एकाग्रता की शक्ति

एकाग्रता की शक्ति – आज मेये post आपके लिए लाया हु , जो आपको बहुत पसंद आएगी .

 

एकाग्रता की शक्ति

दोस्तों क्या आप जानते हे क्या होती हे , एकाग्रता या आप एकाग्रता के बारे मै क्या समझते हे , दोस्तों मै आप को बता ता हु , की क्या होती हे एकाग्रता दोस्तों हम किसी काम को करने मै जो समय लगाते हे अथवा हमने उस काम को कितनी

 

जल्दी पूरा किया , और सबसे अहम हमने  वो  काम कितना सीखा की हम अब किसी के बिना बताये उसे अकेले ही पूरा कर सकते हे , और अगर पूरा कर लिया तो समझलो हमने उस काम को पूरी एकाग्रता से सीखा और अगर नहीं कर पाए तो समझले की हमारा मन कहि भटक रहा हे  !

 

दोस्तों आप इस बात को ऐसे समझिये मानलो एक बच्चा स्कूल  जाता हे , और उसे स्कुल मै जो सब्जेक्ट पढ़ाये जाते हे , और पढ़ने के बाद जब टीचर उससे उसके बारे मै प्रश्न पूछता हे , और अगर उसने  जवाब सही दिया तो समझो की पूरी

 

एकाग्रता के साथ सुना और अगर जवाब नहीं दिया तो समझो उसमे एकाग्रता नहीं हे  तो समझे आप एकाग्रता क्या होती हे

 

एकाग्रता की शक्ति:

 

दोस्तों ये तो था एक उदाहरण   लेकिन मै आप को बताऊ  हमे जीवन मै आगे  बढ़ने   के लिए हर समय एकाग्रता की जरूरत  होती हे अगर हम working life मै हे तो हमे वहा  भी  एकाग्रता की जरूरत  होती हे !

 

दोस्तों मानलो हम किसी office या कही और  कोई काम करते हे या खुद  काही  बिजनेस हे , तो हम जबतक ठीक तरीके से एकाग्र होके काम नहीं करेंगे तबतक हमारा काम सही नहीं होगा , दोस्तों काम को पूरा करने के लिए हमे एकाग्र होना बहुत जरूरी हे और मानलो हम कही काम कर रहेहे और हमारा मन कहि भटक रहा हे तो क्या होगा हमारा काम बस बिगड़ेगा

 

दोस्तों और एक छोटासा उदाहरण देता हु , ” मै आपको आप सब गाढ़ी चलाते हो दोस्तों क्या हम गाढ़ी चलाते वक्त एकाग्र रहते हे या नहीं , हा हम एकाग्र रहते हे , अगर हम गाढ़ी चलाते वक्त एकाग्र नहीं  हेगे तो परिणाम क्या होगा वो मुझे बताने की जरूरत नहीं हे आपको पता हे ! ”

 

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अब मै आपको  एकाग्रता के ऊपर एक कहानी बताने जा रहा हु, जिससे आप को एकाग्रता क्या होता हे , अच्छे से समझ आजायेगा !

 

दोस्तों एक बार की बात हे जब स्वामी विवेकानंद और जर्मनी के संस्कृत भाषा के विद्वान् प्रोफेसर पाल डायसन संस्कृत भाषा पर चर्चा कर रहे थे , किसी कारण वश प्रोफेसर साब को उठ के जाना पढ़ा

 

तब स्वामीजी पास पढ़ी हुई एक किताब उठाके उसके पन्ने पलटने लगे , वो कवितावों का संकलन था वे उसे पढ़ने में लीन होगये , फिर थोड़ी देर बाद प्रोफेसर डायसन अपना काम निपटाकर वापस लोट आए ,

 

लेकिन स्वामीजी किताब पढ़ने में इस तरह खोये थे , की डायसन के लौटने का उन्हें पता ही नहीं चला , कुछ देर बाद डायसन को लगा की स्वामीजी जानबूझ कर उन्हें नजर अंदाज कर रहर हे !

 

पूरी किताब पढ़ने के बाद जब स्वामीजी ने अपनी गर्दन उठाई तो स्वामीजी ने डायसन को सामने बेठ इंतजार करता पाया ! वे बोले ” छमा  कीजियेगा  मै  पढ़   रहा  था , ” इसलिए आप कब आए इसका पता ही नहीं चला !

 

स्वामी विकेकानंद जी के माफ़ी मांगने के बाद भी डायसन के मन का मलाल खत्म नहीं हुवा , उन्हें यही लगता रहा की स्वामीजी ने जान – बूझकर उनकी उपेक्षा की , स्वामी विकेकानंद उनके मन का भाव जान गए , उन्हें बहुत दुःख हुवा !

 

डायसन को यकीन दिलाने के लिए वे किताब की कुछ कविताये सुनाने लगे ! लेकिन इसका उल्टा असर हुवा ! किताब की पंक्तिया सुनने के बाद डायसन ने कहा ” लगता हे आपने ये किताब पहले भी पढ़ी हे ”

 

दोस्तों डायसन के ये सोचने का कारण ये था की 200 पन्ने की किताब कोई इतने कम समय मै कैसे पढ़ सकता हे , वे – बोले ” किताब की सारी पंक्तिया आधे घंटे में याद होना मुमकिन  नहीं हे !

 

इस पर स्वामी विवेकानंद जी ने कहा – ” मिस्टर डायसन जीवन मै सबसे महत्वपूर्ण  हे , एकाग्रता ! एकाग्रता जितनी अधिक  होगी , आपका समय उतना ही कम लगेगा और आपका काम उतना ही जल्दी होगा !”

 

तो दोस्तों देखा आप ने स्वामी विवेकानंद जी ने किस तरह एकाग्रता दिखाई दोस्तों ठीक इसी प्रकार हमे भी , अपने आप को हर कार्य मे एकाग्रचित रखना हे तभी हम सफल होवेंगे  अन्यथा नहीं एकाग्रता के साथ किया हुवा काम ही सही और सफल होता हे !

 

दोस्तों आप कोये post एकाग्रता की शक्ति केसी लगी pliz मुझे बताये हमे  आपके Comments का इंतजार रहेगा  और दोस्तों आप इसके आलावा की हमसे कुछ पूछ सकते हे और बता सकते हे !

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