अपने दिमाग को खाली करे

अपने दिमाग को खाली करे – आज में ये post आपके लिए लाया हु , जो बहुत ही ज्ञानवर्धक है , और आपको बहुत पसंद आएगी.

 

अपने दिमाग को खाली करे

दोस्तों अगर में आप से पुछू की आप के पास  एक पानी का भराहुवा ग्लास है, और आप को उसमे और पानी डालना है तो आप क्या करेंगे, में समझता हु, की आप बोलेगे की पहले ग्लास को खाली करना पढ़ेगा तभी हम उसमे पानी दाल सकते है ! बिलकुल सही

 

दोस्तों इसी प्रकार इंसान का दिमाग भी एक पानी के भरे ग्लास की तरह ही है , जिसमे सारे जमाने का टेंशन, वर्क लोड ,जमाने भरमें क्या होरहा है उसका दुःख, हम सही कमा नहीं पारहे है उसका दुःख ,किसी दूसरे के पास ज्यादा धन है उसकी टेंशन किसीकी अच्छी जॉब है और हमारी अच्छी नहीं है उसकी टेंशन दोस्तों इंसान के दिमाग में और भी कई प्रकार का कूड़ा – कचरा भरा हुवा है , जो उसके काम का भी नहीं है !

 

दोस्तों कोई बोले की आज के इंसान को ज्ञान देना चाहिए तोये कैसे सम्भव है , हमे कुछ भी अगर किसी से ज्ञान लेना है , दोस्तों पहले तो आज का इंसान किसी की नहीं सुनता किसी का ज्ञान नहीं लेता और अगर सुनने

 

अपने दिमाग को खाली करे

 

को  तैयार भी होजाये तो हमे पहले उसके दिमाग में पहले से जो भरा हुवा कूड़ा – कचरा है हमे उसको निकालना होगा  तभी हम उसे दूसरा ज्ञान दे सकते है!

 

दोस्तों इसी प्रकार आज कल बच्चे से लेके बूढ़े तक हर इंसान का दिमाग कई प्रकार की चीजों से भरा हुवा है जिसमे नया कुछ सिखने के लिए जगा ही नहीं है , तो पहले हमे अपने दिमाग को खाली करना होगा तभी हम कुछ नया सिख पाएंगे !

 

तो दोस्त अपने दिमागको खाली करेअब में इसकेऊपर एक कहानीबताना चाहुगा जोआप को बहुतपसंद आएगी  –

 

एक बार स्वामीअग्नेश्वरजी भिक्षा मांगते हुएएक घर केसामने खड़े हुएऔर उन्होंने आवाजलगाई

 

स्वामी अग्नेश्वरजी-

 

जय जय रघुवीरसमर्थ ! ” घर सेएक महिला बाहरआयी ! उसने उनकीझोली में भिक्षाडाली और कहा, “महात्माजी , कोई उपदेशदीजिये !”

 

स्वामीजी बोले, ” आज नहींकल दुगा

 

दूसरे दिन स्वामीजीने पुनः उसघर के सामनेआवाज दी – “जयजय रघुवीर समर्थ!” उस घर कीस्त्री ने उसदिन खीर बनाईथी , जिसमे बादाम- पिस्टे भी डालेथे !

 

वह खीरका कटोरा लेकेबाहर आयी ! स्वामीजीने

अपना कमंडल आगे करदिया ! वह स्त्रीजब खीर डालनेलगी , तो उसनेदेखा कमंडल मेंगोबर और कूड़ाभरा पढ़ा है! उसके हाथ ठिठकगए ! वह बोली” महाराज , यह कमंडलतो गंदा है”

 

स्वामीजी बोले , ” हा , गंदातो है , किन्तुखीर इसमें डालदो !” स्त्री बोली , ” नहींमहाराज , तब तोखीर खराब होजाएगी ! मुझे दीजियेयह कमंडल , मेंइसे शुद्ध करलाती  हु!”

 

स्वामीजी बोले , जब यहकमंडल साफ होजायेगा , तभी इसमेंखीर डालोगी ना?

 

स्त्री ने कहाजी महाराज

 

स्वामीजी बोले . ” मेरा भीयही उपदेश है! मन में जबतक चिंताओं काकूड़ा – कचरा औरबुरे संस्कारो कागोबर भरा है, तब तक उपदेशदेने का कोईलाभ नहीं होगा! यदि उपदेश लेनाहै , तो प्रथमअपने मन कोशुद्धः करना चाहिए, कुसंस्कारो का त्यागकरना चाहिए , तभीसच्चे सुख औरआनंद की प्राप्तिहोगी “!

 

तो दोस्तों देखा आपने किस प्रकार इंसान के दिमाग में सब कुछ भरा है , और जैसा मेने ग्लास का उदाहरण दिया था उसी प्रकार हमारे दिमाग को भी पहले हमे खाली करना पढ़ेगा तभी नया ज्ञान ग्रहण कर सकेंगे !

 

तो दोस्तों आप को ये post अपने दिमाग को खाली करे केसी लगी pliz हमे बताये हमे आपके Comments का इंतजार रहेगा!

 

धन्यवाद

विजय पटेल

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