परिस्तिथि  को  अपने  पक्ष  में  कैसे  करे

परिस्तिथि  को  अपने  पक्ष  में  कैसे  करे , दोस्तों  आप के लिए  आज में  ये post लाया हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी

परिस्तिथि को अपने पक्ष में कैसे करे , दोस्तों आप के लिए आज में ये post लाया हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी ! दोस्तों इंसान के जीवन में परिस्थितिया कभी हमारे अनुरूप नहीं आती मतलब हम जैसा सोचते हे वैसा नहीं होता या जैसा चाहते हे वैसा नहीं होता दोस्तों परिस्तिथिया कई बार हमारे विपरी आती हे या ज्यादातर हमारे सामने विपरीत परिस

दोस्तों  इंसान  के  जीवन  में  परिस्थितिया  कभी  हमारे  अनुरूप  नहीं  आती  मतलब  हम  जैसा  सोचते  हे  वैसा  नहीं  होता  या  जैसा  चाहते  हे  वैसा  नहीं  होता  दोस्तों  परिस्तिथिया  कई  बार हमारे   विपरी  आती  हे  या  ज्यादातर  हमारे  सामने  विपरीत  परिस्तिथिया  आती  हे  ,

 

कई  बार  हमारे  काम  में  ऐसी  स्थति  आजाती  हे ,   कि  में  इसे  कैसे  पूरा  करू  परिस्तिथि  पूरी  विपरीत  रहती  हे  , पर  दोस्तों  सफल  इंसान  वही  हे  जो  विपरीत  परिस्तिथियों  में  भी  अपना  काम  सफल  कर  ले  और  आगे  बडे !

परिस्तिथि  को  अपने  पक्ष  में  कैसे –

दोस्तों  ये  किसी  व्यक्ति  विशेष  के  ऊपर  नहीं  होता  हे , ये  हर  इंसान  के  जीवन  में  आती  है  क्योकि  जबतक  विपरीत  परिस्तिथि  नहीं  आती  हे , तबतक  हम  उस  काम  को  करने  का  कोई  अलग  तरीका  भी  नहीं  निकालते   हे  ,

 

और  दोस्तों  दुनिया  में  हर  इंसान  परिस्तिथि  से  निकल  भी  नहीं  पाता  कुछ  लोग  ऐसे  स्थति   में  फसते  हे  कि  उससे  बाहर  नहीं  निकल  पाते  और  जो  इंसान  परिस्तिथि  से  बाहर  निकल  ना  जानता  हे  वो  अपने  काम  में  सफल  भी  होता  हे  !

 

दोस्तों अब में आप को “परिस्तिथि  को  अपने  पक्ष  में  कैसे”  करे उसके बारे में एक कहानी बताने जारहा   हु  , जो आपको बहुत पसंद आएगी !

 

दोस्तों  एक  बार  की   बात  हे  एक  कव्वा  बहुत  प्यासा  होता  है ,  उसे  बहुत  प्यास  लगती  हे  , वो  पानी  ढूंढ़ता  हे  , और  उसे  कुछ  देर  में  एक  मटका  दीखता  हे  उस  मटके  में  पानी  होता  हे  मगर  मटका  केवल  आधा  ही  भरा  होता  है ,  दोस्तों  मटके  का  मुँह  सकरा  होने  के  कारण  कौवे   की  चोंच  पानी  तक  नहीं  पहुंच  पाती  हे  !

 

अब  वो  बहुत  परेशान  हो  जाता  है,  और  सोचता  हे  की  अब  में  पानी  कैसे  पीयू  !

दोस्तों  कोवा  कुछ  देर  सोचता  हे  और  फिर  उसके  मन  में  एक  युक्ति  आती  है !

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अब  कोवा  पत्थर  के  छोटे  – छोटे  टुकड़ो  को  अपनी  चोंच  में  पकड़  कर  मटके  में  डालने  लगता  है  , अब  वो  ये  क्रिया  बार – बार करने  लगा  दोस्तों  अब  कुछ  देर  बाद  क्या  होता  है , की  मटके  का  पानी  कंकर  डालने  की  वजह  से  ऊपर  आजाता  है , और  अब  कौव्वा  आराम  से  पानी  पी  सकता  था !

 

तो  इस  प्रकार  कौव्वे  ने  परिस्थिति  को  अपने  पक्ष  में  किया  और  अपनी  प्यास  बुझाई  ! तो  दोस्तों  देखा  आप  ने  किस  प्रकार  कव्वे  ने  परिस्तिथियों  को  अपने  पक्ष  में  करा  और  अपनी  प्यास  बुझाई  !

 

दोस्तों  क्या  इंसान  ऐसा  करता  है  , ” मैने   देखा  है  इंसान  परिस्तिथि को  देख  के  जल्दी  हर   मानलेता  है  “, दोस्तों  हमे  भी  उस  कौव्वे  से  सीखना  चाहिए  की  उसने  किस  प्रकार  परिस्तिथी  को  अपने  पक्ष  किया  , हमे  भी  कोई  परिस्तिथी  आनेपे  डरना  या  घबराना  नहीं  है  , उसे  कैसे  पार  किया  जाये   ये  उपाय  खोजना  चाहिए  , और  यकीन  मानिये  आप  प्रयास  करोगे  तो  परिस्तिथी  को  जरूर  अपने  पक्ष  में  करलोगे  !

 

तो  दोस्तों  आपको  ये  post परिस्तिथि  को  अपने  पक्ष  में  कैसे  करे  केसी  लगी  pliz मुझे  बताये  और  आप  हमारे  साथ  post से  संबंधित  आप  के  विचार  share कर  सकते  है , जो  आप  हमे  comments  के   माध्यम  से  बता  सकते  है  हमे  इंतजार  रहेगा   !

 

धन्यवाद

विजय  पटेल

 

 

 

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