इंसान की कीमत क्या हे

हेलो दोस्तों

 

दोस्तों कैसे हे आप दोस्तों में आज आप के लिए बहुत ही प्रेरणादायक स्टोरी लाया हु , जो आप को बहुत , पसंद आएगी

 

इंसान की कीमत क्या हे

इंसान की कीमत क्या हे

 

दोस्तों इस दुनिया में जो – जो भी इंसान रहते हे मर्द या औरत दोस्तों उन सबको भगवान  नेही  बनाया हे , भगवान ने किसी इंसान में कोई भेद – भाव नहीं किया सब को एक समान शरीर दिया हे , सब को समान सोचने की बुद्धि दिहे , तो फिर इंसान बढ़ा – छोटा अमीर गरीब कैसे बना !

 

दोस्तों इंसान जो भी कर्म करता हे , उसके आधार पे उसकी कीमत बनती जाती हे , मानलो कोई पैसे वाला हे , और कोई गरीब हे , तो उस पैसे वाले ने ऐसे कर्म किया हे , उसने मेहनत करी हे , तब  जाके वो पैसे वाला बना हे ! और जो गरीब हे उसने कुछ मेहनत नहीं करी या उसे कुछ मोके नहीं मिले जिससे वो आगे बढ़े !

 

दुनिया में कोई राजा बनता हे , कोई कलेक्टर बनता हे तो कोई क्या बनता हे , और दूसरा कोई बेचारा सारी उम्र ठेला चलाता हे , मजदूरी करता हे , तो इंसान की कीमत उसके काम से होती हे , जो वो करता हे

 

तो दोस्तों अब में आप को इंसान की कीमत क्या हे , उसके ऊपर एक कहानी बताने जारहा हु , आपको बहुत पसंद आएगी

 

इंसान की कीमत क्या हे

 

एक लुहार पिता और पुत्र दोनों दोनों अपनी लोहे की दुकान में काम कर रहे थे , तभी पुत्र ने अपने पिताजी से एक प्रश्न पूछा   , ” पिताजी …इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत हे ?”

 

एक छोटे बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुनकर तो उसके पिताजी सोच में पड़गये ! थोड़ी देर बाद वे बोले , ” बेटे एक मनुष्य कीमत आंकना बहुत मुश्किल काम हे ,  क्योंकि वोतो अनमोल हे , उसका कोई मूल्य नहीं !”

 

बालक ने फिर से एक प्रश्न पूछा  , ” क्या सभी मनुष्य की एक समान  कीमत और महत्व हे ?”

 

पिताजी ने जवाब दिया, ” हा बेटा ”

 

दोस्तों आपने देखा होगा बच्चे बहुत जिज्ञासा वान होते हे , इसलिए उसने अपने पिताजी से एक और सवाल किया , ” तो फिर इस दुनिया में कोई गरीब तो , कोई अमीर  क्यों हे ? किसी को कम महत्व दिया जाता हे , तो किसी को बहुत ज्यादा , ऐसा क्यों हे ?”

 

 

बच्चे के द्वारा इस तरह के सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर शांत रहे , और फिर अपने पुत्र से स्टोर रूम में पढ़ा एक लोहे का सरिया लाने को कहा !

 

सरिया लाते ही पिताजी ने पूछा  , ” बेटे .. इसकी क्या कीमत हे ?”

 

बालक ने तुरंत जवाब दिया , ” पिताजी .. इसकी कीमत लगभग ५५० रूपये होगी !”

 

पिताजी ने अपने पुत्र से सवाल किया , ” अगर में इससे बहुत छोटी – छोटी कील बतादू , तो इसकी क्या कीमत होगी ?”

बालक कुछ देर सोचकर कुछ केलकुलेशन करके बोला , ” पिताजी अगर हम इसे गला करके कील बना देंगे , तब तो इसकी कीमत तकरीबन ८०० रूपये हो जाएगी !”

 

पिताजी ने पूछा , ” और अगर में इस लोहे को गलाकर इससे घड़ी की बहुत साडी स्प्रिंग बना दू तो ?”

 

तब बालक ने उत्साहित होकर बोला , ” पिताजी तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा होजायेगी और हम इसे बेचकर बहुत सारा धन कमा लगे !”

 

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फिर पिताजी अपने पुत्र को समझाते  हुए कहने लगे . ” बेटा.. बस ठीक इसी तरह से मनुष्य की कीमत इससे नहीं होती हे की अभी वो क्या हे , बल्कि इससे होती हे की वो अपने आप को क्या बना सकता हे ! वो जिस राह पर चलता हे , उसी से तय होता हे की वह अमीर बनकर अपने महत्व को बढ़ाएगा या गरीब बनकर अपने जीवन को अंधकार की और ले जायेगा !”

 

अब बेटे कोभी बात समझ आगयी !

 

तो दोस्तों देखा आपने किस प्रकार हमे इंसान की कीमत पता चली में आपको फिर बतादू इंसान की कीमत उसके कर्मो के आधार पेही होती हे , इसलिए हमे आगे बढ़ने के लिए अपने वर्क पे और अपने कर्मो पे फोकस  करना हे

 

दोस्तों आप कोये पोस्ट इंसान की कीमत क्या हे  केसी लगी प्लीज़ मुझे बताये और मुझे आप के कमैंट्स का इंतजार रहेगा !

 

 

 

 

 

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