जीवन में बुरे कर्म ना करे

जीवन में बुरे कर्म ना करे – दोस्तों में आज आपके लिए Thoughtking पर ये post लाया हु. जो आपको बहुतही पसंद आएगी !
जीवन में बुरे कर्म ना करे
 
दोस्तों इंसान इस दुनिया अपने कर्मो सेही पहचाना जाता हे , इस दुनिया में इंसान  दो तरह के कर्म करता हे एक तो अच्छे और एकबुरे कर्म और जो इंसान अच्छे कर्म करता हे, उसे सब लोग इज्जत देते हे, उसके बारे मे कोई बुरा नहीं सोचता , उससे सब लोग प्यार करते हे !
और दोस्तों दूसरी और आप देखेंगे एकबुरे कर्म करने वाला इंसान उससे सब लोग बुरा समझते हे उसकी कोई इज्जत नहीं करता उससे सब डरते हे , उसके बारे में सब अच्छा नहीं सोचते लोगबुरा कर्म करने वाले केसाथ रहना भी नहीं चाहते उससे सब दुरी बनाते हे , और उसे कोई प्यार भी नहीं करते !
दोस्तों हम अगर अपने घर में हे या अपने वर्क प्लेस में या समाज में हमे सभी जग हेऔर सभी लोगो से अच्छा व्यवहार करना चाहिए , सबसे प्यार से रहना चाहिए , किसी के साथ बुराव्यवहार नहीं करना चाहिए !
और दोस्तों में आपको एक ज्ञान की बात बताता हु, अगर हम अपने परिवार जैसे अपने माँबाप या अपने बीवीबच्चे के लिए बुरेकर्म करते हेकी उनको अच्छी सुख सुविधा मिल सके तो दोस्तों आप यकीन मानिये आप के परिवार वाले आपकेबुरेकर्मो में कोई भागीदार नहीं होंगे  जो इंसान जैसे कर्म करता हे उसका परिणाम भी उसे ही भुगतना पढ़ता हे !
तो दोस्तों अब मेंआपके सामने एककहानी रखने जारहाहु , जिससे आपकोकर्मो के बारेमें और अच्छेसे समझ मेंआएगा !
 
दोस्तों एक बारकी बात हेएक गांव  में एकइंसान रहता थाउस इंसान काकाम जंगल सेजो राहगीर निकलतेथे उन्हें लूटनाथा , और इसीकाम से वोअपने परिवार कापालन पोषण करताथा , वो किसीइंसान को लूटमारके चोरी करकेधन लाता थाऔर उसके परिवारको खिलाता था!
दोस्तों  उस  आदमीकी यही दिनचर्याथी बीएस सबकोलूटना
इसी प्रकार वो एकदिन जंगल मेंबैठ के किसीराहगीर का इंतजार  कररहा था , कीकोई आए औरउसे में पकड़ूये सोचकर एकपेड़ की आड़में बैठा था!
तो दोस्तों कुछ देरइंतजार के बादउस जंगल सेएक साधु महात्मानिकले और उसआदमी ने उनसाधु महात्मा कोपकड़ा और उनसेबोला , ” जल्दी  सेतुम्हारे पास जोभीकुछ हे वोमुझे देदो नहींतो अच्छा नहींहोगा !”
महात्मा जी बोलेभाई  मेटोसाडू हु , मेरे पास क्या रहेगाना कोई धनहे ना डोलतना रुपया नापैसा
एक साधु केपास तुम हे, बस ज्ञान केसिवाय  कुछनहीं मिलेगा !
वो लुटेरा बोला – ” मुझेकुछ नहीं सुन्नाबस जल्दी सेनिकालो !
साधु  बोले– ” भाई मेतो तुम्हेबस ज्ञान हीदे सकता हु!
महात्मा फिर बोले, ” भाई तुम जोये काम करतेहो वो किसकेलिए करते हो, वो बोला मेयेअपने परिवार केलिए करता हु,
अपने परिवार के लिएमहात्मा जी बोले !
 
हा !
 
फिर महात्मा जी बोलेमें तुम सेएक बात पूछनाचाहता हु , तुमजो ये कामकरते हो दूसरेसे लूटपाटकरते हो उन्हेंमारते हो , तोक्या इस काममें तुम्हारा परिवारभी  भागीदारहे , या नहीं!
उसने बोला . ” जरूर हेये सब मेंउनके लिए हितोकरता हु !
महात्मा जी फिरबोलेतो ठीकहे तुम मुझेइस पेड़ सेबांध के जावऔर अपने परिवारके हर सदस्यसे पूछ केआव की क्या  वोतुम्हारे इस पापकर्म में हिस्सेदारहे !
वो बोला ,  ” ठीकहे में तुमको बांध केजाता हु औरअभी पूछ केआता हु ,
फिर वो घरगया और उसनेसबसे पहले अपनीपत्नी से पूछाकी मेजो कामकरता हु , लोगोको मार केधन कमाके लाताहु , वो बहुतही पाप कर्महे ., क्या तुममेरे काम मेंभागीदार हो
उसकी पत्नी बोली , ” नहींमें क्यों आपकेकर्म  मेंभागीदार बनुगी में आपकीपत्नी हु , मुझेऔर हमारे पुरेपरिवार को पालनाआपका कर्तव्य हे, और आप कही  सेभी धन लाकेअपना कर्तव्य निभारहे हे , इससेहमे क्या , औरआपके कर्म मेंजो हिस्सा हेवो पूरा आपकाही हे !
इसी प्रकार उसने अपनेबच्चो से भीपूछा सब नेमना करदिया कीआपके कर्मो मरे
हमारी कोई हिस्सेदारीनहीं हे !
वो फिर लोटके साधु केपास आगया औरउसे पूरी बातसमझ में आगयीउसने साधु सेहाथ जोड़ केकहा की , ” महाराजआज से मेयेबुरा कर्म नहींकरुगा “, और इसकेबाद वो सुधरजाता हे औरअच्छे कर्म करताहे !
तो दोस्तों देखा आपने की इंसान के कर्म कैसे उसे खुद को ही भुगतने पढ़ते हे, ये तो एक कहानी की बातथी पर इस कहानी से हम कई प्रकार की शिक्षा ले सकते हे , और अगर हम कुछ बुरेकर्म करते भी हे तो अब उन्हें धीरेधीरे सुधारेंगे और अब जीवन में अच्छे कर्म करेंगे !
 
तो दोस्तों आप कोये पोस्ट केसी लगी pliz मुझे बताये और में आशा  करता हु आप , अब आपभी सदा अपने जीवन में अच्छे कर्म करेंगे , और दुसरो को भी अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करेंगे इस केसाथ
धन्यवाद

 

विजय पटेल  

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