नवरात्रि क्या है

नवरात्रि क्या है – नवरात्रि एक हिन्दू पर्व हे ! नवरात्रिएक संस्कृत शब्दहे , जिसका अर्थहोता हे  “नो राते” ! इन नो रातो और  दस  दिनों के दौरान , शक्ति/ देवी के नोरूपों की पूजाकी जाती हे! दसवा दिन दशहराके नाम सेप्रसिद्ध  हे! नवरात्रि वर्ष मेंचार बार आताहे ! पौष, चैत्र, आषाढ़ , अश्विन प्रतिपदा सेनवमी तक मनायाजाता हे !
नवरात्रि क्या है
नवरात्रि के नोरातो में तीनदेवियोमहालक्ष्मी , महासरस्वती और दुर्गाके नो स्वरूपोंकी पूजा होतीहे जिन्हे नवदुर्गाकहते हे ! इननो रातो औरदस दिनों केदौरान , शक्ति / देवी केनो रूपों कीपूजा की जातीहे ! दुर्गा कामतलब जीवन केदुःख को हटानेवालीहोता हे ! नवरात्रिएक महत्वपूर्ण त्यौहारहे जिसे पुरेभारत  में  महानउत्साह के साथमनाया जाता है!

नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि उत्सव देवी अम्बाका प्रतिनिधित्व हे! वसंत की शुरुआतऔर शरद ऋतूकी शरुआत , जलवायु
और सूरज केप्रभावों का महत्वपूर्णसंगम माना जाताहे ! इन दोसमय माँ दुर्गाकी पूजा केलिए पवित्र अवसरमाने जाते हे! त्यौहार की तिथियांचंद्र कैलेंडर केअनुसार निर्धारित होती हे! नवरात्रि पर्व , माँदुर्गाकी अवधारणा भक्तिऔर परमात्मा कीशक्ति की पूजाका सबसे शुभऔर अनोखी  अवधि मानी  जाती  हे! यह पूजा वैदिकयुग से पहले, प्रगेतीखासिक कल सेहे ! ऋषि केवैदिक युग केबाद से , नवरात्रिके दौरान कीभक्ति प्रथाओं मेंसे मुख्य गायत्रीसाधना का है!

नवरात्रि प्रमुख कथा

लंकायुद्ध में ब्रह्माजीने श्रीराम सेरावण वध केलिए चंडी देवीका पूजन करदेवी को प्रसन्नकरने को कहाऔर बताये अनुसारचंडी पूजन औरहवन हेतु दुर्लभएक सो आठनीलकमल की व्यवस्थाकी गई ! वहीदूसरी और रावणने भी अमरताके लोभ मेंविजय कामना सेचंडी पाठ प्रारम्भकिया यह बातइंद्र देव नेपवन देव के

नवरात्रि क्या है”

माध्यम से श्रीरामके पास पहुंचाईऔर परामर्श दियाकी चंडी पाठयथा सम्भव पूर्णहोने दिया जाये! इधर हवन  सामग्री में पूजास्थल से एकनीलकमल रावण कीमायावी शक्ति से गायबहो गया औरराम का संकल्पटूटता  सानजर आने लगा! भय इस बातका था कीदेवी माँ रुष्टना हो जाए! दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्थातत्काल असम्भव थी , तबभगवान राम कोसहज ही
स्मरण हुवा कीलोग मुझेकमलनयनमनवनच लोचककहतेहैतोक्यों ना सम्पूर्णपूर्ति के लिएएक नेत्र अर्पितकर दिया जाए और प्रभु रामने जैसे हीतूणीर से एकबाण निकाल कर अपना नेत्र निकालनेके लिए तैयारहुए , तब देवीने प्रकट हो, हाथ पकड़कर कहाराम में प्रसन्नहु , और विजयश्रीका आशीर्वाद दिया!
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वही रावण नेचंडी पाठ मेंयज्ञ करा  रहे ब्राह्मणोकी सेवा मेंब्राह्मण बालक कारूप धर करहनुमानजी सेवा मेंजुट गए ! निस्वार्थसेवा देखकर ब्राह्मणोने हनुमानजी सेवर मांगने कोकहाइसपर हनुमानजी नेविनम्रतापूर्वक कहाप्रभु आप प्रसन्न है तोजिस मंत्र सेयज्ञ कर रहे हे,
उसका एक अक्षरमेरे कहने सेबदल दीजिये ! ब्राह्मणइस रहस्य कोसमझ नहीं सकेऔर तथास्तु कहदिया ! मंत्र में जयदेवी….भूर्त्हरिणी मेंके स्थान परउच्चरित करे, यही मेरी इकछाहै ! भूर्त्हरिणी यानिकी  प्राणियोंकी पीड़ा हरनेवाली औरकरिणीका अर्थ होगाप्राणियों को  पढ़ित  करने वाली जिससे देवीरुष्ट हो  गई औररावण का सर्वनाशकरवा दिया ! हनुमानजी महाराज नेश्लोक मेंके स्थान परकरवाकर  के यज्ञकी दिशा बदल  दी!

दोस्तों आशा करता हु की ये पोस्ट आप को जरूर अच्छी लगेगी 
और किसी जानकारी के लिए पलीज़  हमें बताये 

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