सेठ और लक्ष्मी माँ

हेलो दोस्तों
 

 

दोस्तों कैसे हेआप दोस्तों में  Thoughtking पे  आपके लिए एक कहानी  लाया हु ,जो आपकोबहुत पसंद आएगी
 
इसका नाम हे– सेठ और लक्ष्मी माँ 
 
दोस्तों अयोध्या  में  एकबढ़े धनवान सेठरहते थे ! वेवष्णु भगवान  के परम्भक्त थे  और हमेशासच बोला करतेथे
एक बार जबभगवान सेठ जीकि प्रशंशा कररहे थे तभीमाँ लक्ष्मी  ने कहा, ” स्वामी , आप इससेठ कि इतनीप्रशंशा किया करतेहे , क्यों नाआज इसकी परीक्षाली जाये औरजाना जाये किये सचमुच इसकेलायक हे यानहीं ? “
भगवान बोले , ” ठीक हेअभीसेठ गहरी निद्रामें है आपउनके स्वप्न मेंजाये और उनकीपरीक्षा लेले ! “
अगले ही शनसेठ जी कोएक स्वप्न आया!
स्वप्न में धनकि देवी लक्ष्मीउनके सामने आयीऔर बोलीहैमनुष्य ! में धनकि दात्री लक्ष्मीहु !”
सेठ जी कोअपनी आखो परयकीन नहीं हुवाऔर वो बोले, ” है माता अपनेसाक्छात दर्शन देके मेराजीवन धन्य करदिया है , बताइयेमें आपकी क्यासेवा कर सकताहु ? “
कुछनहीं ! मेतो बसइतना बताने आयीहु ,कि मेरास्वभाव चंचल है, और बरसो  से तुम्हारेभवन में निवासकरतेकरते मेंऊब चुकी हु, और यहा सेजा रही हु!”
सेठ जी बोले, ” मेरा आपसे  निवेदनहै कि आपयही रहे , किन्तुअगर  आपकोयहा अच्छा नहींलग रहा हैतो में भलाआपको कैसे रोकसकता हु , आपअपनी इच्छा अनुसारजहाँ चाहे जासकती है !
और माँ लक्ष्मीउसके घर सेचली गई !
थोड़ी देर बादवे रूप बदल  कर  पुनःसेठ के स्वप्नमें यश केरूप में आयीऔर बोली , ” सेठमुझे पहचान रहेहो ?”
सेठ – ” नहीं महोदय आपको नहींपहचाना !
यश– ” में यश हु, में ही तेरीकीर्ति और प्रसिध्दिका कारण हूँ! लेकिन अब मेंतुम्हारे साथ नहींरहना चाहता क्योकिमाँ लक्ष्मी यहासे चली गईहै अतः  मेरा भीयहा कोई कामनहीं !”
सेठ – ” ठीक है , यदिआप भी जानाचाहते है तोवही सही !”
सेठ जी अभीभी स्वप्न मेहीथे और उन्होंनेदेखा कि वोदरिद्र हो गएहै  , औरधीरेधीरे उनकेसारे रिश्तेदार औरमित्र भी उनसेअलग होगये है! यहा तक किजो लोग उनकागुणगान किया करतेथे वो भीउनकी बुराई करनेलगे है !
कुछ समय बीतनेके बाद माँलक्ष्मी धर्म कारूप धारण करपुनः सेठ केस्वप्न में आयीऔर बोली , ” मैधर्म हूँ ! माँलक्ष्मी और यशके जाने केबाद इस दरिद्रतामै मेभी तुम्हारासाथ नहीं देसकता , मै जारहाहूँ
जैसीआपकी इक्छा  ” सेठ नेउत्तर दिया !
और धर्म भीवहा से चलागया !
कुछ और समयबीतजाने के बादमाँ लक्ष्मी सत्यके रूप मैस्वप्न मै प्रकटहुई और बोली, ” मै सत्य हूँ!
लक्ष्मी , यश , औरधर्म के जानेके बाद अबमेभी यहा सेजाना चाहता हूँ
ऐसा सुन केसेठ जी नेतुरंत सत्य केपाव पकड़ लिएऔर बोले , ” हैमहाराज , मै आपकोनहीं जाने दुगा  ! भलेहीसब मेरा साथछोड़  दे  मुझेत्याग दे परकृपया आप ऐसामत कीजिये , सत्यके बिना  मै एकछण भी नहींरह सकया , यदिआप चले जायेगेतो मै तत्कालही अपने प्राणत्याग दुगा ! “
लेकिनतुमने बाकि तीनोको बड़ी आसानीसे जाने दिया, उन्हें क्यों  नहींरोका !” सत्य नेप्रश्न किया
सेठ जी बोले, ” मेरे लिए वेतीनो भी महत्वरखते है , लेकिनउन तीनो केबिना भी मैभगवान के नामका जप करतेकरते उद्देश्यपूर्ण जीवन जीसकता हूँ , किन्तुयदि आप चलेगए तो मेरेजीवन मै झूठ  प्रवेशकर जायेगा औरमेरी वाणी अशुद्धहो जाएगी , भलाऐसी वाणी सेमै अपने भगवानकि वंदना कैसेकरुगा , मै तोकिसी भी कीमतपर आपके बिनानहीं रह् सकता!
सेठ जी काउत्तर सुन सत्यप्रसन्न हो गयाऔर उसने कहा, ” तुम्हारी अटूट भक्तिने मुझे यहारुकने पर विवशकर दिया औरअब मै यहासे कभी नहींजाउगा !
सेठ जी अभीभी निद्रा मैथे !
थोड़ी देर बादस्वप्न मै धर्मवापस आया औरबोला ,” मै अबतुम्हारे पास हीरहुगा क्योकि यहासत्य का निवासहै ,” सेठ जीने प्रसन्न्तापूर्वक धर्मका स्वागत किया!
उसके तुरंत बाद यशभी लोट आयाऔर बोला ,” जहाँसत्य और धर्महै वहा यशसंवतः  ही जाता है, इस लिए अबमेभी तुम्हारे साथही रहुगा !
सेठ जी नेयश कि भीआवभगत कि!
और अंत मैमाँ लक्ष्मी  आयी
उन्हें देखते ही सेठजी नतमस्तक होबोले , ” है देवी! क्या आप भीपुनः मुझ परकृपा करेगी ?”
अवश्य, जहाँ सत्य , धर्म , औरयश हो वहामेरा वास निश्चिहै ! ” माँ लक्ष्मीने उत्तर दिया!
यह सुनते ही सेठजी कि नींदखुल गई ! उन्हेंयह सब स्वप्नलगा पर वास्तविकतामै वह एककढ़ी परीक्षा मैउत्तीर्ण हो गए!
तो दोस्तों देखा आपनेकि किस प्रकारसेठ जीने सत्यका रास्ता नहीं  छोड़ाऔर उसी वजहसे धर्म ,यशऔर लक्ष्मी सेठजी के पासस्वतः ही लोटआये दोस्तों इसीप्रकार हमे भीअपने जीवन मैसत्य के रास्तेपे चलना हैजिससे हमारे पासभी धर्म ,यशऔर लक्ष्मी आये!
तो दोस्तों आप कोयेपोस्ट केसी लगीप्लीज़ मुझे बतायेहमे आपके कमैंट्सका इंतजार रहेगा!
धन्यवाद
विजय पटेल

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