जीवन में आलस्य क्या है

 

जीवन में आलस्य क्या है , आप के लिए आज मेये post लाया हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी !

जीवन में आलस्य क्या है , क्या आप आलस्य के बारे में समझते है , की ये क्या होता है  और इसका हमारे जीवन में क्या प्रभाव पढ़ता है , दोस्तों मनुष्य के जीवन में आलश्य का बहुत गहरा प्रभाव पढ़ता है  ,दोस्तों हमे ज्यादा आलश्य नहीं करना चाहिए आलश्य की वजहें से हम अपने कई काम समय से नहीं कर पाते इससे हमे कई बार नुकसान उठाना पड़ सकता है  ,

 

दोस्तों हमे जीवन में आलस्य नहीं  करना चाहिए पर आराम केवल आराम के वक्त ही , हो दोस्तों लोग काम छोड़के आराम करते है  तो ये आलस्य कई श्रेणी में आता है , पर इससे  उनको परीणाम भी भुगतना पड़ता है , उनका काम रुकता है  या बिग़ड जाता है , तो दोस्तों हमे जीवन में आलस्य नहीं करना चाहिए !

 

दोस्तों  आलस्य क्या है , के ऊपर में आपको एक कहानी बताना चाहता हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी 

आलस्य क्या है-

दोस्तों एक बार की बात है  – एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर सम्मान किया करता था ! गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे , लेकिन वह शिष्य अपने अध्य्यन के प्रति आलसी और दीर्धसूत्री था ! सदा स्वाध्याय से दूर भागने  की कोशिश करता और आज के काम को कल पर टालता !

 

अब गुरूजी चिंतित होने लगे की कहि उनका  ये शिष्य जीवन – संग्राम में पराजित ना हो जाये ! आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य  बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है  !ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम केहि फल की कामना करता है  , वो शीग्र निर्णय नहीं ले सकता और अगर लेभी ले तो उसे पूरा नहीं कर पाता !

 

यहा तक की अपने पर्यावरण के प्रति भी सहज नहीं रहता है  ! और नहीं भाग्य द्वारा प्रदान अवसरों का लाभ उठाने की कलामे प्रवीण हो पाता है  !

उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए योजना बनाली , एक दिन एक काला  पत्थर का एक टुकड़ा शिष्य के हाथ में देते हुए गुरु ने कहा –

 

” में तुम्हे ये जादुई पत्थर का टुकड़ा , दो दिन के लिए देके , कहि दूसरे गांव जारहा हु , जिस भी लोहै  की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे , वो सोने की बन जाएगी ! पर याद रहै  दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात में तुमसे इसे वापस लेलुगा ! ”

 

शिष्य इस अवसर को पाकर बहुत प्रसन्न हुवा , लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन , यह कल्पना करते – करते बिता दिया की जब उसके पास बहुत सारा धन होगा तब वह कितना प्रसन्न , सुखी ,  समृद्ध और संतुस्ट रहै गा , इतने नौकर – चाकर होंगे की उसे पानी पिने के लिए भी नहीं उठना पड़ेगा ! फिर दूसरे दिन जब वह प्रातः काल जागा !

 

उसे अच्छी तरह स्मरण थाकी आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है  , उसने मन में पक्का विचार किया की आज वो गुरूजी द्वारा दिए गए काले पत्थर का लाभ जरूर उठाएगा ! उसने निश्चय किया की वो बाजार से लोहै  के बड़े – बड़े  सामान खरीद कर लाएगा ! और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर लेगा !

 

दिन बीतता गया , पर वो इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है  , कभी भी बाजार जाकर  सामान लाऊंगा उसने सोचा की अब तो दोपहर का भोजन कर के ही सामान  लेने जाउगा !  पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी , उसने बाजार जाने के बजाय आराम करना उचित समझा !

 

पर दोस्तों आलस्य क्या है और  आलसी होने के कारण  उसे नींद आगयी , और वो उठा तो सूर्यास्त होने को था , अब वो जल्दी – जल्दी बाजार की तरफ भागने लगा , पर रास्ते मेही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही ,  वो गुरूजी से उस जादुई पत्थर को एक दिन और अपने पास रखने की याचना करने लगा , लेकिन गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूर- चूर होगया !

 

पर दोस्तों एक घटना  की वजह से शिष्य को बहुत बड़ी सिख मिल गयी , उसे अपने आलस्य पर पश्तावा होने लगा , वह समझ गया की आलस्य उसके जीवन में बहुत  बड़ा अभिशाप है  , और उसने प्रण किया किवो कभी भी  काम से अपना जी नहीं चुरायेगा , और एक कर्मठ व्यक्ति बनके दिखायेगा , और इसके साथ ही गुरूजी की युक्ति भी काम कर गयी !

 

तो दोस्तों देखा आपने आलश्य हमारे  जीवन में कितना बुरा असर डालता है  , आपने  देखा उस शिष्य को जादुई पत्थर मिला पर उसने एक छोटा सा लोहै   का टुकड़ा भी सोनेका नहीं बनाया , दोस्तों चाहै  वो उस पत्थर का प्रयोग तो करलेता की क्या इससे सही  में भी सोना बनता है  , या नहीं पर आलस्य वश वह कुछ नहीं कर पाया !

 

दोस्तों हमे जीवन में इतना आलश्य नहीं करना चाहिए हमे इस कहानी से ये सिख लेना चाहिए दोस्तों चाहै  जादुई पत्थर ना सही पर हमे जीवन में अगर कोई ऐसा अवसर मिले की उससे हमारा जीवन बदल सके तो हमे ऐसा अवसर छोड़ना नहीं चाहिए उसे भुना लेना चाहिए ! दोस्तों आलस्य क्या है , इसे भी हमे समझना चाहिए

 

तो दोस्तों आपको ये पोस्ट  जीवन में आलस्य क्या है केसी लगी pliz हमे बताये और हमे आपके comments का इंतजार रहै गा और में आशा करता हु , की आप इसमें जो मेसेज जिया है  उसे अपने जीवन में जरूर उतारेंगे इसी के साथ !

 

धन्यवाद

विजय पटेल

 

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