पिता की सिख

हेलो दोस्तों

दोस्तों आज में आप के लिए Thoughtking पर एक बहुत ही ज्ञानवर्धक कहानी लाया हु, जो आप को बहुत पसंद आएगी ! इसका नामहेपिता की सिख

 

पिता की सिख

दोस्तों मिहिर  बहुत ही घुस्सेल किस्म का लड़का था, उसे बिना बात केहि  ग़ुस्सा आजाया करता था! एक दिन मिहिर के पिता ने उसे काफी समझाया की ग़ुस्सा करने से केवल हानि होती हे ,

 

लेकिन मिहिर को कुछ समझ नहीं आया तो उसके पिता ने एक उपाय सोचा और मिहिर को उसके पिता ने ढेर सारी किले दी और कहा की तुम एक काम करो जब भी तुम्हे क्रोध आये तो तुम एक कील घर के सामने लगे पेड़ पेचुभो देना !

पिता की सिख

 

मिहीर ने अपने पिता की बात मानली और फिर उसे जब भी ग़ुस्सा आता वह एक कील लेजाक रपेड़ में चुभो देता ! पहले दिन मिहीर  को ग़ुस्सा आया तो उसने उस पेड़पे 30 किले चुभो दी इसी तरह मिहीर को जब भी ग़ुस्सा आता तो वोपेड़ में जाकर किले चुभोता और उसके बाद ही कुछ करता !

 

कुछ दिनों में मिहीरको अपना ग़ुस्साअपने आप नियंत्रणकरना आ गया! उसे समझमे आनेलगा की पेड़पे किले चुभोनेसे अच्छा हे  , वहअपने ग़ुस्से परही नियंत्रण करेक्योंकि अब उसेकील चुभोना भीबोरिंग लगने लगाथा !

 

एक दिन ऐसाभी आया कीउसने पेड़ मेंएक भी कीलनहीं चुभोई औरउसने यह बातअपने पिता कोबताई ! पापा नेकहा , मिहीर बेटाअब तुम उनसारी किलो कोपेड़ से वापसनिकालो तुमको थोड़ी परेशानीहोगी पर  तुम ऐसाकर सकते हो!

 

मिहीर ने बहुतकोशिशों के साथउस पेड़ सेसारी किले खींचकरबाहर निकाल दीऔर उन सारीकिलो को  लेकर वापसवह अपने पिताके पास  आया औरकहा , पापाजी मेनेआपका दिया हुवा, काम पूरा करदिया

 

मिहीर के पापामिहीर को अपनेसाथ लेके उसीपेड़ के पासगए और कहाचलो तुम्हे कुछदिखता  हु! पापा ने पेड़की तरफ इशाराकरते हुए मिहीरसे कहा ,

 

मिहीरतुमने बहुत अच्छाकाम किया लेकिनतुमने इस पेड़को देखा हे ?

 

मिहीर ने पेड़के तने कोबहुत ध्यान सेदेखा वह बहुतखराब लग रहाथा , क्योंकि सेकड़ोकिलो के निशानबने हुए थे, जो की बहुतभद्दा दिख रहाथा !

 

मिहीर के पापाने मिहीर सेकहा , बेटे तुमजब ग़ुस्सा करतेहोतो इसी निशानकी तरह तुम्हारीछवि दुसरो केमन में बनजाती हे ! औरवह छवि दुसरोको बहुत भद्दीलगती है ! तुमकिसी पर ग़ुस्साकरो फिर हजारोबार माफ़ी मांगभी लो तबभी तुम्हारी कड़वीबाते तो उनकेमन पर हमेशानिशान बनाये रखतीहै !

 

 

तो दोस्तों देखा आपनेकिस प्रकार एकपिता ने अपनेबेटे को क्रोधनहीं करने कीसिख दी औरबेटे ने भीउसे अमल कियादोस्तों इसी प्रकारहम भी जबग़ुस्सा करते हैतो हमे भीकई लोग समझाते  है  ,

 

परहम किसी कीबात नहीं सुनतेदोस्तों अब हमेऐसा नहीं करनाहै , अगर कोईहमसे बढ़ा व्यक्तिहमे कोई चीजसमझाये तो हमे  वोजरूर समझना चाहिए!

 

 

तो दोस्तों आप कोये पोस्ट पिता की सिख  केसी लगी प्लीज़ मुझे बताये और में आशा करता हु , की इस में जो सिख बताई गई है आप उसे जरूर अमल करेंगे !

 

 

 

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