा !

 

यह देख मित्र जोर से चीखा ,” अरे तुमने दादा जी की बात नहीं सुनी , वो दैत्य तुम्हारी गर्दन तोड़ देगा ,”

 

बालक नरेन्द्र जोर से हसा और बोला , ” मित्र डरो मत ! तुम भी कितने भोले हो ! सिर्फ इसलिए की किसीने तुम से कुछ कहा हे उसपर यकीन मत करो , खुद ही सोचो अगर दादा जी की बात सच  होती तो मेरी गर्दन कब की               टूट चुकी  होती ,”

 

सचमुच स्वामी विवेकानंद बचपन से ही निडर और तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी थे !

 

तो दोस्तों हमे भी जीवन में हर समय किसी की कही सुनी बात पे भरोसा नहीं करना चाहिए हमे अपनी बुद्धि  का प्रयोग करके बात की सच्चाई तक जाना चाहिए जैसा स्वामी विवेकानंद जी ने किया हमेभी ऐसाही  करना हे , पहले  चीजों को सोचना समझना हे फिर निर्णय लेना हे !

 

तो दोस्तों आपको ये post सोच समझ के निर्णय ले केसी लगी pliz मुझे बताये और में आशा करता हु की आप  मेरे द्वारा दिए गए मेसेज को अपने जीवन में लागु करेंगे और हमे आपके Comments का इंतजार रहेगा अच्छा

 

धन्यवाद

विजय पटेल

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